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'किस आधार पर दी गई वैक्सीन को मंज़ूरी', स्वास्थ्य मंत्रालय ने नहीं दी जानकारी

by GoNews Desk 1 month ago Views 1205

'On what basis was the vaccine approved', Health M
कोरोना वायरस के टीके को किस आधार पर आपात्कालीन इस्तेमाल की मंज़ूरी दी गई, स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी देने से इनकार कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्रालय में एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने वैक्सीन के प्रभावी होने के सबूत, अध्ययन की कॉपी, डेटा जिसके आधार पर मंज़ूरी दी गई है, की मांग की थी। इसके जवाब में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने सेक्शन 8(डी) और (ई) का हवाला दिया। 

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन ने अपने जवाब में कहा कि आरटीआई एक्ट का सेक्शन 8 (1) कॉमर्शियल कॉन्फिडेंस, ट्रेड सिक्रेट और इंटेलेक्चुअल प्रोपर्टी यानि किसी प्रोडक्ट को बनाने में इस्तेमाल की जाने वाली विधि जैसी जानकारी की रक्षा करता है। इस तरह की जानकारी देने से तीसरे पक्ष के कॉम्पिटेटिव पॉज़िशन यानि किसी ब्रांड या प्रोडक्ट की मार्केट वैल्यू को नुकसान होगा। ऐसा तभी किया जा सकता है जब संस्था ख़ुद इस बात की सहमति दे। बिना इजाज़त इस तरह की जानकारी सार्वजनिक करना आरटीआई एक्ट के सेक्शन 8(1) का उल्लंघन है। 


सेक्शन 8 (1) (ई) के तहत किसी शख्स या संस्था के विवादास्पद संबंध में मौजूद जानकारी को सार्वजनिक करने से छूट दी गई है। ऐसा तभी मुमकिन है जबतक शख्स या संस्था ख़ुद इस बात की सहमति नहीं देते। बता दें कि एक आरटीआई कार्यकर्ता सौरभ दास ने स्वास्थ्या मंत्रालय में यह आरटीआई दाखिल की थी और वैक्सीन को लेकर जानकारी मांगी थी। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने 3 जनवरी को सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मंज़ूरी दी थी। इसके बाद से ही भारत बायोटेक की वैक्सीन सवालों के घेरे में है।

हालांकि बाद में भारत बायोटेक ने दावा किया कि उनकी वैक्सीन का 25 हज़ार लोगों पर ट्रायल हुआ है। जबकि इस दौरान भी कंपनी ने यह जानकारी नहीं दी की वैक्सीन की प्रभावी क्षमता क्या है। जानकार सवाल उठाते हैं कि वैक्सीन जब अपने ट्रायल फेज़ में ही है तो आख़िर मंज़ूरी कैसे दी गई।

16 जनवरी से देश में टीकाकरण अभियान चल रहा है। हालांकि पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मचारियों को टीका लगाया जा रहा है और अबतक 10 लाख स्वास्थ्य कर्मियों को टीका लगाया जा चुका है। टीके को लेकर लोगों में डर का माहौल है जिसको दूर करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने जागरुकता अभियान की शुरुआत की है। एक सर्वे के मुताबिक़ 41 फीसदी लोग मानते हैं कि वो कुछ महीने इंतज़ार कर टीका लेंगे जबकि 33 फीसदी मानते हैं जब टीका सबके लिए मौजूद होगी तभी लगवाएंगे।

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