विदेशों में बसे 1.36 करोड़ भारतीयों में से 84 लाख से ज़्यादा मुस्लिम देशों में: विदेश मंत्रालय

by Rahul Gautam 3 months ago Views 1299
Out of 1.36 crore Indians settled abroad, more tha
देश में नागरिकता क़ानून के बहाने भारतीय बनाम बाहरी के मुद्दे पर माहौल गर्म है. इसी माहौल में संसद में पेश एक आंकड़ा बताता है कि रोज़गार और घर चलाने के लिए एक करोड़ से ज़्यादा भारतीय विदेशों में बस गए हैं. जिन छह देशों में सबसे ज़्यादा भारतीय रह रहे हैं, उनमें पांच इस्लामिक देश हैं. 


भारतीय बनाम बाहरी के मुद्दे पर देश में तीखी बहस छिड़ी हुई है. ठीक इसी वक़्त लोकसभा में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि रोज़गार और घर परिवार चलाने के लिए एक करोड़ 36 लाख भारतीय विदेशों में बस गए हैं. इनमें सबसे ज्यादा 34 लाख 20 हज़ार भारतीय यूनाइटेड अरब एमिरात में रह रहे हैं. वहीं सऊदी अरब में 25 लाख 94 हज़ार 947,  अमेरिका में 12 लाख 80 हज़ार, कुवैत में 10 लाख 29 हज़ार 861, ओमान में 7 लाख 79 हज़ार 351, क़तर में 7 लाख 56 हज़ार 062, नेपाल में 6 लाख, यूनाइटेड किंगडम में 3 लाख 51 हज़ार, सिंगापुर में 3 लाख 50 हज़ार, बहरीन में 3 लाख 23 हज़ार 292 और ऑस्ट्रेलिया में 2 लाख 41 हज़ार, मलेशिया में 2 लाख 24 हज़ार 882 और कनाडा में 1 लाख 78 हज़ार 410 भारतीय रह रहे हैं। 

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इन आंकड़ों से पता चलता है कि इन 13 देशों में सबसे ज़्यादा एक करोड़ 13 लाख 72 हज़ार 743 भारतीय रह रहे हैं. इनमें से सात इस्लामिक देश यूनाइटेडट अरब एमिरात, सऊदी अरब, कुवैत, ओमान, क़तर, बहरीन और मलेशिया में 83 लाख 72 हज़ार 333 भारतीय रह रहे हैं जबकि अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, नेपाल, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा में 30 लाख 410 भारतीय रह रहे हैं. इन देशों में मलेशिया भी शामिल है जिसके प्रधानमंत्री महातिर मुहम्मद ने हाल ही में नागरिकता क़ानून पर मोदी सरकार की तीखी आलोचना की थी.    

मध्य पूर्व के मुक़ाबले यूरोपीय और अफ्रीकी देशों में भारतीयों की संख्या बेहद कम है. आंकड़ों के मुताबिक इटली में 1 लाख 72 हज़ार, जर्मनी में एक लाख आठ हज़ार, दक्षिण अफ्रीका में 60 हज़ार, स्पेन में 51 हज़ार और फ्रांस में 29 हज़ार भारतीय रह रहे हैं. पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी 10 हज़ार से ज़्यादा भारतीय रह रहे हैं. सिर्फ 5 ऐसे मुल्क हैं जहां एक भी हिंदुस्तानी नहीं है। इनमें होली सी, किरिबाती, सेन मारिनो, तुवालु और पाकिस्तान हैं. विदेश मंत्रालय ने कुल 208 मुल्कों में रहे भारतीयों का आंकड़ा जारी किया है.

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यह आंकड़े बताते हैं कि जब दुनिया के कमोबेश सभी देशों ने बाहें खोलकर भारतीयों का स्वागत किया है, तब केंद्र की मोदी सरकार ने धर्म के आधार पर नागरिकता देने वाला क़ानून बनाकर अंतरराष्ट्रीय जगत में एक कड़वाहट पैदा कर दी है. यूनाइटेड नेशंस और ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज़ इसपर सवाल उठा चुके हैं.

मध्य पूर्व और अन्य देशों में रह रहे भारतीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं. वित्त वर्ष 2018-19 में विदेशों में रह रहे भारतीयों ने 76.4 बिलियन डॉलर वापस स्वदेश भेजे थे लेकिन वित्त वर्ष 2019-20 में सितम्बर तक भारत में सिर्फ 41.9 बिलियन डॉलर ही भेज पाए हैं.