सिर्फ 11% भारतीय आबादी पूर्ण टीकाकृत, कैसे पूरा होगा वैक्सीनेशन लक्ष्य?

by Sarfaroshi 1 year ago Views 2155

भारत में कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए टीकाकरण अभियान पिछड़ता नज़र आ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में टीकाकरण योग्य आबादी के सिर्फ एक चौथाई हिस्से को ही कोविड वैक्सीन की कम से कम एक खुराक दी गई है जबकि सिर्फ 11 फीसदी आबादी का ही पूर्ण टीकाकरण हुआ है। बता दें कि सरकार का दावा है कि दिंसबर के अंत तक 18 वर्ष से अधिक सभी नागरिकों का पूर्ण टीकाकरण किया जाएगा।  

आंकड़ों की माने तो देश में 18+ आबादी की संख्या 94 करोड़ के आसपास है जिनके पूर्ण टीकाकरण के लिए 188 करोड़ कोविड वैक्सीन की खुराक चाहिए होंगी हालांकि पीआईबी के अनुसार 11 अगस्त 2021 तक सिर्फ 51.90 करोड़ वैक्सीन की ही खुराक दी गई हैं।


बता दें कि करीब 135 करोड़ कविड वैक्सीन खुराक देने के लिए भारत के पास सिर्फ पांच महीनों का समय बचा है जबकि टीकाकरण की रफ्तार इस टार्गेट को पूरा करने के लिए प्रभावी साबित नहीं हो रही है। देश में जुलाई के महीने में टीकाकरण का औसत 39.31 लाख रहा। 

राज्य स्तर पर टीकाकरण के हालात और ज़्यादा खस्ता हैं। बीजेपी शासित यूपी और बिहार में अब तक 5 फीसदी से भी कम लोग पूर्ण टीकाकरण करा पाए हैं। जबकि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, केरल, गोआ, सिक्किम, त्रिपुरा एवं मिजोरम में अब तक सबसे अधिक लोगों को कोरोना की दोनों खुराक दी गई हैं, हालांकि वहां भी सिर्फ 15 से 24 फीसदी आबादी का ही टीकाकरण किया गया है।

इसके अलावा पंजाब, मध्य प्रदेश, झारखंड, तमिलनाडु, असम, मेघालय, नागालैंड और मणिपुर में 5 से 8 फीसदी आबादी अब पूर्ण टीकाकृत है। हरियाणा,  दिल्ली, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओडीशा और पश्चिम बंगाल में कम से कम 11 फीसदी आबादी को दोनों टीके दिए जा चुके हैं। वहीं गुजरात, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, कर्नाटक आंध्रा प्रदेश और अरूणाचल प्रदेश में पूर्ण टीकाकृत आबादी का प्रतिशत 11 से 15 के बीच है। 

इस बीच केंद्र सरकार ने आंकड़े जारी कर कहा है कि अगस्त से दिसंबर के बीच उसे अगले चार महीनों में कोविड वैक्सीन की 136 करोड़ खुराक मिलेगी। आंकडों के मुताबिक सरकार को अगस्त से दिसंबर के बीच स्वदेशी वैक्सीन कोविशील्ड की 115 करोड़ जबकि कोवैक्सीन की 21.55  करोड़ मिलेगी।

बहरहाल अगर सरकार के वादों को ज़मीनी हालात के साथ जोड़कर देखें तो ऐसा लगता है जैसे अभी दिल्ली बहुत दूर है।

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