अधीर रंजन चौधरी: बंगाल में कांग्रेस के ‘वन मैन आर्मी’

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2335

'My name is leader' - Adhir Ranjan Chowdhury: Cong
मनमौजी, अक्रामक और विवादास्पद, पांच बार के सांसद अधीर रंजन चौधरी कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेताओं में एक हैं। वो लंबे समय से पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद ज़िले के एक मज़बूत खिलाड़ी माने जाते हैं, जहां उन्होंने दशकों तक कांग्रेस का झंडा बुलंद रखा। अधीर रंजन चौधरी अभी लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में पार्टी की अगुवाई कर रहे हैं। उन्होंने राज्य में लेफ्ट और आइएसएफ के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने का फैसला किया जिसको लेकर पार्टी के भीतर ही विवाद देखने को मिला। गोन्यूज़ की स्पेशल सीरीज़ ‘मेरा नाम नेता’ में  अधीर रंजन चौधरी पर ही बात।

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस पार्टी के कुछ चुनिंदा नेताओं में एक अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर से सांसद हैं। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में तृणमुल के उम्मीदवार के ख़िलाफ़ 80 हज़ार से ज़्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की। सड़क सेनानी, 63 साल के अधीर रंजन चौधरी मुर्शिदाबाद में 'रॉबिन हुड' के नाम से मशहूर हैं।


अधीर रंजन चौधरी विवादों में घिरे रहने वाले नेताओं में भी एक हैं। चौधरी कई विवादों में घिरे रहे हैं लेकिन साथ ही अपने क्षेत्र में विकास और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनकी प्रशंसा भी खूब होती है। 1990 के दशक में उन्होंने बहरामपुर नगरपालिका के अध्यक्ष के रूप में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई काम किए।

2 अप्रैल 1956 को बहरामपुर में जन्मे अधीर रंजन चौधरी की एक शानदार राजनीतिक यात्रा है जिसकी शुरुआत 1970 के दशक के मध्य में माओवादी आंदोलन से हुई। इस दौरान वो पहली बार जेल में डाले गए। 1980 के दशक में राज्य में पार्टी के बड़े नेता रहे स्वप्न चटर्जी के साथ उन्होंने काम किया और पार्टी में अपनी एक अलग पहचान बनाई। हालांकि उनकी पार्टी में कई नेताओं के साथ मतभेद भी रहे लेकिन उनकी छवि ही थी कि पार्टी ने सभी को नज़रअंदाज़ किया।

अधीर रंजन चौधरी थोड़े समय के लिए सीपीआई-एम की लेबर विंग सीटू की सेना में भी शामिल हुए लेकिन जानकार मानते हैं कि वहां उन्हें उनके मनमुताबिक़ कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिला। इसके बाद वो फिर पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा बदली और कांग्रेस पार्टी ने 1991 के विधानसभा चुनाव में उन्हें नाबाग्राम सीट से मैदान में उतारा जहां उन्हें बहुत कम अंतर के साथ हार का सामना करना पड़ा। हालांकि इस दौरान मुर्शिदाबाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच उनकी छवि और मज़बूत हो गई।

अधीर रंजन चौधरी एक सीपीआई-एम नेता के रिश्तेदार की हत्या करने का मामले में जेल भी गए। इस दौरान 1996 का विघानसभा चुनाव भी होना था और पार्टी ने उन्हें फिर नाबाग्राम से ही मैदान में उतारा। इस बार उन्होंने 20 हज़ार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। चुनाव में उनके भाषण जेल से ही रिकॉर्ड किए जाते थे और जेल से ही उन्होंने अपने कैंपेन की रणनीति तैयार की। दिलचस्प यह है कि तब कांग्रेस पार्टी में रहीं ममता बनर्जी ने अधीर रंजन चौधरी के उम्मीदवारी का विरोध किया था।

1999 में अधीर रंजन चौधरी को कांग्रेस पार्टी ने बहरामपुर से लोकसभा का टिकट दिया। इस चुनाव में उन्होंने पार्टी को जीत दिलाई। ख़ास बात यह है कि तब तक बहरामपुर सीट पर 1951 से कांग्रेस के किसी भी उम्मीदवार को जीत नहीं मिली थी। वो अधीर रंजन चौधरी ही थी जिन्होंने नाबाग्राम में दशकों से लहरा रहे लेफ्ट के झंडे को उखाड़ फेंका।

साल 2005 में अधीर रंजन चौधरी को फिर से जेल जाना पड़ा। इसबार उनपर दोहरी हत्याकांड के आरोप थे और उन्हें एक महीने से ज़्यादा जेल में रहना पड़ा था। लेकिन इस दौरान उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई बल्कि जब वो जेल से बाहर आए तब हज़ारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जेल के बाहर उनका एक ‘नायक’ के तौर स्वागत किया। 

12वीं तक पढ़े अधीर रंजन चौधरी साल 2012 में मनमोहन सरकार में रेल राज्य मंत्री बनाए गए। 10 फरवरी 2014 को, उन्हें पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। उनकी अगुवाई में साल 2016 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने लेफ्ट के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ना ही बेहतर समझा।

जानकार मानते हैं कि इस गठबंधन से पार्टी को कुछ फायदा नहीं हुआ और पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। जबकि एक बार फिर कांग्रेस पार्टी लेफ्ट के साथ ही गठबंधन में चुनाव लड़ रही है और इसकी अगुवाई भी अधीर रंजन चौधरी ही कर रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी की इसबार उनके फैसले से पार्टी को कितनी कामयाबी मिलेगी। 

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