बाक़ी देश में आंदोलन लेकिन गोवा में बीफ़ की कमी नहीं होने देगी बीजेपी सरकार

by M. Nuruddin 1 year ago Views 1485

देश की करीब 70 फीसदी आबादी किसी न किसी मौके पर मांस खाना पसंद करती है।

Movement in the rest of the country, but there wil
भाजपा शासित तमाम राज्य सरकारें गोवंंश की  हत्या पर पाबंदी लगा रही है पर गोवा मेंं उसकी सरकार के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता प्रमोद सावंत बीफ के इंतज़ाम में लगे हैं। त्योहार और नए साल के मौके पर राज्य में बीफ की कमी होने लगी है। इसके लिए राज्य के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का कहना है कि उनकी सरकार जानती है कि राज्य में बीफ की कमी हो रही है। सरकार इसका इंतज़ाम कर रही है। बीफ़ में भैंस के अलावा बैल भी शामिल है जिसे गोवंश कहा जाता है।

मांस कारोबारियों का कहना है कि क्रिसमस और नए साल को लेकर कर्नाटक में आपूर्ती में गिरावट आई है। ऐसे में गोवा को बीफ की कमी होना स्वभाविक है। राज्य में पांच साल पहले बूचड़खाने बंद होने के बाद कर्नाटक ही ऐसा राज्य है जहां से बीफ की आपूर्ती हो पाती है। 


सावंत ने संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार त्योहारी सीजन से पहले बीफ की कमी के बारे में जागरूक है और इस मसले को हल करने के लिए कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बीफ उपलब्ध कराने के लिए सभी इंतजाम किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संकट से निपटने के तरीकों पर चर्चा करने के लिए पशुपालन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक हो चुकी है।

इस बीच एनसीपी नेता और विधायक चर्चिल अलेमाओ ने गोवा सरकार से गोमांस की कमी से बचने के लिए राज्य संचालित गोवा मीट कॉम्प्लेक्स लिमिटेड (GMCL) 'बूचड़खाने' को फिर से शुरू करने की मांग की।

भाजपा शासित गोवा में गोहत्या पर प्रतिबंध है लेकिन प्रमाणित बूचड़खानों में बैल और भैंस काटने की अनुमति है। GMCL बूचड़खाना पिछले पांच साल से बंद है। यहां प्रति दिन 200 जानवरों के काटने की क्षमता है। 

एनसीपी नेता ने सुझाव दिया है, 'अगर कर्नाटक के साथ कोई समस्या है तो जानवरों को पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र से लाया जा सकता है।' माना जाता है कि गोवा में पहले चुनाव से ही गाय की राजनीति सक्रिय है। यहां साल 1978 से ही गौहत्या पर प्रतिबंध है। 

हालांकि कई बूचड़खानों में गौहत्या छोड़ बाकि सभी जानवरों के काटने की इजाज़त थी लेकिन उसमें भी ताला लगा दिया गया है। प्रतिबंध के बाद गोवा मीट कॉम्प्लेक्स लिमिटेड ने हाई कोर्ट को बताया था कि राज्य में 60 फीसदी आबादी बीफ खाती है। राज्य में प्रति दिन 15-20 टन बीफ का कंजंप्शन है। गोवा की एक तिहाई आबादी मुस्मिल और क्रिस्चन है और उनमें भी कैथोलिक की आबादी ज़्यादा है। 

इनके अलावा अगर आंकड़े देखें तो इंटरनेश्नल इंस्टीट्यूट ऑफ पॉपुलेशन साइंसेज़ की 2017 की एक रिपोर्ट बताती है कि शाकाहारी पसंद भारत में मांस की मांग ज़्यादा है। रिपोर्ट में बताया गया था कि देश की करीब 70 फीसदी आबादी किसी न किसी मौके पर मांस खाना पसंद करती है।

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