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कृषि भूमि पर महिलाओं का मालिक़ाना हक़ बढ़ा, गाँवों में 85 फ़ीसदी औरतें खेती से जुड़ी

by Rahul Gautam 1 month ago Views 2035

Ownership of women on agricultural land increased
देश के कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती जा रही है। पहले से ज्यादा खेतिहर भूमि का मालिकाना हक़ अब औरतो के पास है। ऐसा कहना है 2018 में जारी हुए कृषि सेन्सेस का। इसके मुताबिक जहाँ 2010-11 में 12.8 % औरतें खेतिहर भूमि की मालिक थीं, वहीं यह आँकड़ा 2015-16 में 14 % हो गया। इन ज़मीनों पर औरतें न खुद खेती करती हैं बल्कि खेतिहर मज़दूरों से भी काम लेती हैं।

देश में कुल 20.44 मिलियन हेक्टर ज़मीन, पर महिलाएं खेती में जुटी हैं। इसका सबसे ज्यादा भाग आंध्र प्रदेश में है जहाँ यह 12.55 प्रतिशत है। इसके बाद महाराष्ट्र में 11.6 फीसदी,  बिहार में 11.2 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 8.9 फीसदी, कर्नाटक और केरल में 8.5 %, तमिलनाडु में 7.6 %, तेलंगाना में 6.7 %, मध्यप्रदेश में में 5.8 %, गुजरात में 4.3 %,  राजस्थान  में 3.8 % और छत्तीसगढ़ में  2.7 % खेती पर महिलाओं का मालिकाना है। आसान भाषा में कहे तो इन्ही 12 राज्यों में उस ज़मीन का 92 % भूभाग है जहाँ महिलाएँ खेती करती हैं।


एक और दिलचप्स बात जो इस सेन्सस में निकल कर आई वो यह है कि 2015-16 में 2010-11 के मुकाबले अनुसूचित जातियों द्वारा जोती जाने वाली ज़मीन में 1.8 प्रतिशत की कमी आई जबकि उसी समय दलित महिलाओं के मालिकाने वाली ज़मीन में 10.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और दलित मर्दों की ज़मीन में 3.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।

आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 के मुताबिक कृषि क्षेत्र में महिलाओ को हासिल कुल रोज़गार का 80% है। इनमें 33% खेतिहर मज़दूर और 48% खुद किसान हैं। भारत में 85% गाँव की औरतें कृषि में लगी हुई हैं, पर मालिकाना हक 14%  महिलाओं के ही पास है। केवल 7% महिलाओं के पास भूमि के मालिकाना अधिकार के साथ बिहार में स्थिति सबसे ख़राब है जबकि कृषि क्षेत्र में 50.1% से अधिक महिलाएँ वहाँ सक्रिय हैं। सर्वे के मुताबिक रोज़गार के लिए मर्दो के  शहर जाने से खेती का स्त्रीकरण हो गया है। यही वजह है कि किसान, उद्यमी और मजदूर के रूप में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है।

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