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'किसान का वार, एनडीए में दरार' सांसद हनुमान की धमकी के बाद दुष्यंत पर बढ़ा दबाव

by GoNews Desk 5 months ago Views 1585

माना जा रहा है की जाट नेता हनुमान बेनीवाल की इस धमकी के बाद हरियाणा में बीजेपी की सहयोगी जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला पर एनडीए छोड़ने का दबाब बढ़ेगा।

'KIsan ka waar, NDA me Darar', pressure increased
कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ जारी किसान आंदोलन केंद्र सरकार के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। इस गंभीर मुद्दे पर विपक्ष के साथ-साथ अपने भी हमलावर रुख अपना रहे हैं। केंद्र सरकार में शामिल शिरोमणि अकाली दल पहले ही उसका साथ छोड़ चूका है और अब राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और सांसद हनुमान बेनीवाल ने एनडीए छोड़ने की धमकी दी है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग की है और सरकार की मंशा पर सवाल उठाए है।

राजस्थान के नागौर लोकसभा सीट से सांसद हनुमान बेनीवाल ने ट्विटर पर एक चिट्ठी सांझा करते हुए लिखा है - अमित शाह जी, देश में चल रहे किसान आंदोलन की भावना को देखते हुए हाल ही में कृषि संबंधित तीनो क़ानूनों को तत्काल वापस ले व स्वामीनाथन आयोग की संपूर्ण सिफारिशों को लागू करें व किसानों को दिल्ली में त्वरित वार्ता के लिए उनकी मंशा के अनुरूप उचित स्थान दिया जाए।


हनुमान बेनीवाल ने एक और ट्वीट में कहा- चूंकि आरएलपी एनडीए का घटक दल है, परन्तु आरएलपी की ताकत किसान व जवान है इसलिए अगर इस मामले में त्वरित कार्यवाही नही की गई तो मुझे किसान हित मे एनडीए का सहयोगी दल बने रहने के विषय पर पुनर्विचार करना पड़ेगा !

हालाँकि, आरएलपी कोई पहला एनडीए का घातक दल नहीं है जिसने कृषि क़ानूनों के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका है। इससे पहले इसी मुद्दे पर बीजेपी की सबसे पुरानी सहयोगियों में शामिल रही शिरोमणि अकाली दल भी सितंबर महीने के अंत में एनडीए से किनारा कर चुका है। माना जा रहा है की जाट नेता हनुमान बेनीवाल की इस धमकी के बाद हरियाणा में बीजेपी की एक और सहयोगी जननायक जनता पार्टी के नेता दुष्यंत चौटाला पर एनडीए छोड़ने का दबाब बढ़ेगा।

इसके अलावा कांग्रेस समेत लगभग सभी दल किसानों के समर्थन में हैं और बीजेपी राजनीतिक रूप से किसानों के मुद्दे पर अलग-थलग पड़ती नज़र आ रही है। जहां एक मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह लगातार किसानों के मुद्दे पर मुखर रहे, वहीं पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी भी रोज़ाना इस मुद्दे पर ट्वीट कर रहे हैं।

कांग्रेस ही नहीं, वामपंथी दल भी पूरी ताक़त से इस आंदोलन में शामिल हैं। वामपंथी दलों से जुड़े किसान संगठन तो इस आंदोलन के योजनाकारों में भी हैं। उधर, दिल्ली में सरकार चला रही आम आदमी पार्टी भी पंजाब से लेकर दिल्ली तक किसानों का समर्थन कर रही है।

समाजवादी पार्टी से लेकर राष्ट्रीय जनता दल भी किसानों के साथ हैं। तमाम अन्य क्षेत्रीय दल भी किसानों के मुद्दे को सही बता रहे हैं। ग़ौर से देखा जाये बीजेपी इस मुद्दे पर अलग-थलग पड़ती लग रही है। ख़ासतौर पर जब उससे जुड़े भारतीय किसान संघ ने भी किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया है।

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