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राजस्थान, पंजाब और महाराष्ट्र के अस्पतालों को पीएम केयर फंड से भेजे गए वेंटिलेटर्स में कई ख़ामियां

by GoNews Desk 1 month ago Views 2135

ventilators in Indian hospital

कोरोना महामारी से निपटने के लिए बनाए गए पीएम केयर फंड से अस्पतालों के लिए वैंटिलेटर्स का ऑर्डर्स दिया गया था. अब इन वैंटिलेटर्स में खामियां देखी जा रही है. चंडीगढ़, राजस्थान के बाद हाल ही में मोहाली और महाराष्ट्र के बीड़ में भी अस्पतालों ने खराब वेंटिलेटर्स की शिकायत की है. महामारी के प्रकोप के बीच मोहाली के दो निजी अस्पतालों ने दावा किया कि उन्हें पीएम केयर फंड के तहत 20 वेंटिलेटर्स मिले थे लेकिन इन मशीनों में खामियां है. अस्पतालों की ओर से जिला प्रशासन को इनकी मरम्मत के लिए चिट्ठी भी लिखी गई है. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक मोहाली के आईवी अस्पताल और ग्रेशियन सुपर स्पेशेलटी अस्पताल ने डीजी गिरीश दयालन को पत्र लिख कर बताया कि उन्हें पिछले साल 20 वेंटिलेटर्स मिले थे लेकिन ये काम नहीं कर रहे हैं. इनमें से एक अस्पताल की शिकायत है कि उन्हें 10 वेंटिलेटर्स मिले थे जबकि इनमें से सिर्फ एक ही काम कर रहा है. यहां तक कि इस वेंटिलेटर को इस्तेमाल करने पर सेचुरेशन लेवल तुरंत गिर जाता है. दूसरे अस्पताल की शिकायत है कि उन्हें पीएम फंड से पंजाब सरकार के जरिए 20 अगस्त 2020 को 10 वेंटिलेटर्स मशीन मिली थी और इन्हें 24 अगस्त को अस्पताल में लगाया गया हालांकि पहले दिन से ही कुछ मशीनों में ‘negative airway pressure’ की परेशानी आ रही थी जबकि कुछ में सॉफ्टवेयर की समस्या थी.

इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं। एक प्रतिष्ठित पत्रकार ने दावा किया कि बीड़ के अंबाजोगाई में मेडिकल कॉलेज में 25 वेंटिलेटर्स दिए गए लेकिन इनमें से कोई एक भी काम नहीं कर रहा था जिसके बाद मुंबई से दो टेक्निशियन अंबाजोगाई पहुंचे और इनमें से 11 को ठीक किया और बाकी 14 मशीनें अभी भी काम नहीं कर रहा है. इससे पहले राजस्थान, पुणे और चंडीगढ़ से भी इस तरह की शिकायत आ चुकी है. पुणे के अगरकार नगर में स्थित सासून अस्पताल का कहना था कि पीएम केयर फंड के तहत उसे दिए गए कई वेंटिलेटर्स काम नहीं कर रहे हैं.

बताया जा रहा है कि जिन अलग-अलग कंपनियों को वेंटिलेटर्स बनाने के लिए पीएम केयर फंड से करोड़ों दिए गए थे, उनकी बनाई मशीनों में एक बड़ी समस्या प्रेशर ड्रॉप की है.बीते दिनों राजस्थान सरकार ने इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने रखा था. राज्य के कई जिलों के मेडिकल अस्पतालों में दोषपूर्ण वेंटिलेटर्स की शिकायत के बाद सरकार ने केंद्र को पत्र लिखा था. कई अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों ने सीएम अशोक गहलोत के साथ हुई कोविड पर समीक्षा बैठक में खराब वेंटिलेटर्स मिलने की बात कही थी.इनके अलावा कई अन्य अस्पतालों ने भी वेंटिलेटर में खामियों की बात उजागर कर चुके हैं। अस्पतालों के अधिकारी कहते हैं कि वेंटिलेटर्स सिर्फ 1 या दो घंटे काम करते हैं और फिर रूक जाते हैं. 

अलग-अलग कंपनियों को किए गए करोड़ों के भुगतान
पिछले साल अगस्त 2020 में एक आरटीआई के जवाब में स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि आंध्र प्रदेश की कंपनी AMTZ को पीएम केयर फंड से 13,500 वेंटिलेटर के लिए 500 करोड़ रूपये दिए गए थे। इसी तरह गुजरात की एक निजी कंपनी सीएनसी को 5000 वेंटिलेटर के ऑर्डर दिए गए थे और कंपनी को इसके लिए 121 करोड़ रूपये का भुगतान किया गया था।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि दोनों ही कंपनियों की मशीनें क्लिनिकल ट्रायल में फेल हो गई। नोएडा की भी एक कंपनी AgVa को 10,000 वेंटिलेटर बनाने का कॉन्ट्रेक्ट दिया गया था। इस कंपनी के वेंटिलेटर भी क्लिनिकल ट्रायल में फेल हो गए जबकि इसके बावजूद अस्पतालों में इन मशीनों का इस्तेमाल जारी रहा।

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