ads

'झूठे तरीके से फंसाया गया' दिल्ली दंगा मामले में उमर ख़ालिद को ज़मानत

by GoNews Desk 3 weeks ago Views 3093

'वो घटना की तारीख पर अपराध के स्थल पर मौजूद नहीं थे और न ही ताहिर हुसैन और उनके बीच कोई बैठक हुई'

Omar Khalid bailed in 'falsely implicated' Delhi r
नॉर्थ ईस्ट दिल्ली दंगा मामले में गिरफ़्तार जेएनयू छात्र उमर ख़ालिद को दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट से ज़मानत मिल गई है। कोर्ट ने कहा कि उमर को सिर्फ ‘स्केची सामग्री’ के आधार पर सलाखों के पीछे नहीं रखा जा सकता।’ कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ इसलिए जेल में नहीं रखा जा सकता कि ‘अन्य लोग जो दंगाई भीड़ का हिस्सा थे, की पहचान कर मामले में गिरफ्तार कर लिया जाए।’

दिल्ली दंगे को लेकर उमर ख़ालिद पर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के खजूरी खास पुलिस स्टेशन में मामले दर्ज कराए गए थे, इसी मामले में कोर्ट ने उन्हें ज़मानत दी।


कोर्ट ने कहा, ‘मामले में जांच पूरी हो चुकी है और आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। मामले की सुनवाई में लंबा समय लगने की संभावना है। आवेदक इस मामले में 1 अक्टूबर 2020 से ही न्यायिक हिरासत में है। उन्हें सिर्फ इस तथ्य के आधार पर जेल में कैद नहीं किया जा सकता कि अन्य लोग जो दंगाई भीड़ का हिस्सा थे, की पहचान कर मामले में गिरफ़्तार किया जाए।’

एडिश्नल सेशन जज जस्टिस विनोद यादव ने कहा कि, ‘उमर न तो किसी सीसीटीवी फुटेज और न ही किसी वायरल वीडियो में देखा गया, न ही किसी स्वतंत्र गवाह या किसी पुलिस गवाह ने अपराध स्थल पर भीड़ में उसकी पहचान की।’ उन्हें सिर्फ ‘स्केची सामग्री’ के आधार पर सलाखों के पीछे नहीं रखा जा सकता।’

अन्य ज़मानत शर्तों के बीच कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिश्नल सेशन जज जस्टिस विनोद यादव ने उमर ख़ालिद को अपने फोन में आरोग्य सेतु मोबाइल एप रखने के भी निर्देश दिए हैं। उमर ख़ालिद को निर्देश दिया गया है कि वो सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे, किसी गवाह को प्रभावित नहीं करेंगे और इलाक़े में शांति और सद्भाव बनाए रखेंगे।

साथ ही सुनवाई की हर तारीख़ पर उन्हें कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए गए हैं और जेल से रिहाई के बाद खजूरी खास पुलिस स्टेशन के एसएचओ को अपना मोबाइल नंबर भी देने को कहा है। उमर को 20 हज़ार रूपये की बॉन्ड राशी पर ज़मानत दी गई है। ग़ौरतलब है कि उमर ख़ालिद पर 24 फरवरी 2020 को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के मुख्य करावल नगर रोड पर चांद बाग़ इलाक़े में पुलिया के पास हिंसा के संबंध में एफआईआर दर्ज कराए गए थे।

उमर ख़ालिद ने अपनी ज़मानत याचिका में तर्क दिया था कि जांच एजेंसी द्वारा राजनीतिक प्रतिशोध की वजह से उन्हें इस मामले में झूठे तरीके से फंसाया गया है। उन्होंने कहा था कि वो घटना की तारीख पर अपराध के स्थल पर मौजूद नहीं थे और न ही ताहिर हुसैन और उनके बीच कोई बैठक हुई।

ग़ौरतलब है कि उमर ख़ालिद के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कई आरोप लगाए थे। दिल्ली पुलिस का आरोप था कि, ‘जांच के दौरान ये पाया गया कि ताहिर हुसैन, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट ग्रुप के खालिद सैफी के संपर्क में थे। सैफी के ज़रिएत ताहिर हुसैन, उमर खालिद के संपर्क में भी थे।’

‘सैफी ने 8 जनवरी 2020 को शाहीनबाग में हुसैन और उमर की मुलाकात कराई। इस मुलाकात में ये तय किया गया कि केन्द्र सरकार को सीएए/एनआरसी के मुद्दे पर हिलाने और अंतर्राष्ट्रीय जगत में भारत को बदनाम करने के लिए बड़ा धमाका करना होगा।’

हालांकि अब कोर्ट से उन्हें ज़मानत मिल गई है और जल्द ही वो जेल से रिहा किए जाएंगे। 23 फरवरी 2020 को उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कुछ हिस्सों में हुए दंगे में आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ 53 लोग मारे गए थे। दंगे में 400 से ज़्यादा लोग घायल भी हुए थे। पुलिस ने सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित 755 मामले दर्ज कर रखे हैं।

ताज़ा वीडियो