कांगो, सूडान और अफ़ग़ानिस्तान से ज़्यादा नागरिक भारत में हिंसा के शिकार: रिपोर्ट

by Rahul Gautam 1 year ago Views 1283

More citizens of Congo, Sudan and Afghanistan are
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भारत की घरती से दुनिया में अहिंसा का विचार पहुंचाया था लेकिन अब यहां पर ही हिंसा के मामलों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो रही है. यह दावा मशहूर अमेरिकी संस्था ऐकलेड यानी आर्म्ड कॉनफ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट की ताज़ा रिपोर्ट में दावा किया गया है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक अपने देश के नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा के मामले में नाइजीरिया पहले और भारत दूसरे पायदान पर है. वहीं तीसरे नंबर पर दक्षिण अमरीकी देश मेक्सिको, चौथे नंबर पर यूगांडा और पांचवें नंबर पर दशकों से युद्धग्रस्त देश अफ़ग़ानिस्तान है. सीधी बात कहें तो अपने ही देश के नागरिकों के ख़िलाफ़ हिंसा के मामले में भारत की स्थिति कांगो, यूगांडा और अफ़ग़ानिस्तान जैसे देशों से भी ख़राब है जिन्हें कई बार फेल्ड स्टेट कहा जाता है. वहीं ब्राज़ील, सीरिया, इराक़, चिली और कैमरून जैसे देशों में ऐसे मामलों में कमी आई है.


जिन नागरिकों को हिंसा का शिकार बनाया गया है, उनमें स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के अलावा भारतीय सुरक्षा बलों और घरेलू विद्रोही समूहों के बीच संघर्ष सहित भीड़ की हिंसा शामिल है. रिपोर्ट में मुस्लिम समाज के खिलाफ हिंसा के बढ़े मामलों का भी ज़िक्र किया गया है जिनपर निजामुद्दीन में हुए एक कार्यक्रम के बाद कोरोना फ़ैलाने का इल्जाम लगाया था.

आंकड़ों के मुताबिक कोरोना महामारी के पहले भारत में नागरिको के खिलाफ हिंसा के 370 मामले सामने आये थे जो कोरोनाकाल में बढ़कर 542 मामले हो गए. यानि कोरोना महामारी के दौरान ऐसे मामलों में 47 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज हुई. इसी तरह सुनियोजित राजनीतिक हिंसा के मामले कोरोना काल के पहले 424 थे जो महामारी आने के बाद बढ़कर 685 हो गए. यानि सुनियोजित राजनीतिक हिंसा के मामलों में 62 फीसदी की बढ़ोतरी.

इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि महामारी के दौरान विरोध प्रदर्शनों में कमी आई है. महामारी के पहले देश में विरोध प्रदर्शन के 5697 मामले दर्ज हुए थे जो कोरोनाकाल में घटकर 2410 रह गए यानि  58 फीसदी की कमी. माना जा रहा है विरोध प्रदर्शनों में कमी की वजह दो महीने तक चला लॉकडाउन है जिस दौरान प्रदर्शनों पर पाबंदी थी.

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