Pegasus मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने बनाई स्वतंत्र कमेटी, केन्द्र को फटकार

by GoNews Desk 8 months ago Views 2025

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, "न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए”

"Justice should not be done, it should be seen to
सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस जासूसी मामले पर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट में सीजेआई एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने अपने फैसले में एक स्वतंत्र जांच कमेटी स्थापित की है। सीजेआई ने फैसला सुनाते हुए कहा कि, “निजता का अधिकार प्रभावित होने का आरोप है, पूरी नागरिकता प्रभावित है। केन्द्र सरकार ने कोई स्पष्ट रुख नहीं लिया। कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निजता सभी नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। सीजेआई एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि “कुछ याचिकाकर्ता सीधे तौर पर इस मामले का शिकार हैं और कुछ जनहित याचिकाकर्ता हैं। सीजेआई ने जॉर्ज ऑरवेल (1984) के हवाले से कहा, “अगर आप कुछ सीक्रेट रखना चाहते हैं, तो आपको इसे अपने आप से भी छिपाना होगा।"


सुप्रीम कोर्ट ने पेगासस मामले में अपने आदेश में कहा, “लोकतांत्रिक समाज के सदस्यों को गोपनीयता की उचित चिंता है। नागरिकों को निजता के उल्लंघन से बचाने की ज़रूरत है।” लोकतांत्रिक समाज इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिकाकर्ता हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि, “इसे अन्य मौलिक अधिकारों की तरह महसूस करने की आवश्यकता है, कुछ प्रतिबंधों की ज़रूरत है। लेकिन इन प्रतिबंधों की संवैधानिक जांच होनी चाहिए।”

कोर्ट ने आगे कहा, “हम एक कमेटी बनाने जा रहे हैं जो इस मामले की जांच करेगी और कोर्ट को अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।” सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, ‘न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिए बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए।”

Pegasus: सुप्रीम कोर्ट की कमेटी में शामिल ये तीन लोग

कमेटी की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश आरवी रवींद्रन करेंगे। इस कमेटी में 1976 बैच के आईपीएस अधिकारी आलोक जोशी और डॉ. संदीप ओबेरॉय (उप समिति, अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन/अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रो-तकनीकी आयोग/संयुक्त तकनीकी समिति के अध्यक्ष) को भी शामिल किया गया है।

कोर्ट ने कहा कि, “कमेटी मामले की शीघ्र जांच करेगी और 8 सप्ताह में कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।” सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कहा, “पेगासस के संबंध में सभी सूचनाओं का खुलासा करने के लिए केन्द्र को पर्याप्त समय दिया गया था।

हालांकि केन्द्र की तरफ से सिर्फ सीमित हलफनामा दायर किया गया। अगर केन्द्र ने स्पष्ट रुख अपनाया होता तो हम पर बोझ कम पड़ता। केन्द्र को यहां अपने रुख को सही ठहराना चाहिए और अदालत को मूकदर्शक नहीं बनाना चाहिए।

सीजेआई रमन्ना की अगुवाई वाली बेंच ने कहा, “यह अदालत शुरू में समाचार पत्रों की रिपोर्ट के आधार पर रिट याचिकाओं से संतुष्ट नहीं थी। अदालत आमतौर पर समाचार पत्रों की रिपोर्टों के आधार पर जनहित याचिकाओं को नहीं देखती। ऐसा बहुत कम किया जाता है और तब किया जाता है जब  प्रत्यक्ष पीड़ितों द्वारा कई अन्य याचिकाएं दायर की गई हों।

इनके अलावा कोर्ट ने एक टेक्निकल टीम का भी गठन किया है जिनमें तीन तकनीक से जुड़े एक्सपर्ट को शामिल किया गया है। इनमें

  • डॉ नवीन कुमार चौधरी, प्रोफेसर (साइबर सुरक्षा और डिजिटल फोरेंसिक) और डीन, राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय, गांधीनगर, गुजरात।
  • डॉ. प्रभारन पी., प्रोफेसर (इंजीनियरिंग स्कूल), अमृता विश्व विद्यापीठम, अमृतापुरी, केरल।
  • डॉ अश्विन अनिल गुमस्ते, इंस्टीट्यूट चेयर एसोसिएट प्रोफेसर (कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग), इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बॉम्बे, महाराष्ट्र। शामिल हैं।
ग़ौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 13 सितंबर को कहा था कि वह कथित पेगासस जासूसी मामले की स्वतंत्र जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर दो-तीन दिनों में अंतरिम आदेश पारित करेगी।

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