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बिहार में बाढ़ से 23 मौतें और 74 लाख प्रभावित, नेपाल पर मदद नहीं करने का आरोप

by Shahnawaz Malik 9 months ago Views 1132

Nitish flags non-cooperation from Nepal in flood m
बिहार के तमाम उत्तरी ज़िले बाढ़ की मार झेल रहे हैं लेकिन पड़ोसी देश नेपाल इससे निबटने में मदद नहीं कर रहा है. यह आरोप राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  ने लगाया है और उन्होंने इस मुद्दे को पीएम मोदी के साथ हुई मीटिंग में भी उठाया। उन्होंने कहा कि बीते कुछ सालों से बिहार सरकार के साथ नेपाल सहयोग नहीं कर रहा है. नीतीश कुमार ने इस मामले में केंद्र सरकार से दखल देने की मांग की है.

राज्‍य में बाढ़ के चलते अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 16 जिलों की तकरीबन 74 लाख की आबादी इससे प्रभावित है. बिहार के सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, किशनगंज, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, गोपालगंज, पूर्वी चम्पारण, पश्चिम चंपारण, खगड़िया , सारण, समस्तीपुर, सिवान, मधुबनी, मधेपुरा और  सहरसा जिले बाढ़ से सबसे ज्‍यादा प्रभावित हैं. हज़ारों लोगों को सरकार की ओर से बनाये गए राहत शिविरों में पनाह लेनी पड़ी है. आम लोग और उनके जानवर दाना पानी के लिए तरस रहे हैं.


बिहार के बाढ़ प्रभावित इन जिलों में बचाव और राहत कार्य चलाए जाने के लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की कुल 33 टीमों की तैनाती की गयी है. राज्य में बागमती, अधवारा समूह, कमला बलान, गंडक, बूढ़ी गंडक जैसी नदियों में जल स्तर बढ़ने के कारण ये क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. कई इलाक़ों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. सर्वाधिक प्रभावित दरभंगा जिले में सबसे अधिक नौ लोग, मुजफ्फरपुर में छह, पश्चिम चंपारण में चार, सारण  और सिवान में दो-दो लोगों की मौत हो चुकी है.

इस साल मॉनसून के दस्तक देने से पहले बिहार सरकार नेपाल से लगने वाले सीमाई ज़िलों में बांधों और  तटबंधों को दुरुस्त करवा रही थी, तब भी नेपाल ने इसपर आपत्ति जताई थी और निर्माण का काम रुकवा दिया था. कहा जा रहा है कि अगर नेपाल के साथ राज्य सरकार का तालमेल बेहतर रहा होता और बिहार सरकार के इंतेज़ाम पूरे होते तो जानमाल के नुकसान को कम किया जा सकता था.

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