दिल्ली दंगे में गिरफ्तार नताशा, दिवांगना और आसिफ को हाई कोर्ट से ज़मानत

by GoNews Desk 1 month ago Views 2282

Natasha Narwal

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में पिछले साल भड़के दंगों में कथित भूमिका के लिए गिरफ्तार किए गए पिंजरा तोड़ संस्था के सदस्य नताशा नरवाल और दिवांगाना कलिता समेत जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को ज़ामनत दे दी है. सभी को फरवरी 2020 में दिल्ली में विवादित नागरिकता कानून से जुड़े प्रदर्शन के बाद भड़की हिंसा में भूमिका के लिए आंतक-रोधी कानून UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया था. आज न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति अनूप जे. भंभानी की बेंच ने तीनों की ज़ामनत मंजूर कर ली.

अदालत के इस आदेश के बाद तीनों युवाओं को गिरफ्तारी के लगभग एक साल बाद जेल से रिहाई मिलेगी.   बता दें कि दिवांगना पर चार जबकि नताशा नरवाल पर तीन एफआईआर दर्ज  की गई थी. दोनों को बाकी सभी मामलों में पहले ही ज़मानत मिल चुकी है. तीनों के खिलाफ यूएपीए का मामला दिल्ली पुलिस के विशेष सेल द्वारा जांच की जा रही दंगों के पीछे एक "बड़ी साजिश" से संबंधित है. पुलिस का दावा है कि दिल्ली दंगों जिसमें 53 लोग की मौत और 500 लोग ज़ख्मी हुए वह स्वाभाविक न हो कर सुनियोजित थे. 

पिजंरा तोड़ की दोनों सदस्यों और जामिया के छात्र ने इस साल की शुरूआत में हाईकोर्ट में अर्ज़ी दाखिल थी. इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने सभी की ज़मानत याचिका को खारिज करते हुए उन पर लगे आरोपों को शुरूआती जांच में सही बताया था. दिल्ली की उच्च अदालत ने नताशा और दिंवागना की ज़मानत याचिका पर फैसला 28 अप्रैल और आसिफ की अपील पर 19 मार्च को सुरक्षित रख लिया था.

आसिफ तन्हा को पिछले साल मई में गिरफ्तार किया गया था तब वह जामिया का फाइनल इयर का छात्र था जबकि नताशा और दिवांगना को 23 मई को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के पास सीएए के विरोध में प्रदर्शन करने के लिए गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद उन पर राजद्रोह का मामला भी लगा दिया गया. दिल्ली स्थित महिला आधार ग्रुप की सदस्य और जेएनयू की PHD स्कॉलर नताशा नरवाल और दिवांगना पर दिल्ली  पुलिस ने एक व्हाट्सएप ग्रुप का हिस्सा होंने का आरोप लगाया था.

पुलिस का कहना था कि उन्हें 'साज़िश' के बारे में पहले से पता था इसलिए दंगों में उनकी बराबर की भागीदारी है. तन्हा की भूमिका पर, पुलिस ने कहा कि गवाहों के बयानों ने आसिफ को दंगों के साथ जोड़ा और वह घटनाओं के पीछे पूर्व नियोजित साजिश का हिस्सा था. 

राजधानी दिल्ली में पिछले साल 23 फरवरी से 27 फरवरी के बीच मुख्यतः ऊत्तरी-पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए थे. ये दंगे कथित तौर पर नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच टकराव के हिंसा में बदलने का परिणाम थे. पुलिस ने इन दंगों के संबंध में 744 मामले दर्ज किए हैं. इनमें से 697 स्थानीय पुलिस, 57 क्राइम ब्रांच और दंगों के पीछे एक "बड़ी साजिश" से संबंधित मामले की जांच स्पेशल सेल के हाथों में दी गई थी.

दंगों के लगभग एक साल बाद स्पेशल सेल ने इस साल फरवरी में 17 लोगों को आरोपी पेश करते हुए मामले में तीसरी चार्ज शीट दायर की थी. इनमें नरवाल, कलिता, स्थानीय राजनेता ताहिर हुसैन और इशरत जहां, जेएनयू के छात्र शरजील इमाम और कार्यकर्ता उमर खालिद और खालिद सैफी के अलावा अन्य शामिल थे. जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को इसी साल अप्रैल में दिल्ली दंगों में कथित भूमिका के मामले में  ज़मानत दी जा चुकी है.

अदालत ने उन्हें ज़मानत देते हुए कहा था कि उमर खालिद को सिर्फ इसलिए कैद में नहीं रखा जा सकता है कि कोई भीड़ में देखा गया था. उसे सिर्फ इस आधार पर अरेस्ट भी नहीं किया जा सकता है.

 पुलिस ने इसके अलावा जेएनयू छात्र शरजिल इमाम पर भी भड़काऊ भाषण देने के लिए राजद्रोह का ममला लगाया था. शरजिल पर आरोप था कि उसने 16 जनवरी 2020 को अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में  सीएए के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण दिया था. उसे 28 जनवरी को बिहार के जाशनाबाद के काको जिले से गिरफ्तार किया गया था और वह तबसे हिरासत में है.  
 

ताज़ा वीडियो

ताज़ा वीडियो

Facebook Feed