आंदोलन के एक साल पूरा होने पर किसानों की योजना, विश्व स्तर पर होंगे समर्थन में कार्यक्रम !

by GoNews Desk 8 months ago Views 1694

एसकेएम ने बताया कि भारतीय प्रवासियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय किसान संगठनों द्वारा दुनिया भर में "एकजुटता कार्यक्रमों" की योजना बनाई जा रही है...

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किसान संगठनों ने एक बार फिर संसद चलो मार्च का ऐलान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 60 ट्रैक्टर से किसान एमएसपी की गारंटी और अन्य मांगों के लिए संसद का घेराव करेंगे।

इससे पहले एसकेएम ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रधानमंत्री को खुली चिट्ठी लिखी थी। पीएम ने क़ानून वापसी के ऐलान के दौरान किसानों की अन्य मांगों का ज़िक्र नहीं किया था। किसान मोर्चे ने बैठक के बाद पीएम को लिखी चिट्ठी में अपनी अन्य छह मांगों की याद दिलाई।

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किसानों की क़ानून वापसी के अलावा अन्य मांगें !

इनमें प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक (2020-2021) को वापस लेना, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग में दंडात्मक प्रावधानों को हटाना और किसानों पर चल रहे मामलों को वापस लेना शामिल है।

चिट्ठी में लखीमपुर खीरी कांड में आरोपी आशीष मिश्र के पिता और केन्द्र में गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी को बर्ख़ास्त करने की मांग भी शामिल है। इनके अलावा आंदोलन के दौरान मारे गए किसानों की याद में एक स्मारक बनाने की योजना है जिसके लिए किसान मोर्चे ने सिंघू बॉर्डर पर ज़मीन की मांग की है। जबकि मारे गए करीब 700 किसानों के परिवार को मुआवज़े की मांग भी की गई है।

राकेश टिकैत ने कहा, "29 नवंबर को 60 ट्रैक्टर मार्च के लिए संसद जाएंगे। ट्रैक्टर सरकार द्वारा खोली गई सड़कों से गुजरेंगे। हम पर सड़कें रोकने के आरोप लगाए गए थे जबकि हमने सड़कें नहीं रोकी। शायद हमारा आंदोलन सरकार से बात करने का है, जिसके लिए हम सीधे संसद जाएंगे।"

राकेश टिकैत का कहना है कि पिछली बार 200 लोगों के मुक़ाबले इस बार एक हज़़ार लोग संसद जाएंगे। इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि आंदोलन को एक साल पूरा होने पर दिल्ली से दूर राज्यों की राजधानी में अन्य विरोध-प्रदर्शनों के अलावा रैलियों का आयोजन किया जाएगा।

प्रदर्शन स्थलों पर बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने की संभावना !

प्रदर्शन स्थलों पर आने वाले समय में बड़ी संख्या में किसानों के आने की संभावना है। ख़बरें हैं कि पंजाब के किसान जत्थेबंदी के लिए तैयारी कर रहे हैं। किसान संगठन स्वराज इंडिया द्वारा साझा की गई एक ख़बर के मुताबिक़ पंजाब में हर परिवार से दो लोगों को सीमा पर चलने के लिए लामबंद किया जा रहा है। 

जत्थेबंदियों के मुताबिक़ सूबे से दो लाख से ज़्यादा किसानों और उनके परिवार के सदस्यों के दिल्ली मार्च में शामिल होने का अनुमान है। यह सभी लोग राज्य के अलग-अलग ज़िलों से 20 हज़ार वाहनों के साथ दिल्ली की सीमा के लिए कूच करेंगे, जिनमें ट्रैक्टर-ट्रालियां, बसें, कारें और अन्य निजी वाहन शामिल होंगे। किसानों के ट्रेनों से भी पहुंचने की उम्मीद है।

दावा है कि पंजाब के मोगा ज़िले से 10 हज़ार वाहन और संगरूर ज़िले से करीब दो हज़ार ट्रैक्टर ट्रॉलियां प्रदर्शन स्थल के लिए रवाना हो सकते हैं। संगरूर से करीब 30 हज़ार की संख्या में किसानों के सीमा पर पहुंचने की संभावना है।

मसलन राज्य के ग्रामीण इलाकों से किसान 25 नवंबर तक सीमा पर पहुंच जाएंगे और उनके 26 नवंबर को संसद चलो मार्च में शामिल होने का भी अनुमान है। संयुक्त किसान मोर्चे के बुलावे के बाद पंजाब राज्य के किसानों ने प्रदर्शन स्थलों पर पहुंचने की यह योजना है।

किसानों के समर्थन में दुनियाभर में कार्यक्रम की योजना !

एसकेएम ने बताया कि भारतीय प्रवासियों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय किसान संगठनों द्वारा दुनिया भर में "एकजुटता कार्यक्रमों" की योजना बनाई जा रही है।

किसान मोर्चा के मुताबिक़, "26 नवंबर को, लंदन में भारतीय उच्चायोग के सामने दोपहर 12 से 2 बजे के बीच विरोध प्रदर्शन होंगे। उसी दिन, कनाडा के सरे (Surrey) में एक स्लीप-आउट के अलावा वैंकूवर में स्लीप-आउट होगा।"

"30 नवंबर को पेरिस, फ्रांस में विरोध प्रदर्शन होंगे। 4 दिसंबर को कैलिफोर्निया में एक कार रैली का आयोजन किया जा रहा है, और न्यूयॉर्क, अमेरिका में एक सिटी मार्च का आयोजन किया जा रहा है। सैन जोस गुरुद्वारा में एक स्मरण उत्सव और कैंडल लाइटिंग में जागरण भी होगा।"

"उसी दिन 5 दिसंबर को नीदरलैंड में एक कार्यक्रम की योजना है, और 8 दिसंबर को ऑस्ट्रिया के विएना में एक कार्यक्रम की योजना बनाई गई है। कार्यक्रम ऑस्ट्रेलिया के साथ-साथ अमेरिका में वाशिंगटन और टेक्सास जैसे अन्य शहरों में होंगे।" एसकेएम ने आने वाले समय में इस मामले में और जानकारी साझा करने की बात कही है।

इनके अलावा आंदोलन के एक साल पूरा होने से पहले 25 नवंबर को हैदराबाद में एक "महा धरने" की योजना बनाई गई है।

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