अफ़ग़ानिस्तान में 1839-2021 के बीच मारे गए 32 हज़ार से ज़्यादा सैनिक: रिपोर्ट

by M. Nuruddin 10 months ago Views 1480

More than 32,000 soldiers killed in Afghanistan be
तालिबान ने 20 साल की लड़ाई में खून-खराबे के बाद काबुल को दोबारा अपने नियंत्रण में ले लिया है। तालिबानी शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण की मांग कर रहा था लेकिन इससे पहले ही राष्ट्रपति अशरफ ग़नी ने देश छोड़ दिया। लंबी चली लड़ाई में हज़ारों की संख्या में सैनिकों की मौतें हुई। अमेरिका किसी भी तरह से अराजकता और हिंसा में फंसने वाली पहली महाशक्ति नहीं है, जिसने पीछे हटने से पहले ‘साम्राज्य को कब्रिस्तान’ बनाया हो।

ब्रिटिश साम्राज्य ने 1939 और 1919 के बीच तीन युद्ध लड़े। साल 1842 में पहले एंग्लो-अफ़ग़ान युद्ध के दौरान अफ़ग़ानियों ने हिंदू कुश के शीतकालीन बर्फ में ब्रिटिश सेना को मार गिराया था। इस दौरान 4,700 ब्रिटिश सैनिकों की मौत हुई थी और 12 हज़ार आम लोग मारे गए थे।


जबकि दूसरा एंग्लो-अफगान युद्ध 1878 और 1880 के बीच ब्रिटिश के लिए बेहतर रहा लेकिन इस दौरान भी बड़ी संख्या में ब्रिटिश सैनिक मारे गए। आंकड़ों के मुताबिक़ इस दौरान 9,850 ब्रिटिश सेना की मौत हो गई थी। इनके अलावा तीसरे एंग्लो-अफ़ग़ान युद्ध में मध्य-एशियाई देश ने अपनी स्वतंत्रता वापस हासिल की और इस दौरान 236 ब्रिटिश सैनिक मारे गए।

इसके बाद कोल्ड वॉर के दौरान सोवियत संघ ने अफ़ग़ानिस्तान में अपनी पूरी शक्ति के साथ आक्रमण किया। ये वो दौर था जब अमेरिका मुजाहिदीन का समर्थक था और यही वजह रही कि जितने भी विद्रोही समूंह थे वे सब सोवियत संघ के ख़िलाफ़ हो गए।

अफ़ग़ानिस्तान में छिड़े युद्धों में सबसे ज़्यादा 14,453 सेना की मौत इसी दौरान हुई और 53,753 सैनिक घायल हुए थे। इसके बाद साल 1989 में सोवियत संघ की हार हुई और उन्हें अफ़ग़ानिस्तान से पीछे हटना पड़ा।

ऑपरेशन एंड्योरिंग फ्रीडम में अब तक 2,348 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं, जबकि 20,000 सैनिक घायल हुए हैं। साल 2001 में अमेरिका के हमले के बाद अमेरिका और नाटो गठबंधन ने अफ़ग़ानिस्तान में अपनी सेना तैनात किए थे। इस अवधि में 1,147 नाटो सैनिक भी मारे गए हैं।

अब एक बार फिर अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की सरकार बनना तय हो है। पिछले दिनों तालिबानियों के हिंसा तेज़ करने से अफ़ग़ानिस्तान में लाखों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है और सैकड़ों की जानें गई हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ साल 2020 से अबतक 3.5 मिलियन लोगों को अपने ही देश में हिंसा की वजह से विस्थापित होना पड़ा। अब देश में आगे कैसे हालात होते हैं यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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