Mutual Funds: सिर्फ़ 3 फ़ीसदी निवेशकों के पास 41% हिस्सा !

by Sarfaroshi 7 months ago Views 2875

Mutual Fund

भारत में सिर्फ़ 3 फीसदी निवेशक ही म्यूचुअल फंड में 41 फ़ीसदी की हिस्सेदारी रखते हैं। सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड, सेबी द्वारा जारी हालिया आंकड़े बताते हैं 25 लाख से लेकर 5 करोड़ रूपये और इससे ज़्यादा कमाने वाले सिर्फ़ 3 फीसदी निवेशकों के पास म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के AUM का 41.54 फ़ीसदी हिस्सा है। ऐसे निवेशकों की संख्या 5,57,822 है और इनका एयूएम में 13,34,170 का योगदान है। 

किसी म्यूचुअल फंड कंपनी द्वारा मौजूदा समय में फंड प्रबंधन के लिए जो धनराशि उपलब्ध है उसे एयूएम या फिर प्रबंधन के तहत संपत्ति कहा जाता है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि अगर किसी ने एक साल पहले एक करोड़ रूपये की राशि निवेश किया लेकिन अब फंड की राशि बढ़कर 1.5 करोड़ हो गई है तो फंड का AUM भी 1.5 करोड़ होगा।

आंकड़ों से साफ़ है कि देश में उच्च आय वर्ग का म्यूचुअल फंड पर दबदबा है। उदाहरण के लिए 25 लाख से एक करोड़ तक कमाने वाले 4,22,131 निवेशक जोकि कुल निवेशकों का 2.27 फ़ीसदी हैं इनके पास 3,40,640 एयूएम है और एसेट्स अंडर मेनेडमेंट का 10.60 फीसदी हिस्सा है। 

इस तरह 1-5 करोड़ कमाने वाले 1,35,446 निवेशकों की एयूएम में 30.93 फीसदी की हिस्सेदारी है। यह निवेशक कुल इंवेस्टर्स का 0.73 फीसदी हिस्सा है लेकिन इनके पास 993,121.7 AUM है जोकि सभी आय वर्गों में सबसे ज़्यादा है।

जबकि 1-5 लाख रूपये कमाने वाले 1.3 करोड़ निवेशक जिनकी कुल इंवेस्टर अकाउंट्स में सबसे ज़्यादा 61 फीसदी की हिस्सेदारी है, इनके पास एयूएम का 24.04 फीसदी है जो 3 फीसदी के ग्रुप वाले लोगों के मुक़ाबले बेहद कम है।

कई मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि निवेशकों की संख्या शेयरमार्केट में बढ़ोतरी के साथ बढ़ रही है। सेंसेक्स में अक्टूबर के महीने में 62,000 का रिकॉर्ड उछाल आया था। आंकड़े बताते हैं कि देश में म्यूचुअल फंड्स की संख्या मार्च 2020 से 3.12 करोड़ से बढ़कर नवंबर 2021 में 4.78 करोड़ हो गई है।

हालांकि इस बढ़ोतरी के बावजूद भारत के वयस्कों का म्यूचुअल फंड में बहुत ज़्यादा विश्वास नहीं है। एक रफ आंकड़े के मुताबिक़ भारत में 1.4 अरब लोग हैं, इनमें से 50 फीसदी की उम्र 25 साल से ज़्यादा है लेकिन सिर्फ़ 1,85,71372 वयस्कों ही म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं।

मोदी सरकार की म्यूचुअल फंड्स के मोर्चे पर आलोचना की जाती रही है। भाजपा सरकार के दूसरे शासनकाल के शुरू होने से पहले म्यूचुअल फंड्स इंडस्ट्री ने साफ़ किया था कि उन्हें ऐसी सरकार चाहिए जोकि निवेश पर ध्यान दे। इकोनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक़ एसेट मेनेजर्स ने प्रधानमंत्री मोदी से निवेश को बढ़ावा देने और 'सॉफ्ट प्राइवेट कंजप्शन' पर ध्यान देने की मांग की थी।

ताज़ा वीडियो