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यूपी विधानसभा में बजट सत्र के दौरान मीडिया गैलरी में पत्रकारों को एंट्री नहीं

by M. Nuruddin 2 months ago Views 1380

'ज़ाहिर है, ऐसा लगता है कि प्रेस की व्यवस्थाओं के संबंध में कोई बैठक ही नहीं हुई है...'

No entry of journalists in media gallery during bu
उत्तर प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। सोमवार को योगी सरकार अपना आख़िरी बजट विधानसभा में पेश करेगी। इस बजट सत्र के दौरान विधानसभा की प्रेस गैलरी को कोरोना का हवाला देकर बंद रखा गया है। ऐसे में विधानसभा में क्या कुछ हुआ, इसकी जानकारी बाहर नहीं आ पा रही है। प्रेस गैलरी बंद होने की वजह से कई पत्रकार इसका विरोध कर रहे हैं।

ग़ौरतलब है कि संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही की सच्ची जानकारी लोगों तक पहुंचाने के लिए एक प्रेस गैलरी होती है। पत्रकार यहां बैठकर संसद या विधानसभा की कार्यवाही पर रिपोर्ट करते हैं। पत्रकारों की यह ज़िम्मेदारी है कि वे सदन की सभी जानकारी लोगों तक निष्पक्षता से पहुंचाए। यूपी विधानसभा में प्रेस गैलरी बंद करने को लेकर विपक्ष ने भी सवाल उठाए।


इसके जवाब में यूपी विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित का कहना है कि कोरोनाकाल में पत्रकारों की सहमति से यह निर्णय लिया गया था कि मीडिया के लिए बैठने की अलग व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि इसपर पत्रकारों ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। विधानसभा अध्यक्ष की इस बात पर विपक्ष के नेता राम गोविंद चौधरी ने सवाल उठाया, ‘क्या कोविड सिर्फ पत्रकारों को ही प्रभावित करता है, विधायकों, विधान परिषद सदस्यों, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और विपक्ष को नहीं?’

गोन्यूज़ से बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार अमिता वर्मा ने कहा कि यूपी विधानसभा के मीडिया गैलरी में पत्रकारों को एंट्री नहीं दी जा रही है। मीडिया गैलरी को कोरोना का हवाला देकर बंद कर दिया गया है। अंदर एंट्री के लिए पत्रकारों को पास दिये जाते हैं जो कोरोना की वजह से नहीं दिए जा रहे हैं।' कोरोना काल में हुए विधानसभा सत्र के दौरान पत्रकारों को पास देकर अंदर एंट्री दी जा रही थी लेकिन अब कोरोना के लगभग ख़त्म होने के बाद भी पत्रकारों को पास नहीं दिए जा रहे हैं।

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार रामदत्त त्रिपाठी ने कहा, ‘विधानसभा में परंपरा है कि कोई भी अधिवेशन से पहले संवाददाता समिति के साथ बैठक कर एक व्यवस्था तय होती है। उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति से भी पत्रकार और सरकार के साथ बैठक को लेकर कोई जानकारी नहीं मिली। ज़ाहिर है, ऐसा लगता है कि प्रेस की व्यवस्थाओं के संबंध में कोई बैठक ही नहीं हुई है।’

संविधान में पत्रकारों के अधिकार

संविधान में नागरिकों को अभिव्यक्ति का पूरा अधिकार है और अब इसी अधिकार के तहत मीडिया भी आता है। हालांकि साल 1956 में संसद ने Parliamentary Proceedings ( Protection of Publication ) Act पास किया था। संसद में इस बिल को फिरोज गांधी ने पेश किया था, इसलिए इसे फिरोज़ गांधी एक्ट भी कहा जाता था। इस क़ानून के तहत पत्रकारों को संरक्षण हासिल था। लेकिन इमरजेंसी के दौरान इंदिरा गांधी ने इस क़ानून को रद्द कर दिया।

इसके बाद से मीडिया को संरक्षण देने के लिए कोई भी स्पेशल क़ानून नहीं बना। बाद में मोरार्जी देसाई की जनता पार्टी सरकार ने 1978 में संविधान में संशोधन कर अनुच्छेद 361A जोड़ा। इससे पत्रकारों को संसद और विधानसभाओं की कार्यवाही की सही जानकारी रिपोर्ट करने का पूरा अधिकार है। इसके लिए पत्रकार पर सिविल या आपराधिक कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।

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