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कोविड का ट्रायल टीका लेने वाले शख्स ने दुष्प्रभाव का आरोप लगाकर माँगा पाँच करोड़ मुआवज़ा

by M. Nuruddin 5 months ago Views 1773

Person who took trial vaccine of Covid demanded co
देश में अगले साल तक कोविड वैक्सीन के आने की पूरी उम्मीद की ही जा रही थी कि ट्रायल टीका लेने वाले चेन्नई के एक 40 वर्षीय वॉलंटियर पर गंभीर साइड इफेक्ट की बात सामने आई है। वॉलंटियर का कहना है कि उसे ‘कोविडशील्ड’ के डोज़ से वर्चुअल न्यूरोलॉजिकल ब्रेकडाउन जैसी समस्या हो रही है।

इस आरोप के साथ ही शख़्स ने वैक्सीन बनाने वाले पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट और अन्य को क़ानूनी नोटिस भेजकर पांच करोड़ रुपये मुआवज़ा देने की मांग की है। इसके अलावा ट्रायल को रोकने की माँग भी की गई है। उधर, सीरम इंस्टीट्यूट ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए सौ करोड़ रुपये की मानहानि का दावा करने की धमकी दी है।


चैन्नई के वॉलंटियर ने वैक्सीन की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए इसके परीक्षण, ‘निर्माण और वितरण’ के लिए मिले अप्रूवल को रद्द करने की मांग की है। यही नहीं उसके नोटिस पर एक्शन नहीं लेने पर क़ानूनी कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी।

बता दें कि सीरम इंस्टीट्यूट, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और फार्मास्युटिकल कंपनी एस्ट्रा ज़ेनेका के साथ मिलकर कोविड वैक्सीन बना रहा है। सीरम इंस्टीट्यूट के साथ इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च की भी वैक्सीन निर्माण के इस प्रयास में भागिदारी है।

सीरम इंस्टीट्यूट का कहना है कि वॉलंटियर की शिकायत पर मेडिकल टीम की तरफ से स्पष्ट जानकारी दी गई थी। जिस प्रकार की उन्हें समस्या हुई वो वैक्सीन ट्रायल से अलग थीं। इसके बावजूद उन्होंने सार्वजनिक मंच का इस्तेमाल कर कंपनी की प्रतिष्ठा को धूमिल किया है।

वॉलंटियर का आरोप है कि वैक्सीन के डोज़ से उनका मस्तिष्क प्रभावित हुआ है। वॉलंटियर ने दावा किया है कि उन्होंने इसकी जांच करवाई जिसमें सामने आया है कि वैक्सीन के डोज़ से ही उनको इस तरह की समस्या हो रही है। एक मनोवैज्ञानिक ने अपने मूल्यांकन के आधार पर कहा है कि वॉलंटियर की वर्बल और विज़ुअल याददाश्त कमज़ोर हुई है और यह वैक्सीन का ही साइड इफेक्ट है।

मनोवैज्ञानिक के मुताबिक़ ‘वॉलंटियर को न्यूरोलॉजिकल और मनोवैज्ञानिक, दोनों तरह  की समस्या हुई। वैक्सीन के डोज़ से उनमें वर्चुअल न्यूरोलॉजिकल ब्रेकडाउन की समस्या पैदा हुई।’

वैक्सीन के आख़िरी फेज़ के ट्रायल में शामिल होने वाले वॉलंटियर को ‘पार्टिसिपेंट इंफोर्मेशन शीट’ के माध्यम से यह जानकारी दी गई थी कि ‘ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित वैक्सीन ‘कोविशिल्ड’ सुरक्षित है। इसके बाद ही शख़्स ने वॉलंटियर के तौर पर 29 सितंबर को अपनी सहमति दी थी।

1 अक्टूबर को उसे वैक्सीन की पहली डोज़ दी गई। बताया जा रहा है कि शुरुआती 10 दिनों में कोई साइड इफेक्ट सामने नहीं आया। हालांकि बाद में गंभीर सिरदर्द और उल्टी जैसी समस्या शुरु हो गई। 11 अक्टूबर को शख़्स को रामचंद्र अस्पताल में भर्ती करवाया गया, जहां उनके परिवार वालों ने बताया कि उनके व्यवहार में परिवर्तन आया है।

बताया जा रहा है कि वैक्सीन लगने के कुछ बाद बाद शख़्स न तो किसी को पहचान पा रहा था और न ही कुछ बोल पा रहा था। गंभीर हालत में उसे आईसीयू में भर्ती करना पड़ा था। 26 अक्टूबर को परिवार की मांग पर उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। नोटिस में कहा गया है कि अगर ट्रायल वैक्सीन के जोखिमों की जानकारी होती तो वे ट्रायल में हिस्सा नहीं लेते। ‘पार्टिसिपेंट इंफोर्मेशन शीट’ में सुरक्षा को लेकर तमाम दावे किये गये थे जिसके बाद ही उन्होंने ट्रायल में हिस्सा लेने का फैसला किया था।

वॉलंटियर के इस नोटिस को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ट्रायल, द जेनर इंस्टीट्यूट लेबोरेटरीज ऑफ ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और ब्रिटेन में एस्ट्रा ज़ेनेका को भी भेजा गया है। सीरम इंस्टीट्यूट ने इन आरोपों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए ख़ारिज कर दिया है और ‘नुकसान’ के लिए मुक़दमें की चेतावनी दी है।

 

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