क्या पर्यावरण के लिहाज से ठीक है ओलिपिंक ?

by M. Nuruddin 12 months ago Views 3258

Olympics, An Environmental Disaster?
जापान के टोक्यो में दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे  खर्चीला खेल माना जाने वाला ओलंपिक 23 जुलाई 2021 से शुरु होने वाला है। ये खेल जितना चर्चित है,  पर्यावरण के लिहाज से ये उतना बदनाम भी है। 

ओलंपिक खेलों की सस्टेनेबिलिटी को लेकर किए गए एक रिसर्च से पता चला है कि साल 2012 से इसमें लगातार गिरावट देखी जा रही है।


ओलंपिक को लेकर न्यूयॉर्क, लुसान और बेर्न विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा इस पर किए शोध के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बावजूद 2012 से इन खेलों की सस्टेनेबिलिटी में कमी आ रही है। यह शोध जर्नल नेचर सस्टेनेबिलिटी में प्रकाशित हुआ है। 

ङाउन टू अर्थ मैग्जीन ने बताया है कि इस शोध में अल्बर्टविले 1992 से टोक्यो 2021 के बीच हुए 16 ग्रीष्म और शीतकालीन ओलंपिक खलों का विश्लेषण किया गया है, जिसमें पर्यावरण और समाज पर पड़ने वाल असर को समझने की कोशिश की गई है। इन खलों पर अब तक 5.27 लाख करोड़ रुपए का खर्च आ चुका है।

यह सभी खर्च खेल से जुड़े हैं। इनमें बुनियादी ढांचे पर हुए खर्च की गणना नहीं की गई है, जो कई गुना ज़्यादा है। यदि तीन प्रमुख आयामों सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण के मुताबिक देखें तो 1990 से लेकर 2021 ओलिपिंक खेलों को 100 में से कुल 48 अंक दिए गए हैं।

इस तरह इन्हें मध्यम श्रेणी में रखा गया है। यह अंक उन्हें 44 पर्यावरण सम्बन्धी, 47 आर्थिक कारकों और 51 सामाजिक कारकों के आधार पर दिए गए हैं। 

कोई ओलंपिक कितना सस्टेनबल होगा, यह मेज़बान शहर द्वारा अपनाई नीतियों पर निर्भर करेगा।

उदाहरण के लिए इसके लिए होने वाला ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन कितना होगा, उनका कार्बन फुटप्रिंट कितना होगा। क्या वो आने जाने के लिए सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करते हैं, यह सब उस खेल की सस्टेनेबिलिटी पर असर डालते हैं।

इसे मापने के लिए शोधकर्ताओं न सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स बनाया है जिसके आधार पर अंक दिए गए हैं। इस शोध के मुताबिक साल्ट लेक सिटी, अमेरिका में 2002 में हुआ ओलिपिंक गेम सबसे ज्यादा सस्टेनेबल था, जिसे 71 अंक मिले थे।

वहीं फ्रांस के अल्बर्टविले में 1992 में हुआ ओलिपिंक दूसरे स्थान पर रहा, जिसे कुल 69 अंक मिल थे। यह दोनों ही शीतकालीन ओलिंपिक थे।

वहीं 1992 में बार्सिलोना में हुए ग्रीष्मकालीन ओलिपिंक 56 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर था। वहीं सोची 2014 और रियो डी जेनेरियो 2016 को सबसे कम सस्टेनेबल ओलिपिंक माना गया है।

रियो ओलंपिक को तो ग्लोबल मीडिया में एनवायरनमेंटल ङिजास्टर बताया गया था। क्योंकि इसे कराने के लिए भारी संख्या में पेड़ों की कटाई, लोगों का विस्थापन और जानवरों के लिए भी मुसीबत बन गया था।

इतना ही नहीं खेल की शुरुआत और खत्म होने तक भारी मात्रा में फूड वेस्ट और जल प्रदूषण जैसे मामले सामने आए। एक अनुमान के मुताबिक रियो ओलिंपिक के दौरान 17,000 टन वेस्ट इकट्ठा हुआ था। इसी 6,000 टन फूड वेस्ट का भी अनुमान है।

अनुमान है कि इस दौरान 29,500 गीगावॉट बिजली और 23,500 लीटर फ्यूल का इस्तेमाल हुआ। और इन सबकी वजह हे अनुमानित 3,600,000 टन कार्बन ङाइऑक्साइङ का एमिशन हुआ। हालांकि दावे किए जा रहे हैं कि इस ओलिपिंक में इन नुक़सान को ध्यान में रखते हुए इंतज़ाम किए जा रहे हैं।

23 जुलाई 2021 से शुरु होने वाले टोक्यो ओलंपिक पर करीब 210,897 करोड़ रुपए तक का खर्च आने का अनुमान है। इस इंडेक्स में टोक्यो ओलिपिंक को 40 अंक दिए गए हैं। जिस लिहाज से यह अंक ओलिपिंक खेलों को दिए गए हैं, यह अबतक के औसत से नीचे है। अनुमान है कि इसकी वजह से 500 लोगों को विस्थापित होना पड़ेगा

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