नए कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ किसानों का 3 नवंबर को देशव्यापी 'चक्का जाम' का ऐलान

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2546

Nationwide 'Chakka Jam' declaration of farmers aga
विवादित कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ किसानों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है। अब अलग-अलग राज्यों के किसानों ने क़ानून के ख़िलाफ अगले महीने 3 नवंबर को देशव्यापी ‘चक्का जाम’ का ऐलान कर दिया है। गुरुवार को हरियाणा भारतीय किसान यूनियन की तरफ से बुलाई गई बैठक में यह फैसला लिया गया।

इस बैठक में पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और खुद हरियाणा के किसानों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया। हरियाणा बीकेयू के प्रमुख गुरनाम सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर क़ानून के विरोध के लिए भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाई गई थी। उन्होंने कहा कि पंजाब और हरियाणा में किसान आंदोलन चल रहा है। इसे अन्य राज्यों में भी शुरु करने की ज़रूरत है और केन्द्र को ‘काले क़ानून’ वापिस लेने पर मज़बूर करने की ज़रूरत है। उन्होंने बताया कि 30 किसान संगठनों ने इस बैठक में हिस्सा लिया था।


गुरनाम सिंह ने बताया, ‘हमने 3 नवंबर को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक देशव्यापी 'चक्का जाम' का ऐलान किया है। इस दौरान क़ानून के विरोध में अलग-अलग हाइवे और अन्य सड़कों को ब्लॉक किया जाएगा।’ उन्होंने केन्द्र पर यह आरोप लगाया है कि ‘काले क़ानूनों’ को जल्दबाज़ी में पारित करने के चक्कर में लोकतांत्रिक नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। उन्होंने आगे कहा कि वक्त आ गया है कि किसान और उनके साथ क़ानून का विरोध कर रहे अन्य लोग ‘सत्ता के नशे में अंधी हो चुकी भाजपा सरकार’ को अब अपनी ताकत दिखाएं।

वहीं चर्चा में हिस्सा लेने पहुंचे किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल यादव ने कहा, ‘हमने इस बात पर भी चर्चा की है कि विवादित क़ानून के ख़िलाफ प्रभावी तरीके से विरोध जारी रखी जाए जिसके लिए एक कॉमन मिनिमम प्रोग्राम की ज़रूरत होगी। हम क़ानून का विरोध कर रहे विधायकों और सांसदों से बात करेंगे। हम उनसे पूछेंगे कि वे इन किसान विरोधी कानूनों के साथ हैं या किसानों के साथ।’

इस बैठक में शिरोमणि अकाली दल को भी बुलाया गया था। अकाली दल की हरियाणा यूनिट ने इस चर्चा में हिस्सा लिया और कहा कि 100 साल पहले अस्तित्व में आए शिरोमणि अकाली दल ने हमेशा किसानों के पक्ष में कदम उठाए हैं। बता दें कि इससे पहले पंजाब के किसानों ने अकाली दल का विरोध किया है और उनपर राजनीति करने का भी आरोप लगाया है।

उधर पंजाब में किसान संघर्ष कमिटी का आंदोलन 16वें दिन भी जारी है और किसान रेलवे ट्रैक पर जमे हुए हैं। किसानों का कहना है कि केन्द्र सरकार इस क़ानून के ज़रिए एमएसपी, एपीएमसी यानि मंडी सिस्टम को ख़त्म करने की साज़िश रच रही है। विरोध कर रहे किसानों ने यह भी आरोप लगाए हैं कि सरकार अपने ‘उद्योगपति मित्रों’ को मुनाफा पहुंचाने के लिए यह क़ानून बना रही है।

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