कोवैक्सीन को लेकर नया विवाद, वैक्सीन की प्रमाणिकता पर उठे सवाल

by GoNews Desk 11 months ago Views 2582

covaxin

देश में पहले से ही भारत बायोटेक की बनाई कोविड वैक्सीन कोवैक्सीन की प्रमाणिकता को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे. अब इससे एक और विवाद जुड़ गया है. 

क्या है विवाद
दरअसल पिछले दिनों कांग्रेस नेता गौरव पंधी ने अपने ट्विटर पर एक RTI दस्तावेज साझा किया था. ये दस्तावेज़ कोवैक्सीन में नवजात गाय के बछड़े का सीरम या फिर काल्फ सीरम का इस्तेमाल होने से जुड़ा था जिसके बाद से ही सोशल मीडिया पर भारत बायोटेक की वैक्सीन को लेकर विवाद शुरू हो गया. यहां तक कि एनिमल राइट संस्था पेटा ने भी भारतीय ड्रग कंट्रोलर को पत्र लिख कर अपील की कि उसे वैक्सीन बनाने का तरीका बदलना चाहिए और टीके के उत्पादन में किसी जानवर का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए. 

कोवैक्सीन को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि खुद स्वास्थ्य मंत्रालय और वैक्सीन निर्माता कंपनी को इस पर सफाई पेश करनी पड़ी. केंद्रीय मंत्रालय के जारी बयान में ये दावा किया गया कि कोवैक्सीन की निर्माण प्रक्रिया में गाय के नवजात बछड़े के सीरम का इस्तेमाल नहीं होता है. मंत्रालय ने कहा कि इन सीरम का इस्तेमाल वैक्सीन बनाने के दौरान संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया या दूसरे रोगजनकों को बढ़ाने या विकसित करने के लिए किया जाता है हालांकि काल्फ सीरम खुद वैक्सीन निर्माण का इंग्रिडिएंट या घटक नहीं होता.

कोवैक्सीन का निर्माण करने वाली हैदराबाद की भारत बायोटेक ने भी एक बयान जारी कर टीका बनाने में प्रयोग होने वाले अलग अलग कैमिकल की जानकारी देते हुए दावा किया कि वैक्सीन में गाय के बछड़े के सीरम का इस्तेमाल नहीं होता है. 

कंपनी की ओर से बुधवार को जारी बयान में कहा गया कि कोरोना वैक्सीन के निर्माण की अंतिम प्रक्रिया में किसी तरह की कोई विशुद्धि नहीं होती है. बयान में कहा गया, "वायरल टीकों के निर्माण में नवजात बछड़े के सीरम का उपयोग किया जाता है. इसका उपयोग कोशिकाओं के विकास के लिए किया जाता है, लेकिन इसका उपयोग न तो SARS CoV2 वायरस के विकास में और न ही अंतिम निर्माण में किया जाता है." कंपनी ने ये भी कहा कि वैक्सीन निर्माण प्रक्रिया में बोवीन सीरम का इस्तेमाल दशकों से होता चला आ रहा है. 

किस तरह सीरम का होता है प्रयोग
ऐतिहासिक तौर पर घोड़े के सीरम का इस्तेमाल पिछले शतक से डिप्थीरिया की वैक्सीन बनाने में हो रहा है. भारत बायोटेक की बनाई वैक्सीन की तरह कई वैक्सीन में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए उसी संक्रमण का प्रयोग होता है जिससे बचाने के लिए इसे बनाया जा रहा है. निर्माण प्रक्रिया में संक्रमण मर जाता है लेकिन जिसे भी इससे टीकाकृत किया जाएगा उसे बिमारी से सुरक्षा मिलेगी. 

वैक्सीन में प्रयोग होने के लिए संक्रमण को विकसित करने की ज़रूरत होती है. इन्हें विकसित होने के लिए वैज्ञानिकों को अनुकूल वातावरण पैदा करना होता है और इसके लिए तरह तरह के न्यूट्रिएंट्स का ग्रोथ मीडियम के रूप में प्रयोग होता है. ये न्यूट्रिएंट्स शुगर या सॉल्ट मॉलिक्यूल्स होते हैं जिन्हे गाय, घोड़े या फिर भेड़ के टिशूज से लिया जाता है.

इसके बाद संक्रमण को कई तरह की शुद्धियों से गुज़ारा जाता है ताकि इन्हें वैक्सीन में प्रयोग किया जा सके और वैक्सीन के निर्माण की अंतिम प्रक्रिया आने तक संक्रमण में ग्रोथ मीडियम का कोई निशान नहीं बचता है.

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