भूख-भूख करते रहे लोग लेकिन मोदी सरकार ने अनाज बेच दिए विदेश

by M. Nuruddin 8 months ago Views 1039

यह ठीक वैसा ही जैसा 1943 में विंस्टन चर्चिल, ब्रिटिश हुकूमत के वॉरटाइम लीडर ने किया था जिसके वजह से अकेले पश्चिम बंगाल में 30 लाख लोग मारे गए थे...

People kept on starving but Modi government sold f
कोरोना महामारी के दौरान भारत में भुख़मरी अपने चरम पर पहुंच गई। लोग भूख-भूख, राशन-राशन करते रहे लेकिन मोदी सरकार ने रेकॉर्ड अनाज विदोशों को बेच दिया। हालिया एक रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है कि भारत के एग्रिकल्चर एक्सपोर्ट में महामारी के दौरान रेकॉर्ड बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि देश में बड़ी संख्या लोग भूख की वजह से भी मारे गए और देश की लगभग 20 करोड़ आबादी आज भी भूखा सोती है।

यह ठीक वैसा ही जैसा 1943 में विंस्टन चर्चिल, ब्रिटिश हुकूमत के वॉरटाइम लीडर ने किया था जिसके वजह से अकेले पश्चिम बंगाल में 30 लाख लोग मारे गए थे।


मसलन भारत ने वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान एग्रिकल्चर प्रोडक्शन और एग्रिकल्चर प्रोड्यूस एक्सपोर्ट के सभी पिछले रेकॉर्ड तोड़ दिए, जबकि हंगर इंडेक्स में भारत की रैंकिंग अबतक की सबसे ख़राब रैंकिंग आंकी गई है। चावल, गेहूं और मक्का जैसे अनाज के निर्यात में 57.7 फीसदी की भारी बढ़ोत्तरी देखी गई है, बकि हंगर इंडेक्स में भारत 107 देशों की रैंकिंग में 94वें से फिसलकर 116 देशों की रैंकिंग में 101वें स्थान पर आ गई है, जो पिछले साल के मुक़ाबले दो अंक कम हैं।

केन्द्र सरकार ने ऐसे तो हंगर इंडेक्स में मिली ख़राब रैंकिंग की वजह से इसका विरोध किया है लेकिन इसके ख़ुद के आंक़ड़े बताते हैं जो कथित तौर पर 800 मिलियन या 80 करोड़ है। यानि महामारी के दौरान से ही केन्द्र की मोदी सरकार यह दावे कर रही है कि उसने 80 करोड़ जो कि भारत की कुल आबादी का 60 फीसदी है, को सूखा अनाज मुहैया कराया। यही नहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख़ुद भी अपने भाषणों में कई बार इसका ज़िक्र किया है और नवंबर महीने तक बक़ौल प्रधानमंत्री 80 करोड़ देश के ज़रूरतमंदों को अनाज मुहैया कराया जाना है।

अगर आंकड़े देखें तो पता चलता है कि देश के कुल निर्यात में 28 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है, जबकि अनाज के निर्यात या एक्सपोर्ट में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। Agricultural and Processed Food Products Export (APEDA) की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत का वित्त वर्ष 2020 के दौरान कुल एक्सपोर्ट में एग्रिकल्चर एक्सपोर्ट या कृषि निर्यात 49 फीसदी रहा है।

हालांकि बासमती चावल का निर्यात 3.7 फीसदी गिरकर 29,849 करोड़ रुपये हो गया, यह ग़ैर बासमती चावल के निर्यात से ज़्यादा रहा जो वित्त वर्ष 2020-21 में 147 फीसदी बढ़कर 35,476 करोड़ रूपये हो गया है। इसी तरह, गेहूं के निर्यात में 819 फीसदी और मक्का के निर्यात में 358 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है।

हालांकि कीमतें बढ़ने से केन्द्र सरकार ने प्याज़ के निर्यात पर रोक लगा दी थी लेकिन अनाज के निर्यात पर कोई प्रतिबंध नहीं थे। आयात के मोर्चे पर एपीडा उत्पादों के कुल आयात में 2.28 फीसदी की गिरावट आई है। महामारी के दौरान देश के सभी सेक्टर में गिरावट देखी गई थी, जबकि कृषि एकमात्र क्षेत्र रहा जिसने 3 फीसदी का इज़ाफा देखा था।

ग़ौरतलब है कि, 20वीं शताब्दी के मध्य (1943) में विंसटन चर्चिल की नीतियों की वजह से अनाज के कुल पैदावार का लगभग पूरा हिस्सा विदेशों में भेज दिया गया था। 2019 में, जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स नामक एक पत्रिका में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया था कि 1943 में बंगाल अकाल में जिन तीन मिलियन या 30 लाख लोगों की मौत हुई थी, वो सिर्फ सूखे की वजह से नहीं बल्कि ब्रिटिश हुकूमत के वॉरटाइम लीडर कहे जाने वाले विंसटन चर्चिल की नीतियों की वजह से हुई थी और मौजूदा सरकार की नीतियां इससे कम भी नहीं लगती।

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