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ममता बनर्जी: बीजेपी के मिशन बंगाल की राह रोके खड़ी अग्निकन्या !

by Rahul Gautam 4 months ago Views 2018

Mamta Banerjee: Agnikanya standing between BJP's m
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ख़्याति एक बेहद जुझारू नेत्री की है। सूबे की पहली महिला मुख्यमंत्री ममता की सारी राजनीती संघर्ष के इर्द गिर्द ही घूमती रही है। 19 मई 2016 को, जब उन्होंने दूसरी बार शपथ ली तो लगातार दो चुनाव जीतने वाली एकमात्र महिला सीएम का ख़िताब भी उनके नाम दर्ज हो गया।

बंगाल में "दीदी" यानी बड़ी बहन के रूप में मशहूर ममता ने पश्चिम बंगाल के 2011 के विधान सभा चुनावों में बड़ी जीत के साथ  इतिहास रचा था। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी के नेतृत्व में 34 साल से चली आ रही वाम मोर्चा सरकार को उखाड़ फेंका था। देश की पहली महिला रेल मंत्री होने का रिकॉर्ड भी ममता के ही नाम है। इसके अलावा वे केंद्र में मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री, कोयला, महिला और बाल विकास मंत्री, और युवा मामले और खेल विभाग की मंत्री भी रहीं।


एक स्वंत्रता सेनानी के घर 5 जनवरी, 1955 को जन्मी ममता ने अपने राजननीतिक करियर की शुरुआत छात्र नेता के तौर पर जोगमाया कॉलेज से की, जहा वे हिस्ट्री की स्टूडेंट थी। बाद में वे कांग्रेस में शामिल हुई और 1978 से 1980 के बीच इंदिरा कांग्रेस की पश्चिम बंगाल इकाई की महासचिव रहीं। 1984 में वे पहली बार जादवपुर सीट से चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचीं। तब उन्होंने सीपीएम के सोमनाथ चटर्जी जैसे दिग्गज को हराया था। उसके बाद लगातार 6 बार साउथ कोलकाता से लोकसभा पहुँचती रहीं।

माँ, माटी और मानुष के नारे के साथ 1997 में कांग्रेस से अलग होकर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी का गठन किया ताकि वाम विरोध की राजनीती को नई धार दी जा सके। इस नारे को उन्होंने जन जन तक पहुंचाया और 2006 में जब सिंगुर में टाटा मोटर्स के एक प्लांट के खिलाफ स्थानीय लोगों ने आंदोलन छेड़ा तो ममता ने इसमें पूरी ताक़त झोंक दी। 1993 में जब ममता को पश्चिम बंगाल सरकार के सेक्रटेरियेट, राइटर्स बिल्डिंग से घसीटकर बाहर निकाला गया था, तब किसी को अंदाज़ा नहीं था की एक दिन वो बिल्डिंग में मुख्यमंत्री बनकर लौटेंगी।

अपने सादे रहन सहन के चलते ममता बनर्जी को उनके विरोधी भी मान देते हैं पर यह भी सच है की राज्य में हुए शारदा चिट फंड जैसे घोटालों के चलते उनकी पार्टी की छवि को नुकसान पंहुचा है। चित्रकारी का शौक रखने वाली ममता के गढ़ में बीजेपी 2019 में कुछ हद तक सेंध लगाने में कामयाब रही थी लेकिन असल मुकाबला यानि विधानसभा चुनाव अभी बाकी है। जानकर कहते हैं की ममता आसानी से हथियार डालने वालों में नहीं है और बिना जबरदस्त लड़ाई के उनके राजनीतिक विरोधियो को कुछ नहीं मिलने वाला। विरोधियों को सत्ता तक पहुँचने के लिए आग से गुज़रना होगा। ममता बनर्जी को अग्निकन्या यूँ ही नहीं कहा जाता।

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