Uttarakhand Hate Speech मामले में पांच नहीं, एक गिरफ़्तार !

by M. Nuruddin 6 days ago Views 1510

Not a single arrest has been made in the Uttarakha
हरिद्वार हेट स्पीच मामले में उत्तराखंड पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट की नोटिस के बाद कथित तौर पर पहली गिरफ्तारी की है। स्थानीय पुलिस ने धर्म परिवर्तन कर हिंदू ब्राम्हण बने वसीम रिज़्वी (अब जितेंद्र त्यागी) को कथित तौर पर गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के वक्त नरसिंहानंद भी त्यागी के साथ गाड़ी में मौजूद थे लेकिन पुलिस ने उनको गिरफ्तार नहीं किया है।

इस मामले में उत्तराखंड पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट भी किया है जिसमें लिखा है, “हरिद्वार Hate Speech मामले की विवेचना SIT द्वारा की जा रही है। SIT द्वारा इसमें 05 अभियुक्तों को चिन्हित किया गया है, जिनके विरूद्ध विधि अनुसार कार्यवाही की जा रही है। कुछ टीवी चैनलों द्वारा इस मामले में 05 लोगों की गिरफ्तारी की खबर दिखायी जा रही है,जो गलत है।”


हालांकि उत्तराखंड पुलिस के ट्विटर हैंडल पर पूर्व वसीम रिज़्वी के बारे में यह भी साफ नहीं किया गया है कि वो गिरफ्तार हुए हैं या नहीं। जबकि समाचार एजेंसी एएनआई यूपी/उत्तराखंड ने उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार के हवाले से ट्वीट कर बताया है कि, “हरिद्वार हेट स्पीच मामले में पांच लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया है। एक एसआईटी गठित की गई है। वसीम रिज़्वी को गिरफ्तार किया गया है।”

जबकि यह एएनआई के उस ट्वीट का करेक्शन है जिसमें डीजीपी के हवाले से ही एजेंसी ने पांच लोगों की गिरफ्तारी की बात बताई थी।

साथ ही आपको यह भी बता दें कि एएनआई ने उन पांच लोगों का नाम भी नहीं बताया है और इस बात को साफ नहीं किया है कि उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज किए गए मामले ताज़ा हैं या दोबारा से मामले दर्ज किए गए हैं।

ग़ौरतलब है कि उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार हेट स्पीच मामले में 23 दिसंबर को एक एफआईआर दर्ज की थी और बाद में 26 दिसंबर को दो अन्य नाम जोड़े गए थे। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़ 23 दिसंबर के एफआईआर में धर्म परिवर्तन कर ब्राम्हण हिंदू बने वसीम रिज़्वी और अन्य का नाम शामिल किया गया था, जहां पुलिस ने एफआइआर में शामिल “अन्य” का नाम सार्वजनिक नहीं किया था।

इनके अलावा 26 दिसंबर को पुलिस द्वारा दो अन्य नामों को एफआइआर में जोड़ा गया जिसमें स्वघोषित स्वामी नरसिंहानंद और अन्नपूर्णा उर्फ पूजा शकुन पांडे शामिल है। 23 दिसंबर को दायर एफआइआर में आईपीसी की धारा 153ए (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास और भाषा के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत मामले दर्ज किए गए थे।

अब यह एक गंभीर सवाल है कि पांच लोगों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज किए गए हैं लेकिन उनका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है। साथ ही एएनआई ने यह भी नहीं बताया है कि उन पांच लोगों के ख़िलाफ़ कौन सी धाराएं लगाई गई है। 

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में स्वघोषित स्वामी के बोल !

स्वामी से जुड़ी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है जिसमें वो पुलिस को यह कहते देखा जा सकता है कि, “त्यागी को क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है।” वीडियो में पुलिस अधिकारी नरसिंहानंद से को-ऑपरेट करने की बात कह रहे हैं।

त्यागी की गिरफ्तारी के वक्त स्वामी ने पुलिस अधिकारियों से यह भी कहा कि, “तीनों मामलों में मैं उनके साथ हूं। क्या उन्होंने अकेली किया है?” इसी वीडियो में स्वामी को पुलिस अधिकारी को कथित धमकी देते भी देखा जा सकता है, जिसमें वो कह रहे हैं, “तुम सब मरोगे, अपने बच्चो को भी…)

एक अन्य वीडियो में पुलिस थाने के बाहर स्वामी के समर्थकों की भीड़ भी देखी जा सकती है। स्वामी इस वीडियो में यह कह रहे हैं कि “जितना भी पैसा लगे लगाओ।”

जितेंद्र त्यागी की गिरफ्तारी के बाद स्वामी का एक अन्य वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसमें वो कह रहे हैं, “सुप्रीम कोर्ट, इस संविधान पर हमें कोई भरोसा नहीं है।”

हरिद्वार हेट स्पीच का मामला सुप्रीम कोर्ट में !

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद से उत्तराखंड पुलिस एक्शन में आई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को गृह मंत्रालय और दिल्ली और उत्तराखंड के पुलिस प्रमुखों से उन याचिकाओं पर जवाब देने को कहा था, जिसमें कहा गया था कि हरिद्वार में आयोजित एक धर्म संसद में अभद्र स्पीच देने के आरोपी लोगों को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया गया है।

हरिद्वार में बीती 17 से 19 दिसंबर के बीच धर्म संसद का आयोजन किया गया था। यह आयोजन जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी की अध्यक्षता में हुआ था। बड़ी संख्या में साधु-संतों ने धर्म संसद में हिस्सा लिया था। इस दरमियान धर्मदास और अन्नपूर्णा भारती समेत कई लोगों ने मुसलमानों के नरसंहार का आह्वान किया। नरसंहार के नारे लगाए।

इसके बाद रायपुर में भी एक धर्म संसद आयोजित की गई थी जिसमें कथित तौर पर कांग्रेस के स्थानीय नेता भी शामिल थे। इस दरमियान भी मुसलमानों को “मारने” और महात्मा गांधी को गाली देने का मामला सामने आया था। इस मामले में एक स्वघोषित साधु कालीचरण उर्फ अभिजीत सारग को गिरफ्तार किया गया था। उनपर आईपीसी की धारा 153 और 505(2) के तहत मामले दर्ज हैं।

कपिल सिबल के मुताबिक़, जो मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिकाकर्ता हैं, 26 जनवरी 2022 को अलीगढ़ में एक धर्म संसद आयोजित करने की बात बताई है और कोर्ट से उसपर पहले ही रोक लगाने की मांग की है।

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