दिल्ली नहीं पहुंचा मानसून, करना होगा और इंतज़ार

by GoNews Desk 1 year ago Views 2260

Monsoon

भारत के अंडमान सागर जैसे इलाकों में मानसून इस साल ठीक समय पर पहुंच गया है, दक्षिण-पश्चिमी मानसून इस साल तय समय से दो दिन पहले ही केरल पहुंचा और फ़िर तेज़ी से भारत के दो-तिहाई हिस्से तक पहुँचा। मौसम विभाग की दैनिक मौसम रिपोर्ट के मुताबिक मंगलवार को मानसून की उत्तरी सीमा दीव, सूरत, नंदुरबार, भोपाल, नगांव, हमीरपुर, बाराबंकी, बरेली, सहारनपुर, अंबाला और अमृतसर से गुजरती रही।

दक्षिणी प्रायद्वीप और सेंट्रल इंडिया के कुछ इलाकों में मानसून 7 से 10 दिन पहले आ गया है हालांकि अभी तक इसने उत्तरी-पश्चिमी भारत-गुजरात, राजस्थान, पश्चिमी मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली में दस्तक नहीं दी है। 

मौसम विभाग ने अपनी पिछली रिपोर्ट में दक्षिण-पश्चिमी मानसून के तेज़ी से बढ़ने का अनुमान लगाया था हालांकि सोमवार को इसकी गति धीमी पड़ गई। मौसम विभाग के मुताबिक मानसून का पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पहुंचना ही ये तय करेगा कि इसकी आधिकारिक घोषणा कब की जाए। विभाग ने इससे पहले फोरकास्ट रिपोर्ट में दिल्ली में मानसून के 15 जून तक पहुंचने की संभावना जताई थी।

IMD अधिकारी कुलदीप श्रीवास्तव ने कहा था कि मानसून की घोषणा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुई बारिश पर निर्भर करती है। मानसून की गति यूपी के कुछ इलाकों में कम बारिश के कारण धीमी पड़ गई है लेकिन मंगलवार को उत्तर प्रदेश और दिल्ली में होने वाली बारिश के साथ ही मानसून का ऐलान किया जा सकता है। 

दिल्ली में आमतौर पर मानसून 27 जून तक पहुंचने की संभावना थी हालांकि विभाग ने अनुमान जताया कि मानसून दिल्ली में 2 हफ्ते पहले ही पहुंच जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ और दिल्ली में न के बराबर प्री-मानसून बारिश देखी गई। राजधानी के नजफगढ़ में सोमवार सुबह 8.30 बजे तक 30 मिली मीटर, आर्यनगर और पालम में सिर्फ 4 मिली मीटर और 1 मिली मीटर बारिश हुई।

 मानसून के कुछ इलाकों में समय पर पहुंचने और समय से पहले पहुंचने को हाल ही में भारत में दस्तक देने वाले चक्रवात यास से जोड़ कर देखा जा रहा है। पश्चिम बंगाल में मई के अंत में आने वाले साइक्लोन यास ने मानसून को अंडमान में तय समय 21 मई को पहुंचने में मदद की है।

उधर मानसून 2 दिनों की देरी से 3 जून को केरल पहुंचा लेकिन फिर दक्षिण-पश्चिम मानसून ने अरब सागर से आने वाली तेज़ हवाओं और 11 जून को बंगाल की उत्तरी खाड़ी के ऊपर लो-प्रेशर सिस्टम बनने के बाद रफ्तार पकड़ ली। वहीं महाराष्ट्र और केरल के बीच बनी अपतटीय ट्रफ रेखा ने मानसून के कर्नाटक, गोवा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और दक्षिणी गुजरात में समय से पहले पहुंचने में मदद की है। 

गौतरलब है कि पिछले एक दशक में चार बार ऐसा हुआ जब मानसून जून महीने में सभी भारतीय राज्यों में पहुंचा हो। 2013 में मानसून ने 1-16 जून, 2015 में 5-26 जून, 2018 में 28 मईसे 29 जून और 2020 में 1 जून से 26 जून के बीच पूरे देश में दस्तक दे दी थी। 

इस बीच कुछ राज्यों में मासनून के जल्दी पहुंचने से फसल उगाने वाले किसान परेशान है। ऐसा माना जा रहा है कि इन राज्यों में बारिश फसलों को नुकसान पहुंचाएगी लेकिन विशेषज्ञों ने इससे इंकार किया है। समय से पहले बारिश फसलों को सीधे प्रभावित नहीं करेगी क्योंकि फसलों के बीजारोपण का काम अभी शुरूआती चरण में है।

पुणे के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के आर बालासुब्रमण्यम के मुताबिक चावल उगाने वाले अधिकांश क्षेत्रों में धान की रोपाई के लिए अभी भी समय है। तटीय कर्नाटक और कोंकण में बारिश के कारण, किसान जून के तीसरे से चौथे सप्ताह में धान की रोपाई कर सकते हैं। मौजूदा समय में सिर्फ केरल में  बीजारोपण का काम हो रहा है।

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