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‘एमएसपी लूट कैलकुलेटर’: 'एमएसपी नहीं मिलने से किसानों को सैकड़ों करोड़ का नुक़सान'

by GoNews Desk 3 weeks ago Views 2419

'किसानों को एमएसपी पर क़ानूनी सुरक्षा चाहिए जिससे किसानों को न्यूनतम मूल्य पाने की गारंटी मिल सके'

'MSP loot calculator': 'farmers lose hundreds of c
एमएसपी पर क़ानून और कृषि से जुड़े तीनों ‘विवादित क़ानूनों’ की वापसी की मांग को लेकर किसान चार महीने से भी ज़्यादा वक्त से आंदोलन पर हैं। इस बीच केन्द्र की मोदी सरकार लगातार यह दावे करती रही है कि किसानों को उनके पैदावार का पूरा दाम दिया जा रहा है। सरकार के इन्हीं दावों के फैक्ट चेक के लिए किसान संगठनों ने एक ‘एमएसपी लूट कैलकुलेटर’ लॉन्च किया था। इसके माध्यम से किसानों का दावा है कि मार्च महीने में एमएसपी से कम दाम पर खरीद की वजह से किसानों को भारी नुक़सान हुआ है।

जय किसान आंदोलन की इस नई पहल के मुताबिक़ पिछले महीने सबसे ज़्यादा नुक़सान मध्य प्रदेश के किसानों को झेलनी पड़ी। अलग-अलग फसलों के एमएसपी से कम दाम पर बिक्री की वजह से राज्य के किसानों को 226 करोड़ रूपये से ज़्यादा का नुक़सान हुआ। मार्च महीने में राज्य के ज्वार किसान अपनी फसल 1,292 रूपये प्रति क्विंटल की दर से बेचने को मज़बूर हुए। जबकि केन्द्र की तरफ से तय एमएसपी के तहत किसानों को प्रति क्विंटल 2,520 रूपये मिलनी चाहिए। यानि ज्वार की फसल पर किसानों को प्रति क्विंटल 1,328 रूपये का नुक़सान उठाना पड़ा।


इसी तरह चने की फसल पर केन्द्र द्वारा तय एमएसपी है 5,100 रूपये प्रति क्विंटल लेकिन किसानों को प्रति क्विंटल मिले 4,702 रूपये। यानि प्रति क्विंटल करीब 400 रूपये का नुक़सान। अगर देखा जाए तो चना किसानों को मार्च महीने के दौरान 77 करोड़ रूपये से ज़्यादा का नुक़सान हो गया। वहीं तय एमएसपी का पूरा दाम नहीं मिलने की वजह से गेहूं किसानों को 79 करोड़ रूपये का घाटा हुआ।

जबकि मक्का की फसल पर तय एमएसपी के मुताबिक़ किसानों को प्रति क्विंटल 1,850 रूपये मिलनी चाहिए लेकिन लगभग सभी राज्यों की मंडियों में किसानों को मक्का की फसल पर प्रति क्विंटल औसतन 1,500 रूपये ही मिले। इनमें भी मध्य प्रदेश के किसानों को सबसे कम प्रति क्विंटल 1,283 रूपये ही मिल सके। यानि जय किसान आंदोलन का दावा है कि इससे मक्का के किसानों का 105 करोड़ रूपये से ज़्यादा का नुक़सान हो गया।

किसानों के पहल ‘एमएसपी लूट कैलकुलेटर’ के मुताबिक़ चने की फसल पर राज्यवार ‘लूट’ की बात करें तो सबसे आगे ‘किसान पुत्र’ शिवराज का मध्यप्रदेश ही है जहां मार्च महीने में किसानों को अपनी फसल पर 76.52 करोड़ रूपये का घाटा हुआ। इसके बाद नरेंद्र मोदी का ‘मॉडल राज्य’ गुजरात है जहां एमएसपी को ‘नज़रअंदाज़’ किए जाने पर किसानों का 72.58 करोड़ रूपये का नुक़सान हुआ।

इनके अलावा महाराष्ट्र, राजस्थान और कर्नाटक भी पीछे नहीं हैं। इन राज्यों में एमएसपी न मिलने की वजह से किसानों को 116.05 करोड़ रूपये का नुक़सान उठाना पड़ा। जबकि जय किसान आंदोलन का दावा है कि पूरा एमएसपी न मिलने से सभी राज्यों में किसानों का कुल 273.49 करोड़ रूपये का नुक़सान हुआ है।

किसानों के पहल से पता चलता है कि महाराष्ट्र में किसानों को अलग-अलग फसलों की बिक्री पर एमएसपी नहीं मिलने से 110.9 करोड़ रूपये का नुक़सान हुआ। इनमें सबसे ज़्यादा चने की फसल बिक्री से हुई। मक्का किसानों को एमएसपी नहीं मिलने से 10.55 करोड़ रूपये का नुक़सान हुआ।

इसी तरह बाजरा किसान भी नुक़सान में ही रहे। बाजरा पर केन्द्र द्वारा तय एमएसपी है 2,150 रूपये लेकिन किसानों को मिले महज़ 1513 रूपये। इससे राज्य के किसानों को कुल 41.16 करोड़ रूपये का घाटा हुआ।

जबकि उरद की फसल पर किसानों को 2.87 करोड़ रूपये का नुक़सान उठाना पड़ा। जय किसान आंदोलन ने अपने 1 अप्रैल के ट्वीट में दावा किया कि, ‘धान की सरकारी खरीद पर सरकार अर्ध सत्य बोल रही है। हमारे एमएसपी लूट कैलकुलेटर से घबराकर सरकार ने धान की सरकारी खरीद पर आंकड़े जारी किए हैं, जिसका भंडा एमएसपी लूट कैलकुलेटर ने फोड़ दिया है।’
संगठन का दावा है कि देश के 62 फीसदी किसानों को धान की खरीद पर एमएसपी नहीं मिली। संगठन के मुताबिक़ देशभर में 1,796 करोड़ क्विंटल धान की उपज हुई और इनमें अक्टूबर से मार्च महीने के दौरान 688.74 करोड़ क्विंटल धान ही सरकार ने खरीदे और 38 फीसदी ही एमएसपी मिल सका।

किसान आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार एमएसपी पर ख़रीद नहीं करती जिससे किसानों को भारी नुक़सान उठाना पड़ता है। देखिए बता रही हैं गोन्यूज़ संवाददाता अंजलि ओझा।) किसान यह भी आरोप लगाते रहे हैं कि सरकार एफसीआई को ख़त्म कर रही है। पिछले दिनों इसी के विरोध में बिहार के कुछ ज़िलों में किसानों ने एफसीआई बचाओ दिवस मनाया। इस दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि क्रय केन्द्रों की संख्या घटाई जा रही है और बजट में बढ़ोत्तरी नहीं की जा रही है जिससे सिर्फ 6 फीसदी किसानों के फसल की ही खरीद एमएसपी पर हो पाती है।’

‘बाकि किसानों को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। किसानों का आरोप था कि आंदोलन के दबाव में खरीद तो बढ़ी है लेकिन किसानों को एमएसपी पर क़ानूनी सुरक्षा चाहिए जिससे किसानों को न्यूनतम मूल्य पाने की गारंटी मिल सके।’

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