तालिबान के प्रमुख नेताओं को जानिए...

by M. Nuruddin 10 months ago Views 1716

key leaders of the Taliban- Here Is The Details
तालिबान ने 20 साल की लंबी लड़ाई के बाद काबुल को अपने नियंत्रण में ले लिया है। तालिबान लड़ाकों ने हथियार के साथ प्रेज़िडेंशियल पैलेस में भी घुसपैठ किया। तालिबान नेताओं का कहना है कि वे अफग़ान सरकार से शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण चाहते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ तालाबिन के मुल्ला बरादर या हैबतुल्लाह अखुंदज़ादा को अंतरिम सरकार की सत्ता सौंपी जा सकती है।

काबुल पर नियंत्रण के बाद तालिबान नेताओं का कहना है कि वे अफ़ग़ानिस्तान को इस्लामिक अमिरात घोषित करेंगे। इस रिपोर्ट में हम देखेंगे की तालिबान पर किसका नियंत्रण है और इसके प्रमुख नेता कौन हैं। ग़ौर करने वाली बात यह है कि 1996 से 2001 के बीच जब अफ़ग़ानिस्तान में तालिबानियों की सरकार थी तबसे ही तालिबान आंदोलन के आंतरिक कामकाज और इसके नेतृत्व को काफी हद तक गुप्त रखा गया।


जैसा की कट्टरपंथी संगठन सत्ता हासिल करने की कगार पर है, उसके नेतृत्व के बारे में बहुत कम ही जानकारियां पब्लिक डोमेन में है।

हैबतुल्लाह अखुंदज़ादा

तालिबान आंदोलन के सुप्रीम लीडर हैं हैबतुल्लाह अखुंदज़ादा। इन्हें एक अमेरिकी ड्रोन हमले में मुल्ला मंसूर अख़्तर की मौत के बाद साल 2016 में सुप्रीम लीडर बनाया गया था।

हैबतुल्लाह अखुंदज़ादा आंदोलन के टॉप लीडर बनाए जाने से पहले एक लो-प्रोफाइल धार्मिक आदमी थे। यह माना जाता है कि उन्हें एक सैन्य कमांडर की तुलना में एक आध्यात्मिक व्यक्ति के रूप में सेवा करने के लिए चुना गया था।

सुप्रीम नेता नियुक्त होने के बाद अखुंदज़ादा ने अल कायदा प्रमुख अयमान अल-जवाहिरी से वफादारी की प्रतिज्ञा हासिल की। रिपोर्ट के मुताबिक़ अल क़ायदा प्रमुख ने उन्हें ‘वफादारों का अमीर’ बताया था। इन्होंने संगठन के लंबे समय के सहयोगियों के साथ उसकी जिहादी साख को सील करने में मदद की।

मुल्ला बरादर

मुल्ला अब्दुल ग़नी बरादर कांधार के रहने वाले हैं और तालिबान के संस्थापकों में एक हैं। कांधार ही वो जगह है जहां से तालिबान आंदोलन की शुरुआत हुई थी। कहा जाता है कि अधिकांश अफ़गानों की तरह, मुल्ला बरादर का जीवन 1970 के दशक के अंत में देश पर सोवियत आक्रमण के बाद हमेशा के लिए बदल गया और वो एक विद्रोही बन गया।

माना जाता है कि उसने एक आंख वाले मौलवी मुल्ला उमर के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी। दोनों ने 1990 के दशक की शुरुआत में गृहयुद्ध की अराजकता और भ्रष्टाचार के बीच तालिबान आंदोलन की नींव रखी। बाद में इस कट्टरपंथी संगठन ने सत्ता भी हासिल की लेकिन साल 2001 में तालिबान का पतन हो गया।

बाद में साल 2010 में मुल्ला बरादर को पाकिस्तान से गिरफ़्तार कर लिया गया था और वो साल 2018 में अमेरिका के दबाव के बाद रिहा किए गए और वो क़तर चले गए जहां तालिबान का पॉलिटिकल ऑफिस स्थित है और वो इसके प्रमुख हैं।

सिराजुद्दीन हक्कानी

सिराजुद्दीन हक्कानी यानि हक्कानी नेटवर्क- सोवियत विरोधी जिहाद के प्रमुख रहे कमांडर जलालुद्दीन हक्कानी के बेटें हैं। सिराजुद्दीन तालिबान आंदोलन के दोनों उप नेता के तुलना में दोगुने हैं और वो शक्तिशाली हक्कानी नेटवर्क का नेतृत्व भी करते हैं।

हक्कानी नेटवर्क एक अमेरिकी नामित आतंकवादी संगठन है जिसे पिछले दो दशकों के दौरान अफगानिस्तान में अफगान और अमेरिका के नेतृत्व वाली नाटो सेना से लड़ने वाले सबसे खतरनाक गुटों में से एक के रूप में देखा जाता है। यह संगठन आत्मघाती हमलावरों के इस्तेमाल के लिए कुख्यात है और माना जाता है कि काबुल में पिछले दो सालों में सबसे हाई प्रोफाइल हमलों में कुछ को अंजाम दिया है।

हक्कानी नेटवर्क पर शीर्ष अफगान अधिकारियों की हत्या करने और फिरौती के लिए अपहृत पश्चिमी नागरिकों को पकड़ने का भी आरोप लगाया गया है - जिसमें 2014 में रिलीज़ किए गए अमेरिकी सैनिक बोवे बर्गडाहल भी शामिल है। माना जाता है कि हक्कानियों को उनकी स्वतंत्रता, लड़ाई कौशल और सामान्य व्यापारिक सौदों के लिए जाना जाता है।

मुल्ला याकूब

मुल्ला याकूब, तालिबान के संस्थापक रहे मुल्ला उमर के बेटे हैं। वो समूह के शक्तिशाली सैन्य आयोग का नेतृत्व करता है, जो युद्ध में उग्रवाद के रणनीतिक अभियानों को अंजाम देने और फील्ड कमांडरों के एक विशाल नेटवर्क की देखरेख करता है।

हालाँकि, आंदोलन के भीतर याकूब की सटीक भूमिका के बारे में अटकलें व्याप्त हैं, कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि 2020 में भूमिका के लिए उनकी नियुक्ति सिर्फ दिखावटी थी।

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