40 करोड़ आबादी एक कमरे के घर में रहने को मजबूर, कैसे करेंगे खुद को सेल्फ आइसोलेट?

by Rahul Gautam 2 months ago Views 3979
More than 400 million people lives in a one-room h
कोरोनावायरस की रोकथाम के लिए देश में 21 दिन का लॉकडाउन लागु हो चूका है। लक्ष्य है की लोग घरो में बंद रहे और एक व्यक्ति से दूसरा व्यक्ति संक्रमित ना हो। लेकिन सेंसस 2011 के आंकड़े बताते है कि देश में 40 करोड़ लोग महज़ एक कमरे के घर में रहते हैं। अब ज़ाहिर है उनके लिए ख़ुद को आइसोलेट करना या सोशल डिस्टन्सिंग कोई आसान काम नहीं है.  

लॉकडाउन का प्रयोग केरल समेत कुछ राज्यों में कारगर हो सकता है क्योंकि यहां 84 फ़ीसदी शहरी और 79 फ़ीसदी ग्रामीण इलाक़ों में बसने वाले परिवारों के पास तीन या तीन कमरों से ज़्यादा का घर है. इसी तरह जम्मू-कश्मीर में 63 फ़ीसदी और असम में 40 फ़ीसदी लोगों के पास तीन या तीन कमरे से ज़्यादा का घर है. यहां आसानी से पूरा परिवार लॉकडाउन का पालन करने के साथ-साथ ख़ुद को अलग-अलग कमरों में आइसोलेट कर सकता है लेकिन देश के बाक़ी हिस्सों में ऐसा मुमकिन नहीं है. 
ज़्यादातर राज्यों में बड़ी आबादी एक कमरे के मकान में रह रही है. तमिलनाडु में 48 फीसदी, बिहार में 44 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 43 फीसदी आबादी एक कमरे के घर में रहती है या फिर बेघर है. ऐसे लोगों से सोशल डिस्टन्सिंग या आइसोलेशन की उम्मीद करना बेमानी होगी क्योंकि इनके बीच आपसी संपर्क कम करना बेहद मुश्किल है.

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सेंसस 2011 के आंकड़ों के मुताबिक देश में कुल घरों की संख्या 24 करोड़ 66 लाख 92 हज़ार 667 थी. इसमें से लगभग 9 करोड़ से ज्यादा घर केवल एक कमरे के थे।  साथ ही एक परिवार में औसत 4.8 सदस्य रहते है।  यानि आसान भाषा में कहे तो 40 करोड़ से ज्यादा भारतीय एक कमरे के घर में रह रहे हैं. सेंसस 2011 का आंकड़ा यह भी कहता है कि देश में 17.7 लाख बेघर थे और 6.5 करोड़ से ज्यादा लोग झुग्गी-बस्तियों में रहने को मजबूर हैं।

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साफ़ है की इतनी बड़ी आबादी अगर डंडे के ज़ोर पर घर पर बंद भी रह लेगी, तब भी इनके लिए संक्रमण का खतरा कम नहीं होगा। वैसे 
विश्व स्वास्थ संगठन भी कह चूका है लॉकडाउन से बीमारी से नहीं जीता जा सकता बल्कि, इससे सिर्फ थोड़ा समय मिलेगा।