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पिछली तिमाही में सरकार ने बीते छह साल में सबसे कम खर्च किया

by Rahul Gautam 4 months ago Views 1929

Last quarter, the government spent the least in th
देश की अर्थव्यवस्था लगातार 2 तिमाही में सिकुड़कर तकनीकी तौर पर मंदी के जाल में फँस चुकी है। लॉकडाउन के चलते रुकी आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए सरकार ने 20 लाख करोड़ के पैकेज का ऐलान किया, ‘आत्मानिर्भर भारत’ और तमाम दूसरी नई योजनाएँ चलायीं ताकि लोगो के हाथ में ज्यादा पैसा आये लेकिन हुआ इसका बिलकुल उल्टा। बीती जुलाई-सितंबर तिमाही में सरकार ने जो पैसा राज-काज चलाने और कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च किया, वह पिछले 6 साल में सबसे कम था।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी किए गए आँकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही में प्रशासन और रक्षा क्षेत्र में ज़बरदस्त गिरावट जारी है। मसलन चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में जहाँ प्रशासन और रक्षा क्षेत्र 10.3 फीसदी सिकुड़ा, वही दूसरी तिमाही में यह आँकड़ा हो गया -12.2 फीसदी। पिछले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यह आंकड़ा 10.3 फीसदी था।


इस क्षेत्र के सिकुड़ने की सबसे बड़ी वजह है सरकारी खर्च में कमी। सरकार ने इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7 लाख 26 हज़ार 278 करोड़ रुपए खर्च किये थे, जबकि इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही यानि जुलाई -सितंबर तिमाही में यह आँकड़ा घटकर रह गया 5 लाख 61 हज़ार 812 करोड़ रुपए।अगर इसकी तुलना पिछले साल की जुलाई -सितंबर तिमाही से करें तो पता चलता है कि सरकार इस साल से ज्यादा पैसा तो पिछले साल खर्च कर रही थी। पिछले साल यही आँकड़ा था 6 लाख 85 हज़ार 212 करोड़ रुपए।

इस ग्राफ के ज़रिए आप समझ सकते है की कैसे वित्त वर्ष 2015 में  राज-काज चलाने और कल्याणकारी योजनाओं पर हो रहे सरकारी ख़र्च में 25 फीसदी की वृद्धि दर्ज़ हो रही थी, लेकिन वित्त वर्ष 2021 की दूसरी तिमाही आते-आते यह सिकुड़कर - 22.1 फीसदी रह गई।

आसान भाषा में कहे तो सरकार पहले से कम पैसा अर्थव्यवस्था में लगा रही है। आर्थिक जानकरों की मानें तो सरकार को इस वक्त ज्यादा से ज्यादा पैसा खर्च करना चाहिए ताकि लोगों की क्रय शक्ति बढ़े जो आर्थिक चक्का घुमाने के लिए ज़रूरी है। लेकिन सरकार की समस्या ये है कि उसका ख़ज़ाना खाली है।

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