Karnataka Anti-Hijab Protest, Revealed: हिन्दू संगठनों का सुनियोजित विरोध-प्रदर्शन !

by M. Nuruddin 4 months ago Views 1624

विरोध-प्रदर्शन हिन्दू संगठनों द्वारा आयोजित किए गए थे... सभी ज़िलों के कॉलेज में हुए विरोध-प्रदर्शन में एक ही "जय श्री राम" के नारे लगाए जा रहे थे...

Karnataka Hijab Ban : Organized protests by Hindu
कर्नाटक के कॉलेज में हिजाब के साथ मुस्लिम छात्राओं को प्रवेश नहीं दिए जाने के मामले पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने तीन दिन सुनवाई की। गुरुवार, 10 फरवरी की सुनवाई में हाई कोर्ट ने अपना कड़ा रुख़ अपनाया और याचिकाकर्ता के वकीलों की छात्राओं को अंतरिम राहत दिए जाने की मांग ख़ारिज कर दी।

वकीलों की दलील थी की छात्राओं की परीक्षा में सिर्फ दो महीने बचे हैं, ऐसे में उन्हें फैसला आने तक राहत मिलनी चाहिए। 


हाई कोर्ट ने गुरुवार की सुनवाई के बाद कर्नाटक सरकार से शिक्षण संस्थानों खोलने के निर्देश दिए और मामले की सुनवाई कर रहीं हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रितु अवस्थी ने कहा कि कॉलेज में यूनिफॉर्म के अलावा कोई अन्य पोशाक पहनने की इजाज़त नहीं होगी।

चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि “हम इस मुद्दे पर जल्द से जल्द फैसला करने के लिए तैयार हैं, लेकिन हमें लगता है कि शांति बहाल होनी चाहिए। फ़ैसला आने तक आप इन धार्मिक कपड़ों को पहनने के लिए ज़िद न करें जो कि अनुकूल नहीं हैं।”

उन्होंने कहा, “हम एक आदेश पारित करेंगे, कि संस्थानों को फिर से शुरु किया जाए, लेकिन जब तक मामला यहां लंबित है, कोई भी (छात्र-छात्रा) धार्मिक पोशाक पहनने पर ज़ोर नहीं दे सकते हैं।”

इसपर याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत ने कहा, “यह हमारे अधिकारों का निलंबन होगा। यह उनके अधिकारों का घोर अपमान होगा। हमें भोजन और पानी के बीच चयन करने के लिए कहा गया है और दोनों आवश्यक हैं।”

याचिकाकर्ता के वकील के तर्क पर चीफ जस्टिस ने कहा, “कुछ दिनों की बात है, कृपया सहयोग करें।” वहीं इसपर एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील संजय हेगड़े ने कहा कि, “कुछ दिनों के लिए ही सही हमें अपने विश्वास को निलंबित करने के लिए नहीं कहा जा सकता।” 

कर्नाटक सरकार ने राज्य के कुछ ज़िले में हिन्दू संगठनों और भगवाधारी छात्र-छात्राओं द्वारा कथित रूप से सुनियोजित विरोध-प्रदर्शन किए जाने के बाद राज्य में हायर शिक्षण संस्थान को तीन दिनों के लिए बंद करने का ऐलान किया था, जिसे फिर से खोलने पर सरकार विचार कर रही है।

हिजाब बैन के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में याचिका !

ग़ौरतलब है कि 31 जनवरी 2022 को कुछ मुस्लिम छात्राएं अपने संबंधित कॉलेज में हिजाब को बैन किए जाने के विरोध में कर्नाटक हाई कोर्ट पहुंच गई थीं। छात्राओं की मांग की थी कि कोर्ट यह आदेश जारी करे कि हिजाब पहनना मुस्लिम छात्राओं का अधिकार है।

याचिका में तर्क दिया गया कि हिजाब पहनना लड़कियों की आवश्यक धार्मिक प्रथाओं का हिस्सा है, और उन्हें कॉलेज में प्रवेश करने से इनकार करना, अनुच्छेद 25 के तहत अपने धर्म का पालन करने के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। साथ ही अनुच्छेद 14 (समान व्यवहार का अधिकार) देता है।

6 जनवरी तक मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने को लेकर भगवाधारी युवकों ने दो बार विरोध-प्रदर्शन किया था। यह विरोध-प्रदर्शन मंगलुरू के एकला के एक कॉलेज में और दूसरा चिकमंगलूर के एक कॉलेज में हुए थे। 

चिकमंगलूर के कॉलेज में तब से लेकर अब तक विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं, लेकिन मामला तब तक बड़ा नहीं हुआ जब तक कि उडुपी के गवर्नमेंट पीयू कॉलेज फॉर गर्ल्स की लड़कियां अपने अधिकारों की मांग को लेकर कोर्ट नहीं गईं। अब कोर्ट ने तीन दिनों की सुनवाई के बाद मामले को 14 फरवरी के लिए टाल दिया है। 

भगवाधारी छात्र-छात्राओं का परेड !

मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने के विरोध में हिन्दू छात्र-छात्राएं कथित तौर पर सुनियोजित रूप से भगवा गमछा और शॉल पहनकर कॉलेज पहुंचे और छात्राओं के हिजाब पहनने का विरोध किया। रिपोर्ट के मुताबिक़ भगवाधारी छात्र-छात्राओं ने भगवा गमछे के साथ कक्षा में प्रवेश की इजाज़त मांग रहे थे।

सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में देखा जा सकता है कि किस तरह से भगवाधारी छात्र कक्षा में प्रवेश कर रहे हैं। इस बीच कर्नाटक के अन्य ज़िलों उडुपी, सागर, शिवमोगा में बड़े स्तर पर सुनियोजित रूप से "जय श्री राम" के नारे और भगवा झण्डों के साथ प्रदर्शन हुए।

इस बीच सोशल मीडिया पर मांड्या के पीईएस कॉलेज का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें भगवा शॉल पहने कुछ लड़के बुर्का पहनी एक मुस्लिम छात्रा को परेशान करते और ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हुए पीछा करते देखा जा सकता है।

शिवमोग्गा ज़िले के बापूजीनगर इलाके के एक कॉलेज में भगवाधारी छात्रों के फ्लैगपोल पर चढ़कर भगवा झण्डा फहराने का भी एक वीडियो वायरल हुआ जिसकी सोशल मीडिया पर काफी आलोचना हुई। हालांकि यह बता दें कि फ्लैगपोल में कॉलेज के प्रिंसिपल के मुताबिक़ तिरंगा नहीं लगा था।

Bagalkot और Banhatti ज़िलों में हिजाब समर्थक और भगवाधारी प्रदर्शनकारियों के बीच पत्थरबाज़ी की भी घटना सामने आई। कथित रूप से प्रदर्शनकारियों को अलग करने के लिए पुलिस ने लाठियां भी बरसाई, जिसमें कुछ लोगों के घायल होने की भी ख़बर आई। 

हिजाब के ख़िलाफ़ सुनियोजित विरोध-प्रदर्शन !

8 फरवरी तक मुस्लिम छात्राओं के हिजाब पहनने का विरोध सुनियोजित रूप से 25 कॉलेजों में फैल गया। यह विरोध-प्रदर्शन हिन्दू संगठनों द्वारा आयोजित किए गए थे। सभी ज़िलों के कॉलेज में हुए विरोध-प्रदर्शन में एक ही "जय श्री राम" के नारे लगाए जा रहे थे।

दक्षिण भारत पर नज़र रखने वाली एक मीडिया ऑर्गेनाइज़ेशन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि विरोध-प्रदर्शन हिन्दू जागरण वैदिक, बजरंग दल और हिन्दू जनजागृति समिति जैसे कुछ हिंदुत्व संगठनों ने आयोजित किया था।

विरोध-प्रदर्शन के लिए व्हॉट्सएप ग्रुप का इस्तेमाल किया गया था। श्री राम सेना नाम के एक संगठन ने सबसे पहले विरोध-प्रदर्शन की शुरुआत की थी और कॉलेज ऑथोरिटी से हिन्दू छात्रों को भगवा शॉल लगाकर कक्षा में प्रवेश की इजाज़त मांगी थी।

यह भी कहा जा रहा है कि दक्षिणपंथी छात्र संगठन एबीवीपी ने विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा नहीं था और संगठन ने दोनों समुदाय के छात्रा-छात्राओं को यूनिफॉर्म पहनने की हिदायत दी थी।

हिजाब के समर्थन में प्रदर्शन !

जहां एक तरफ हिन्दू संगठनों ने विरोध-प्रदर्शन का आयोजन किया वहीं मुस्लिम संगठनों ने भी हिजाब के समर्थन में प्रदर्शन किए। राज्य के कुछ ज़िलों से ऐसे छिटपुट प्रदर्शन की ख़बरें आई हैं। 

बेंगलुरू, मंगलुरु, मैसूर, चिकमगलूर, चामराजनगर, हुबली, मांड्या, बेलगावी, चित्रदुर्ग, विजयपुरा और कलबुर्गी जैसे ज़िलों के कॉलेजों में हिजाब प्रतिबंध के ख़िलाफ़ मुसलमानों, विशेष रूप से समुदाय की महिलाओं ने प्रदर्शन किया।

कुछ विरोध प्रदर्शनों में छात्र संघ (एसएफआई) और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) जैसे राजनीतिक संगठनों के सदस्यों ने हिस्सा लिया और आयोजित किया। इनके अलावा कुछ अन्य राज्यों से भी हिजाब के समर्थन में मुस्लिम महिलाओं के प्रदर्शन की ख़बरें सामने आई।

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