लखीमपुर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश नहीं, अब 20 अक्टूबर को अगली सुनवाई

by M. Nuruddin 7 months ago Views 2193

No order of Supreme Court on Lakhimpur violence, n
लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट की 8 अक्टूबर की सुनवाई ख़त्म हो गई है। कोर्ट ने कोई भी आदेश पारित नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मामले में एक स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा था जिसपर कोर्ट ने नाराज़गी ज़ाहिर की। सीजेआई एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने कहा, ‘हम राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्ट नहीं हैं।”

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायधीश जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए केस जिस तरह से आगे बढ़ना चाहिए था, वो नहीं बढ़ा। सीजेआई ने कहा, ‘ऐसा लगता है एक्शन सिर्फ शब्दों में हो रहा है।” सीजेआई रमन्ना ने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि ज़िम्मेदार सरकार और पुलिस काम करेगी।’


मंत्री के बेटे आशीष मिश्र पर धारा 302 के तहत मर्डर केस दर्ज है लेकिन उनकी अभी तक गिरफ्तारी नहीं हुई है। इसपर कोर्ट ने कहा कि, ‘जब 302 का गंभीर आरोप है तो आरोपी के साथ कैसा व्यवहार होगा? CJI ने कहा, ‘जिस तरह से इसकी कार्यवाही हो रही है, उससे लगता है कि मामले को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।”

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए हरीश साल्वे ने कोर्ट के सामने कहा कि उन्हें पोस्टमोर्टम रिपोर्ट में बंदूक से गोली लगने की बात नहीं बताई गई है। इस पर कोर्ट ने उन्हें फटकारा और कहा, ‘तो यह है आरोपी को हिरासत में नहीं लेने का आधार ?” हरीश साल्वे ने आगे बताया कि पुलिस ने मौके से दो कारतूस बरामद किए हैं।

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच में जस्टिस सूर्य कांत भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि, ‘यह 8 लोगों की नृशंस हत्या है। क़ानून को सभी आरोपियों के ख़िलाफ़ अपना काम करना चाहिए।’ इसपर हरीश साल्वे ने कहा कि आज से कल तक में इसकी कमी पूरी की जाएगी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मामले की पहली सुनवाई से पहले “आनन-फानन” में एक न्यायिक जांच कमिशन का गठन किया था। इसपर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कमिशन का विवरण उन्होंने देखा है, उन्होंने कहा- आपके पास डीआईजी, पुलिस अधीक्षक, सर्कल अधिकारी हैं…ये सभी स्थानीय लोग हैं। सीजेआई रमन्ना ने हरीश साल्वे से मामले को सीबीआई के हाथों में देने की यूपी सरकार की मंशा पर सवाल किया।

हरीश साल्वे ने कोर्ट को बताया कि यूपी सरकार का कहना है कि अगर कुछ नहीं हुआ तो वारंट जारी किया जाएगा। हालांकि सीजेआई का कहना है कि अगर किसी के ख़िलाफ़ 302 का मामला है तो वो तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। सीजेआई रमन्ना ने पुलिसिया जांच और इस मामले की जांच कर रहे अधिकारियों पर सवाल उठाए हैं। सीजेआई ने कहा, ‘जो अधिकारी मामले की जांच के लिए मैदान में हैं, उन्हें जारी रखने का कोई सवाल ही नहीं है। उनके आचरण के कारण, हमें उम्मीद नहीं है कि कोई जांच होगी।”

सीजेआई ने कहा, ‘हम नहीं जानते कि इस मामले में शामिल अधिकारियों की वजह से अच्छी जांच हुई है या नहीं। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जब तक कोई अन्य एजेंसी मामले की जांच को नहीं संभालती है तब तक सभी सुरक्षित हों और नष्ट न कर दिए जाएं।” मामले की गंभीरता को देखते हुए कोई टिप्पणी करने से इनकार किया है और कहा कि सीबीआई भी इस मामले का समाधान नहीं है और ऐसा किन कारणों से है, वो आप जानते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बेंचे ने उम्मीद जताई है कि सुनवाई की अगली तारीख तक कार्रवाई की जाएगी और अन्य एजेंसियों से मामले की जांच कराने पर विचार किया जएगा। अब इस मामले पर अगली सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 20 अक्टूबर तक का समय दे दिया है।

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