Karnataka: भाजपा विधायक के कहने पर मुस्लिम छात्राओं को हिजाब लगाने से रोका गया ?

by M. Nuruddin 4 months ago Views 2230

Karnataka: Muslim girl students were stopped from
कर्नाटक के सरकार द्वारा संचालित कॉलेज में हिजाब पहने मुस्लिम छात्राओं को क्लास में प्रवेश नहीं दिए जाने का एक और मामला सामने आया है। ताज़ा मामला उडुपी ज़िले के कुंडापुर सरकारी कॉलेज का है, जहां बुधवार को कुछ मुस्लिम छात्रा हिजाब लगाकर कॉलेज पहुंचीं। रिपोर्ट के मुताबिक़ भगवाधारी हिंदू छात्रों ने मुस्लिम छात्राओं से नारेबाज़ी करते हुए हिजाब उतारने को कहा।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ 27 मुस्लिम छात्रा हिजाब पहनकर लंबे समय से कॉलेज आ रही थीं जिन्हें कभी नहीं रोका गया। छात्राओं का कहना है कि अब परीक्षा होने में दो महीने बचे हैं जिस बीच मामला सामना आ खड़ा है।


हैरान करने वाली बात यह है कि कथित तौर पर स्थानीय बीजेपी विधायक Haladay Srinivas Shetty ने भगवाधारी छात्रों को फटकारने की बजाय मुस्लिम छात्राओं से ही बिना हिजाब के कॉलेज आने की सलाह दी। हालांकि छात्राएं इस बात से राज़ी नहीं है और उनका कहना है कि वे हिजाब में ही कॉलेज आना चाहती हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कॉलेज के मुख्य द्वार के बाहर प्रवेश के इंतज़ार में खड़ी छात्राओं को कॉलेज के प्रिंसिपल रामकृष्ण ख़ुद भी आकर उन्हें बिना हिजाब के कॉलेज आने की सलाह दे रहे हैं। छात्राओं की दलील है कि कॉलेज आने को लेकर इस तरह के कोई नियम नहीं है, ऐसे में उन्हें बिना हिजाब के कॉलेज आने के लिए क्यों कहा जा रहा है ?

इंडिया डॉट कॉम के मुताबिक़ प्रिंसिपल रामकृष्ण ने छात्राओं से कहा कि वो उन्हें उनकी शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं कर रहे हैं, लेकिन वो कॉलेज डेवलपमेंट कमेटी के अध्यक्ष, कुंडापुर विधायक हलदी श्रीनिवास शेट्टी के निर्देश पर काम कर रहे थे।

प्रिंसिपल ने कहा कि भाजपा विधायक शेट्टी ने उन्हें निर्देश दिया था कि वे यूनिफॉर्म के अलावा किसी अन्य पोशाक में छात्राओं को क्लास में प्रवेश न दें।

इसी तरह, शिवमोग्गा ज़िले के भद्रावती में एम विश्वेश्वरैया गवर्नमेंट आर्ट्स एंड कॉमर्स कॉलेज में, कुछ हिंदू छात्रों ने बुधवार को मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने का विरोध करते हुए भगवा शॉल में क्लास अटेंड किया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने मांग की है कि अगर हिजाब और बुर्का की अनुमति है, तो कक्षाओं में भगवा शॉल भी ले जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।

हालांकि देश के किसी भी कॉलेज या स्कूल से कथित रूप से इस तरह का मामला सामने नहीं आया है जहां छात्रों को भगवा शॉल में क्लास में प्रवेश न दिया गया हो।

इससे पहले उडुपी ज़िले के ही एक प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेज में छात्राओं को हिजाब में क्लास में प्रवेश से मना कर दिया गया था। तब पांच छात्राएं एक हफ्ते तक क्लास अटेंड करने से वंचित रहीं। ड्रेस कोड को लेकर कक्षा में नहीं जाने के अलावा, छात्राओं ने यह भी शिकायत की है कि उन्हें उर्दू, अरबी और बेरी भाषाओं में बात करने की भी अनुमति नहीं दी जा रही है।

छात्राओं का दावा है कि हालांकि उनके माता-पिता ने बातचीत के लिए प्रिंसिपल रुद्र गौड़ा से संपर्क किया, लेकिन उन्होंने इस मुद्दे पर चर्चा करने से इनकार कर दिया।

एक छात्रा ने मीडिया को बताया, "हमें अपने माता-पिता को कॉलेज लाने के लिए कहा गया था, लेकिन जब वे पहुंचे, तो स्कूल के अधिकारियों ने उन्हें तीन से चार घंटे तक इंतज़ार कराया।" एक अन्य छात्रा ने कहा, "हिजाब पहनने से पहले सब कुछ ठीक था, लेकिन अब हमारे साथ इस तरह से भेदभाव किया जा रहा है।"

इस मामले में एक छात्रा ने 31 जनवरी को कर्नाटक हाई कोर्ट में एक याचिका भी दायर की है जिसमें कॉलेज को यह निर्देश जिए जाने की मांग की गई है कि मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने का आधिकार है।

रहमान फारूक़ द्वारा दायर रिट याचिका में तर्क दिया गया है कि हिजाब पहनना लड़कियों की आवश्यक धार्मिक प्रथाओं का हिस्सा है, और उन्हें कॉलेज में प्रवेश करने से इनकार करना, अनुच्छेद 25 के तहत अपने धर्म का पालन करने के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही अनुच्छेद 14 (समान व्यवहार का अधिकार) देता है।

याचिका में आगे तर्क दिया गया है कि इन मौलिक अधिकारों की रक्षा करना राज्य सरकार का कर्तव्य है, और कॉलेज प्रशासन की कार्रवाई असंवैधानिक और मनमानी है।

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