सिर्फ हिंदी-अंग्रेजी में आयोजित परीक्षा को मद्रास HC ने सस्पेंड किया

by GoNews Desk 8 months ago Views 1899

Madras HC suspends examination

मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्रीय स्कॉलरशिप प्रोग्राम के तहत कराए जा रहे एप्टीट्यूट टेस्ट को सस्पेंड कर दिया है। किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना के तहत यह परीक्षा 7 नवंबर को कराई जानी थी लेकिन परीक्षा के खिलाफ दायर  याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने इस पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस याचिका में एग्जाम क्षेत्रीय भाषाओं में कराने की मांग की गई है। दरअसल परीक्षा का आयोजन सिर्फ हिंदी और अंग्रेजी में ही कराए जाने के आदेश थे।

अदालत ने केंद्र के उस बयान को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने कहा था कि उसके पास गैर हिंदी और गैर अंग्रेजी भाषी उम्मीदवारों की लिखी गई सामग्री की जांच के लिए योग्य जांतकर्ता नहीं है। इस पर चीफ जस्टिस संजीब बैनर्जी और एम दुराईस्वामी की बेंच ने कहा कि गैर हिंदी और गैर अंग्रेजी भाषी छात्रों के जवाबों की जांच करने के लिए एग्जामिनर न होना केंद्र की कमी है और इसके चलते गैर हिंदी और गैर अंग्रेजी भाषी छात्रों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए।

मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से भी जवाब मांगा है कि उसने परीक्षा को कई भाषाओं में आयोजित करने के लिए क्या कदम उठा रहा है। केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्तर पर कराई जा रही इस परीक्षा को सिर्फ हिंदी या अंग्रेजी के माध्यम से ही दिया जा सकता है और इससे एक बार फिर देश में भाषा को लेकर विवाद उभर सकता है। बीते दिनों ज़ोमैटो की एक अधिकारी के हिंदी को राष्ट्र भाषा बताए जाने के बाद देश में भाषा पर विवाद तेज़ हो गया था।

रअसल फूड डिलीवरी ऐप जोमैटो की कस्टमर एग्जिक्यूटिव और एक कस्टुमर के बीच हुई बातचीत सोमवार से ट्विटर पर वायरल हो रही है। दोनों की इस चैट के मुताबिक तमिलनाडु के विकास ने ऐप से खाना ऑर्डर किया। 

उसके ऑर्डर में कुछ गड़बड़ी हुई जिसे ठीक कराने के लिए विकास ने कंपनी के कस्टमर केयर एग्जिक्यूटिव से संपर्क किया। इसके जवाब में अधिकारी ने कहा कि वह विकास की मदद नहीं कर पा रही हैं क्योंकि दोनों के बीच भाषा की बाधा है। 

यहां तक कि अधिकारी ने यह तक कह डाला कि 'हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा है और यह बहुत आम बात है कि सभी को हिंदी आनी चाहिए।' जोमैटो के इस कस्टुमर ने चैट को अपने सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया और दक्षिण में काफी आलोचनाओं के बाद कंपनी को माफी जारी करनी पड़ी। 

यह पहली बार नहीं है कि जब लोगों ने खुल कर हिंदी भाषा को राष्ट्रीय भाषा घोषित किए जाने की वक़ालत या बताए जाने का विरोध किया हो। जून के महीने में दिल्ली के एक अस्पताल में कार्यरत नर्सों को नोटिस लिख कर मलयालम में बात न करने को कहा गया था क्योंकि 'ज़्यादातर मरीजों और सहयोगियों को वह भाषा बोलनी नहीं आती।' उनसे कहा गया था कि वह हिंदी या अंग्रेज़ी में बात करे। अस्पताल के इस नोटिस का विरोध हुआ और मजबूरन उसने नोटिस रद्द किया। 

भारत में बड़ा वर्ग ऐसा है जो हमेशा हिंदी भाषा को उन पर थोपने का आरोप लगाता है। उस पर इस तरह के बयान आग में घी डालने का काम करते हैं और इसमें राजनेताओं के बयान और सरकार की कुछ नीतियों का भी बड़ा हाथ माना जाता रहा है। उदाहरण के लिए 2019 में हिंदी दिवस के मौके पर भाषण देते हुए केंद्रिय गृह मंत्री  अमित शाह ने कहा कि हिंदी को राष्ट्र भाषा घोषित किया जाना चाहिए।

उनका कहना था कि देश की एक राष्ट्र भाषा होनी चाहिए ताकि विदेशी भाषा हमारी भाषा पर कब्जा न कर सके और हमें हिंदी को विश्व में सबसे ज़्यादा बोले जाने वाली भाषा बनाना चाहिए। उनसे पहले उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी कहा था कि हिंदी को राष्ट्र भाषा घोषित किया जाना चाहिए। उनका यह बयान राजनीतिक विवाद का कारण बन गया था।

आलोचकों की माने तो इस तरह के बयान लोगों के मन में एक भाषा के प्रति विरोध पैदा करते हैं और ऐसे बयान ही 'Bangla Pokkho' जैसे आंदोलन को जन्म देते हैं। Bangla Pokkho पश्चिम बंगाल में "हिंदी साम्राज्यवाद" के खिलाफ चलाया गया अभियान है। जिसमें ऐसे लोग भाग लेते हैं जिनके मुताबिक हिंदी भाषा गैर हिंदी लोगों पर थोपी जा रही है। ऐसे अभियानों में भाग लेने वाले लोग केंद्र सरकार की कुछ नीतियों जैसे कि 'थ्री लैंगुएज फार्मुला' की भी आलोचना करते हैं। इन फार्मुला के तहत गैर हिंदी भाषी राज्यों में भी हिंदी पढ़ाए जाने की सलाह दी गई थी।

आलोचक मानते हैं कि इस तरह की नीतियों ने बड़े स्तर पर लोगों के मन में यह धारणा पैदा कर दी है कि हिंदी भारत की राष्ट्र भाषा है। 2011 की जनगणना के मुताबिक देश में 44 फीसदी से ज़्यादा लोग हिंदी बोलते हैं लेकिन कहीं भी हिंदी के देश की राष्ट्र भाषा होने के सबूत होने के सबूत नहीं हैं। संविधान में भी लिखा है कि सभी को अपनी भाषा अपनी पसंद से चुनने का अधिकार है।

हालांकि संविधान का आर्टिकल 351 कहता है कि यह 'यूनियन' का कर्तव्य होना चाहिए कि वह हिंदी भाषा को फैलाए ताकि यह लोगों के बीच बातचीत का जरिए बने।

ताज़ा वीडियो