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योगी आदित्यनाथ के ‘लव जिहाद अध्यादेश’ को जस्टिस लोकुर ने बताया असंवैधानिक

by Pankaj Srivastava 5 months ago Views 2151

'एक महिला अपनी मर्ज़ी से धर्म परिवर्तन कर सकती है और अपने पसंद के व्यक्ति से शादी कर सकती है। 'लव जिहाद' का़नून सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की अनदेखी करता है।'

Justice Lokur calls Yogi Adityanath's 'Love Jihad
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मदन बी.लोकुर ने ‘लव जिहाद’ के नाम पर बनाये जा रहे क़ानूनों को असंवैधानिक बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसे क़ानून नागरिक के चुनाव की स्वतंत्रता के ख़िलाफ़ हैं। ग़ौरतलब है कि यूपी में हाल ही में 'लव जिहाद' रोकने के लिए एक अध्यादेश जारी किया है। मध्यप्रदेश समेत अन्य बीजेपी शासित राज्यों में भी ऐसा क़ानून बनाने की तैयारी है।

29 नवंबर को न्यायपालिका और सामाजिक न्याय, गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता- मानव अधिकार और भय " विषय पर आयोजित सातवें सुनील मेमोरियाल भाषण को संबोधित करते हुए जस्टिस लोकुर ने कहा कि यूपी में 'लव जिहाद' को लेकर पारित अध्यादेश दुर्भाग्यपूर्ण है और यह चुनने की आज़ादी, गरिमा और मानवाधिकारों की अनदेखी करता है।


दो धर्म के लोगों की शादी के लिए अलग से क़ानूनी प्रावधान बनाने और अड़चनें खड़ी करने वाला ये क़ानून व्यक्तिगत आज़ादी और गरिमा के ख़िलाफ़ है। उन्होंने कहा-“ बहुत ही सावधानी से निर्मित किया गया गरिमा का न्यायशास्त्र, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने वर्षों की मेहनत से तैयार किया, उसे हाथरस जैसा अंतिम संस्‍कार दिया जा रहा है।"

जस्टिस लोकुर ने कहा, "हालांकि 'लव जिहाद' की कोई परिभाषा नहीं है। एक मुख्यमंत्री ने परिभाषित किया था कि 'जिहादी' असली नाम और पहचान छिपाकर हमारी बहनों और बेटियों के सम्मान और प्रतिष्ठा के साथ खेल रहे हैं। एक अन्य मुख्यमंत्री ने यहां तक कहा था कि अगर ये 'जिहादी' अपने रास्ते नहीं बदलते हैं, तो यह उनकी कब्र की यात्रा की शुरुआत होगी। क्या इस संभवित मौत की सजा को पहले से ही संविधान या कानून के तहत मंजूरी मिल चुकी है? यह मॉब लिंचिंग की प्रवृत्ति का पुनरुत्थान प्रतीत होता है? ... पसंद की आज़ादी के बारे में क्या? .. बाल विवाह के खिलाफ जंग की घोषणा क्यों नहीं की, जोकि परिभाषा अनुसार भी जबरिया विवाह है?",

जस्टिस लोकुर ने 2018 में सामने आये चर्चित हादिया मामले का ज़िक्र भी किया। उन्होंने कहा कि उस फ़ैसले में साफ़ कहा गया था कि एक महिला अपनी मर्ज़ी से धर्म परिवर्तन कर सकती है और अपने पसंद के व्यक्ति से शादी कर सकती है। 'लव जिहाद' का़नून सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की अनदेखी करता है।

ग़ौरतलब है कि यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने हाल ही में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020 पास किया है जिसे राज्यपाल आनंदी पटेल ने भी मंज़ूरी दे दी है। इसके तहत शादी के लिए धर्म परिवर्तन पर सज़ा का प्रावधान है। धर्म परिवर्तन के लिए दो महीने पहले जिलाधिकारी के पास आवेदन देना पड़ेगा और मंज़ूरी मिलने पर ही शादी हो सकेगी। आरोप लगने पर निर्दोष साबित करने का दायित्व उसका होगा जिस पर आरोप लगा है।

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