ममता बनाम मोदी ! क्या पश्चिम बंगाल के पूर्व चीफ सेक्रेटरी ने प्रधानमंत्री का अपमान किया ?

by M. Nuruddin 1 year ago Views 2131

पढ़िए, नियम क्या कहते हैं...?

Mamta Vs Modi! Did the former Chief Secretary of W
हाल के दिनों में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और नरेंद्र मोदी सरकार के बीच तक़रार बढ़ गई है। बीते दिनों राज्य के (पूर्व) चीफ सेक्रेटरी आलापन बंदोपाध्याय को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री की प्रधानमंत्री के समर्थकों ने काफी आलोचना की। मुख्यमंत्री ममता ने चीफ सेक्रेटरी को अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त कर लिया है लेकिन गृह मंत्रालय ने आलापन को नोटिस भेज दिया है। 

गृह मंत्रालय ने उन्हें डिज़ास्टर मैनेजमेंट के तहत कारण बताओ नोटिस भेजा है और मुख्यमंत्री के (अब) निजी सलाहकार से तीन दिनों के भीतर जवाब मांगा है। जिस एक्ट के तहत नोटिस भेजा गया है उसमें आरोप साबित होने पर दो साल तक की जेल और जुर्माना या दोनों का प्रावधान है।


दरअसल, केन्द्र सरकार ने आईएएस अधिकारी आलापन बंदोपाध्याय को चिट्ठी भेजकर 31 मई की सुबह 10 बजे कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग या डीओपीटी को रिपोर्ट करने के लिए कहा था। राज्य के (पूर्व) चीफ सेक्रेटरी को ममता ने रिहा करने से मना कर दिया था और कहा था कि वो उन्हें दिल्ली नहीं भेज सकतीं।

इसके लिए मुख्यमंत्री ममता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी भी लिखी थी जिसमें उन्होंने कहा था, 'मैं विनम्रतापूर्वक आपसे अनुरोध करती हूं कि आप अपने फैसले को वापस ले लें, इस पर पुनर्विचार करें और व्यापक जनहित में नवीनतम तथाकथित आदेश को रद्द करें।' प्रधानमंत्री को लिखे अपने चिट्ठी में ममता ने आलापन बंदोपाध्याय को दिए केन्द्र के आदेश को 'असंवैधानिक' और 'अवैध' बताया था।

यह अनुमान लगाया जा रहा है कि विवाद तब बढ़ गया जब आलापन और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साइक्लोन यास पर समीक्षा बैठक में शामिल नहीं हुए। इसके लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि समीक्षा बैठक प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के बीच होनी थी लेकिन उस बैठक में विपक्षी नेताओं को भी शामिल किया गया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रधानमंत्री के साथ समीक्षा बैठक में सुवेंदू अधिकारी को भी शामिल किया गया था जिन्होंने मुख्यमंत्री ममता को नंदीग्राम में बहुत कम मार्जिन के साथ मात दिए हैं।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और आलापन बंदोपाध्याय जो अब मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार हैं, ने बाद में प्रधानमंत्री से 28 मई को कलाईकुंडा और पश्चिमी मिदनापुर में मुलाक़ात की और राज्य में साइक्लोन यास से हुई छति की भरपाई के लिए 20 हज़ार करोड़ रूपये का प्रपोज़ल दिया। इसके बाद दोनों कलाईकुंडा से 'प्रधानमंत्री की अनुमति के बाद' रवाना हो गए।

अब नियमों पर ग़ौर करें- अगर केन्द्र किसी राज्य के आईएएस अधिकारी को सम्मन देता है, तो सामान्यत: प्राथमिकता यह है कि अधिकारी या राज्य सरकार या दोनों से तत्परता दिखाने की मांग की जाती है। यानि नियम के मुताबिक़ केन्द्र के आदेश पर अधिकारी को उस तारीख और समय पर रिपोर्ट करना अनिवार्य है। इस मामले में ना ही अधिकारी और ना ही राज्य सरकार ने ही तत्परता दिखाई।

महामारी की वजह से राज्य की मुख्यमंत्री की मांग पर आईएएस अधिकारी आलापन बंदोपाध्याय को कैबिनेट की अप्वाइंटमेंट कमेटी ने ही राज्य के चीफ सेक्रेटरी के पद पर उन्हें तीन महीने का एक्सटेंशन दिया था। इस अप्वाइंटमेंट कमेटी में देश के गृह मंत्री शामिल होते हैं, जो अभी अमित शाह हैं।

