पूर्व मिलिटेंट लीडर के एनकाउंटर की जांच कराएगी मेघालय सरकार

by GoNews Desk 11 months ago Views 2052

violence in Meghalaya

बीजेपी शासित मेघालय की राजधानी शिलौंग और इसके आसपास के इलाकों में पिछले दिनों हुई हिंसा की अब जांच की जाएगी. राज्य सरकार ने 13 अगस्त की सुबह हुई घटनाओं के लिए इन्क्वायरी एक्ट कमिशन के तहत न्यायिक जांच बैठाने का फैसला किया है. 

बता दें कि 15 अगस्त, रविवार को मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा के ऊपरी शिलांग थर्ड मील पर स्थित आवास पर देर रात कुछ लोगों ने पेट्रोल बम से हमला किया. वहीं शिलांग के कई इलाकों से भी हिंसा और उपद्रव की खबरें आने लगी. ऐसा माना जा रहा है कि ये हिंसा पुलिस के एक पूर्व मिलिटेंट लीडर चेस्टरफ़ील्ड थांगखिव की शुक्रवार को ऑपरेशन के दौरान हत्या करने के कारण हुई. 

चेस्टरफ़ील्ड हाइनीवट्रेप नेशनल लिबरेशन काउंसिल के महासचिव थे. पुलिस का दावा है कि वह आईव शिलांग, लाइटुमखराह में पिछले मंगलवार को हुए आईईडी हमले में शामिल थे जबकि मिलिटेंट लीडर 2018 में ही सरकार को सरेंडर कर चुके थे. 

चेस्टरफील्ड के मारे जाने के बाद हुई हिंसा पर अफसोस जताते हुए राज्य गृह मंत्री एल. रिंबुई ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और प्रतिबंधित संस्था के महासचिव की हत्या के मामले में न्यायिक जांच कराने के लिए कहा.

उधर राज्य सरकार ने बीसीएफ और सीआपीएफ की पांच टुकड़ियां शिलांग में तैनात की है जबकि तनाव को देखते हुए इंटरनेट शटडाउन 24 और घंटों के लिए  और कर्फ्यू को 18 अगस्त सुबह 5 बजे तक आगे बढ़ा दिया गया है. शिलांग के ईस्ट खासी हिल्स, वेस्ट खासी हिल्स, साउथ वेस्ट खासी हिल्स और री-भोई जिले में हिंसा के बाद कई पाबंदियां लागू कर दी गई थी. लोगों ने हिंसा के दौरान री-भोई में पुलिस के एक अस्थायी चेक प्वाइंट को जला दिया था. 

मेघालय के मानवाधिकार आयोग ने चेस्टरफील्ड के एनकाउंटर को मानवाधिकारों का उल्लंघन माना है. उसने कहा है कि ये संविधान का अनुच्छेद 21 भारत के क्षेत्र के भीतर प्रत्येक व्यक्ति के लिए जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा के नियम का उल्लंघन है. आयोग ने महासचिव को घटना की एक डिटेल रिपोर्ट 15 दिनों में जमा करने के आदेश दिए हैं.

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