‘आंशिक रूप’ से स्वतंत्र भारत 'पत्रकारों के लिए ख़तरनाक'

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2181

'पत्रकारों के ख़िलाफ़ हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है, विशेष रूप से जब निशाना महिला हो'

'Partially' independent India 'dangerous for journ
‘आंशिक रूप’ से स्वतंत्र भारत में प्रेस की स्वतंत्रता पर ख़तरा कम नहीं हुआ है। रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर की ताज़ा रिपोर्ट में भारत प्रेस की स्वतंत्रता में 142वें स्थान पर बरक़रार है। इस लिस्ट में भारत अपने पड़ोसी मुल्कों के मुक़ाबले लगातार ख़राब प्रदर्शन कर रहा है। 180 देशों की लिस्ट में भारत उन देशों की श्रेणी में शामिल है जो स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए ‘ख़राब’ माने जाते हैं। रिपोर्ट में ईमानदारी से काम करने वाले पत्रकारों के लिए भारत को एक ‘ख़तरनाक देश’ बताया गया है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि, ‘साल 2020 में अपने काम के सिलसिले में मारे गए चार पत्रकारों के साथ भारत पत्रकारों के लिए सबसे ख़तरनाक देशों में एक है। जो पत्रकार अपना काम ठीक तरीके से करने की कोशिश करते हैं उन्हें हर तरह के हमले का सामना करना पड़ता है। पत्रकारों के ख़िलाफ़ पुलिस हिंसा, राजनीतिक कार्कर्ताओं द्वारा घात और आपराधिक समूंहों या भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों द्वारा उक़साए गए विद्रोह शामिल हैं।’


मंगलवार को जारी वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2021 में यूरोपीय देश नॉर्वे टॉप पर बना हुआ है। इसके बाद फिनलैंड और डेनमार्क है। जबकि एरिट्रिया इस लिस्ट में सबसे निचले पायदान पर है। लिस्ट में चीन 177वें स्थान पर है। इनके अलावा तुर्कमेनिस्तान 178वें और उत्तर कोरिया 179वें स्थान पर है।

साल 2013 से 2019 के बीच प्रेस की स्वतंत्रता में भारी गिरावट देखी गई। साल 2019 में भारत इस लिस्ट में 140वें स्थान पर पहुंच गया था। बाद में साल 2020 के दौरान भारत दो पायदान और लुढ़ककर 142वें स्थान पर पहुंच गया जो अभी भी बरक़रार है। अगर पड़ोसी मुल्क़ों की बात करें तो नेपाल में अन्य पड़ोसी मुल्क़ों के मुक़ाबले हालात थोड़े बेहतर हैं।

मसलन ताज़ा प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में नेपाल 106वें, श्रीलंका 127वें, म्यांमार (सैन्य तख़्तापलट के पहले) 140वें, पाकिस्तान 145वें और बांग्लादेश 152वें स्थान पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ब्राजील, मेक्सिको और रूस के साथ भारत पत्रकारिता के लिए सबसे ‘ख़राब’ देश है।

अन्य एजेंसियों की रिपोर्ट की तरह ही इस रिपोर्ट में भी कहा गया है कि नरेंद्र मोदी के दोबारा सत्ता में आने के बाद से हालात बिगड़े हैं। रिपोर्टर्स विदआउट बॉर्डर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी की 2019 में दोबारा बहुमत की सरकार बनने के बाद मीडिया पर ‘हिंदू राष्ट्रवादी’ सरकार के अनुरुप काम करने का दबाव बढ़ गया है।’

रिपोर्ट के मुताबिक़, ‘हिंदुत्व की विचारधारा का समर्थन करने वाले भारतीय, सार्वजनिक बहस को राष्ट्रविरोधी विचार साबित करने में जुटे हैं। भारत में हिंदुत्व का समर्थन करने वालों के ख़िलाफ़ लिखने या बोलने वाले पत्रकारों को निशाना बनाया जाता है, उनके ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर नफरत भरा अभियान चलाया जाता है। पत्रकारों के ख़िलाफ़ हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया जाता है, विशेष रूप से जब निशाना महिला हो।’

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की आलोचना करने वाले पत्रकारों को चुप कराने के लिए उन पर राजद्रोह जैसी धाराएं लगा दी जाती है। रिपोर्ट में इस बात पर भी ग़ौर किया गया है कि कोरोना की आड़ में किस तरह से सरकार ने प्रेस की स्वतंत्रता को कुचलने का काम किया। कश्मीर में हालात अभी भी चिंताजनक है जहां पत्रकारों को पुलिस और अर्द्धसैनिक बलों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। कश्मीर में मीडिया को ऑरवेलियन कंटेट रेगुलेशन का सामना करना पड़ रहा है जो मीडिया आउटलेट के बंद होने के लिए ज़िम्मेदार है, जैसा कि कश्मीर टाइम्स के साथ हुआ।’ 

रिपोर्ट कहती है, ‘सरकार समर्थित मीडिया ने दुष्प्रचार शुरू किया है। ऐसे पत्रकार जो सरकार की आलोचना करने की हिम्मत रखते हैं, उन्हें भाजपा के समर्थकों द्वारा राष्ट्रविरोधी या यहां तक कि आतंकवादी समर्थक तक बता दिया जाता है।’ रिपोर्ट से पता चलता है कि 180 देशों में 73 फीसदी ऐसे हैं जहां पत्रकारिता पूरी तरह या आंशिक रूप से अवरुद्ध है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडेक्स के 180 देशों में सिर्फ 12 या 7 फीसदी देश ही पत्रकारिता के लिए अनुकूल हैं।’

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