सुप्रीम कोर्ट में आंध्र प्रदेश के सीएम के ख़िलाफ याचिका, न्यायिक संस्था को बदनाम करने का आरोप

by M. Nuruddin 1 year ago Views 1960

Petition against CM of Andhra Pradesh in Supreme C
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगनमोहन रेड्डी के ख़िलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने सीएम जगनमोहन पर सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज के ख़िलाफ ‘बेबुनियाद और भद्दी टिप्पणी’ करने का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट से तत्काल सुनवाई कर सीएम को कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील सुनील कुमार सिंह ने अपनी याचिका में कहा कि 6 अक्टूबर को जगनमोहन रेड्डी ने चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिखकर बेबुनियाद आरोप लगाए थे। याचिका में कहा गया है कि इसके बाद जगनमोहन रेड्डी के प्रधान सलाहकार ने 10 अक्टूबर को उसी चिट्ठी को मीडिया के सामने भी साझा किया।


वकील सुनील कुमार का आरोप है कि सीएम जगनमोहन रेड्डी न्यायपालिका के ख़िलाफ सार्वजनिक बयान दे रहे हैं और प्रेस कांफ्रेंस कर न्यायिक संस्था को बदनाम कर रहे हैं। लिहाज़ा उन्हें नोटिस भेजकर ऐसा करने से रोका जाए।

याचिका में कहा गया है, ‘यह विश्वास है कि अदालतें लोकतंत्र में जनता के लिए प्रेरणा का काम करती हैं। ऐसे करने से मीडिया में घंटों चर्चा होती है जिससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित होती है। उच्च न्यायपालिका पर टिप्पणी करने के लिए संसद या राज्य की विधानसभा है, न की मीडिया और प्रेस कांफ्रेंस।’

याचिका में यह भी कहा गया है, ‘न्यायपालिका को दी गई संवैधानिक प्रतिरक्षा उसे निडर होकर काम करने की इजाज़त देती है। न्यायपालिका की आलोचना बढ़ गई है जो पहले के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा है। जगनमोहन रेड्डी को न्यायपालिका का सम्मान करना चाहिए।’

याचिकाकर्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील सुनील कुमार सिंह का कहना है कि सीएम रेड्डी इसे, ‘समझने और सराहना करने में पूरी तरह से विफल रहे’ और उनका ‘गैरजिम्मेदाराना बयान’ न्यायपालिका में सार्वजनिक विश्वास को अस्थिर कर देगा।

बता दें कि सीएम जगनमोहन ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश एसए बोबड़े को 6 अक्टूबर को चिट्ठी लिखी थी। इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी। उन्होंने अपनी चिट्ठी में आरोप लगाया था कि सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एनवी रमन्ना ने राज्य की अदालतों में न्यायिक नियुक्तियों को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसा टीडीपी नेताओं के पक्ष में फैसले के लिए किया गया था जो कई भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं।’

उन्होंने दावा किया कि एक जांच से पता चला है कि पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और उनकी पार्टी से जुड़े कई अन्य लोगों ने ‘अवैध’ रूप से ‘मोटी रक़म’ भी जुटाई थी।

रेड्डी सरकार ने बाद में एक प्रेस नोट भी जारी किया जिसमें खुले तौर पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश को आरोपित किया गया। प्रेस नोट में कहा गया कि, ‘नई सरकार आने के बाद चंद्रबाबू नायडू के 2014-2019 के बीच के कार्यकाल की जांच शुरु की जिसमें यह खुलासा हुआ है। अब यह स्पष्ट है, कि जस्टिस एनवी रमन्ना ने तब के मुख्य न्यायाधीश जितेंद्र कुमार माहेश्वरी के माध्यम से राज्य में न्यायिक व्यवस्था को प्रभावित करने का काम किया।’

कहा जा रहा है कि सीएम रेड्डी ने जिन सबूतों का दावा किया है, वो दरअसल यह है कि साल 2017 में जस्टिस एनवी रमन्ना ने सीजेआइ को आंध्रप्रदेश हाई कोर्ट के लिए कुछ जजों के नाम की राय दी थी, और उन्हीं नामों का ज़िक्र राज्य के तत्कालीन सीएम रहे चंद्रबाबू नायडू ने भी अपनी चिट्ठी में किया था। इसी को लेकर विवाद छिड़ गया है। बता दें कि जस्टिस एनवी रमन्ना वहीं हैं जो भारत के अगले मुख्य न्यायधीश हो सकते है।

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