अब आईएएस अधिकारी आलापन बंदोपाध्याय का चीफ सेक्रेटरी के पद से 31 मई को रिटायरमेंट होना था लेकिन बकौल मुख्यमंत्री ममता उन्होंने अपने रिटायरमेंट की तारीख से पहले ही रिटायरमेंट ले ली थी। इसके बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें अपना मुख्य सलाहकार नियुक्त कर लिया। यही वजह रही की ममता बनर्जी की प्रधानमंत्री के समर्थकों और उनकी पार्टी के नेताओं ने आलोचना की।

अब अगर जानकार की मानें- तो आईएएस अधिकारी (अब मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार) ने नियमों का कोई उल्लंघन नहीं किया। क्योंकि नियम यह भी है कि अगर कोई नौकरशाह किसी राज्य सरकार में तैनात हैं, तो उन्हें केन्द्रीय आदेशों पर कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार की अनुमित लेना अनिवार्य है।

ऐसे में राज्य सरकार के पास यह अधिकार है कि वो केन्द्र के आदेशों को मानने से इनकार कर सकते हैं, और इस केस में ठीक ऐसा ही हुआ है। नियम के मुताबिक़ केन्द्र के सम्मन जारी करने पर भी राज्य सरकार राज्य में तैनात एक अधिकारी को रिहा करने से मना कर सकती है।

ग़ौरतलब है कि, आलापन बंदोपाध्याय से ये जवाब मांगा गया है कि वो बताएं क्यों उनके खिलाफ डिजास्टर मैनेजमेंट की धारा-51 के तहत 'कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए'। ये धारा केन्द्र सरकार के निर्देश को मना करने, सरकारी काम में रुकावट से जुड़ी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, नोटिस में कहा गया है कि 28 मई को पश्चिम बंगाल में चक्रवात प्रभावित इलाके कलाईकुंडा में पीएम मोदी की समीक्षा बैठक से दूर रहते हुए अधिकारी ने 'केन्द्र सरकार के वैध निर्देशों का पालन करने से इनकार करने के समान काम किया है, और ऐसे में ये डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, 2005 की धारा-51 (बी) का उल्लंघन है।'

इस ख़बर को अंग्रेज़ी अख़बार दि हिंदू ने रिपोर्ट किया जिसमें नोटिस के हवाले से कहा गया है कि 'प्रधानमंत्री और उनके दल को राज्य सरकार के अधिकारियों के लिए लगभग 15 मिनट तक इंतजार करना पड़ा था।' 'अनुपस्थिति को ध्यान में रखते हुए, चीफ सेक्रेटरी (पूर्व) को एक अधिकारी द्वारा बुलाया गया था। इसके बाद, (पूर्व) चीफ सेक्रेटरी, मुख्यमंत्री के साथ मीटिंग रूम में पहुंचे और उसके बाद तुरंत चले गए।'

दि हिंदू ने पुलिस अनुसंधान और विकास ब्यूरो में डायरेक्टर जनरल के पद पर काम कर चुकीं मीरान चड्ढा बोरवणकर के हवाले से बताया है कि डिज़ास्टर मैनेजमेंट अधिनियम की धारा-51 में महत्वपूर्ण चेतावनी है। 

मीरान चड्ढा बोरवणकर, पूर्व नौकरशाह ने बताया, 'अधिनियम के तहत, शख़्स 'उचित कारण' और 'कोई अधिकारी उचित अनुमति या वैध बहाने के बिना कर्तव्य का पालन करने में विफल' होने चाहिए। अगर इसमें वो दोषी साबित होते हैं तो उनपर कठोर कार्रवाई की जा सकती है।' उन्होंने कहा, 'मुझे यकीन है कि चीफ सेक्रेटरी (पूर्व) के पास (प्रधानमंत्री की समीक्षा) मिटिगं में शामिल नहीं होने का उचित कारण और उचित बहाना होगा। अपने जवाब में वो दोनों ही को उजागर कर सकते हैं।'

पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि, 'बेहतर होगा कि केन्द्र इस मुश्किल समय में कोरोना से लड़ने पर ध्यान केन्द्रित करे जो राष्ट्रहित में होगा। केन्द्र को इस मामले को ख़त्म करने में परिपक्वता दिखानी चाहिए। 37 साल तक सरकार में काम करने के बाद, मैं निश्चित रूप से कह सकती हूं कि चीफ सेक्रेटरी (पूर्व) के पास केन्द्र अवमानना करने या प्रधानमंत्री के प्रति अपमान करने का कोई इरादा रहा हो।'

ताज़ा वीडियो