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लॉकडाउन ने बनाया भिखारी, कुंभ से बने बावर्ची, ऐसी है देश में बेरोजगारों की हालत

by GoNews Desk 1 month ago Views 3871

beggars in kumbh mela
लॉकडाउन में बेरोजगार हुए लोग कुंभ में भीख मांगने को मज़बूर हैं। उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार से ऐसे सैकड़ों भिखारियों को हिरासत में लिया है जिन्हें लॉकडाउन ने बेरोजगार बना दिया। उत्तराखंड पुलिस ने हिरासत में लिए गए 183 भिखारियों में कई को बावर्ची की नौकरी लगवा दी है। इसके लिए वो कहते हैं कि उन्हें अच्छी तनख़्वाह भी मिलती है और वे  इज़्ज़तदार ज़िंदगी भी जी रहे हैं।

हरिद्वार से हिरासत में लिए गए भिखारियों  को पुलिस ने पहले एक फाइव स्टार होटल के शेफ से ट्रेनिंग दिलवाई। बाद में उन्हें हरिद्वार में ही ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के लिए खाना बनाने का काम दिया गया। एक अंग्रेज़ी अख़बार ने पुलिस अधिकारी संजय गुंजयाल के हवाले से लिखा है कि उत्तराखंड में भीख मांगना क़ानूनी तौर पर प्रतिबंधित है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसी के चलते इन भिखारियों को हिरासत में लिया जाता है लेकिन रिहा किए जाने पर फिर से वे वो ही काम करने लगते हैं।


पुलिस अधिकार संजय गुंजयाल का कहना है, ‘लॉकडाउन की वजह से लोग और ज़्यादा बेरोजगार हुए हैं और हालात और ज़्यादा बिगड़ गए हैं। ऐसे में हम इसे बदलना चाहते हैं।’

लॉकडाउन की वजह से भीख मांगने को मज़बूर विष्णु राम कहते हैं, ‘मैं झारखंड से कुछ सालों पहले हरिद्वार आया था। मज़दूरी किया करता था लेकिन लॉकडाउन की वजह से सब कुछ रूक गया। यहां तक कि लॉकडाउन के बाद भी बहुत मुश्किल से काम मिलता था। शुरूआती महीनों में मेरे पास खाने के लिए पर्याप्त खाना भी नहीं था। मेरे पास भीख मांगने के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं था।’

47 वर्षीय मदन मोहन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। मदन का कहना है कि उनके रहने की जगह अचानक उनसे छिन गई और उन्हें खुले आसमान के नीचे रहने को मज़बूर होना पड़ा। मोहन कहते हैं कि उनके पास भीख मांगना ही एकमात्र विकल्प था। विष्णु और मदन उन कई भिखारियों में से हैं जिन्हें पुलिस ने खाना बनाने के काम पर लगा दिया है।

उत्तराखंड पुलिस में आईजी संजय गुंजयाल बताते हैं कि हरिद्वार से हिरासत में लिए गए भिखारियों को पहले भिखारी गृह लाया गया था। इस दौरान ये पता चला कि लॉकडाउन की वजह से बेरोजगार हुए लोग भी भिखारी बन गए हैं। यहां उनकी कांउसलिंग की गई जिसके बाद 30 भिखारी काम करने के लिए तैयार हो गए। इनमें से कुछ लोगों को खाना बनाने की ट्रेनिंग दी गई। 

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के 16 भिखारियों को अबतक खाना बनाने की ट्रेनिंग दी गई और बाद में उन्हें पुलिस स्टेशनों में बावर्ची के काम पर रखा गया है। इस काम के लिए उन्हें हर महीने 10 से 12 हज़ार रूपये वेतन के रूप में मिलते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी तनख़्वाह डायरेक्ट उनके बैंक खाते में दिया जाता है जो उनके लिए खुलवाए गए हैं। 

कभी उत्तराखंड के हर-की-पौड़ी पर भीख मांगने वाले विष्णु अब कुक का काम करते हैं। वो कहते हैं, ‘मैं इस काम से इज़्ज़तदार ज़िंदगी जी रहा हूं।’

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