दक्षिणपंथी के हाथों में JNU; नई वीसी गोड्से की समर्थक, अल्पसंख्यक विरोधी !

by M. Nuruddin 4 months ago Views 1777

अब देखने वाली बात होगी की यूनिवर्सिटी की नई वाइस चांसलर अपने किस एजेंडे के साथ कैंपस चलाती हैं...

JNU in the hands of the right wing; New VC is Gods
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी की कमान अब दक्षिणपंथी हाथों में सौंप दी गई है। नई और पहली महिला वाइस चांसलर की नियुक्ति विवादों में है। शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार को उनकी नियुक्ति का ऐलान किया। नई वाइस चांसलर शांतिश्री धूलिपुड़ी पंडित (Santishree Dhulipudi Pandit) का गोड्से प्रेम सोशल मीडिया पर उभर आया है और उन्हें गोड्से प्रेमी बताया जा रहा है। (Appointment Letter)

59 वर्षीय पंडित भी जेएनयू की पूर्व छात्रा हैं, जहां उन्होंने एमफिल के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी की पढ़ाई की।


शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, जो विश्वविद्यालय के विज़िटर हैं, ने शांतिश्री धूलिपुडी पंडित को जेएनयू के कुलपति (वीसी) के रूप में नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। उनकी नियुक्ति पांच साल की अवधि के लिए है।"

इस ऐलान से पहले महाराष्ट्र के सावित्रीबाई फुले यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर रहीं शांतिश्री पंडित को बीजेपी का बचाव करते भी देखा गया है।

उन्होंने 20 दिसंबर 2020 के अपने एक ट्वीट में लिखा था, “अगर बीजेपी गोड्से की पार्टी है तो वो सभी पार्टियां जो मुसलमानों का समर्थन करती है जैसे टीएमसी एक आतंकवादी और घुसपैठियों की पार्टी है, जिसने बलात्कार किया और हिन्दू धार्मिक स्थलों को बर्बाद किया। वे बंगाल के क़साइयों का समर्थन करते हैं।” (Tweet)

अक्टूबर 2019 में उन्होंने कांग्रेस पार्टी को लेकर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, “गोड्से- यासीन मलिक, गिलानी जैसे आतंकवादियों और हत्यारों से बेहतर है और वे सभी जिन्हें कांग्रेस पार्टी समर्थन करती है, उन सभी से।” जेएनयू की नई वाइस चांसलर का गोड्से प्रेम उनके लगभग ट्वीट में देखे जा सकता है।

उन्होंने कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के पिता को लेकर कहा, “सोनिया के पिता मुसोलिनी को समर्थन करते थे और यह सही है। औरंगज़ेब, टीपू सुल्तान जैसे सामूहिक हत्यारों के बारे में क्या ख़्याल है ? गोड्से ने सिर्फ एक आदमी को मारा, क्या उन्होंने सामूहिक हत्याएं की या उन्होंने नरसंहार किया ?”

नई वाइस चांसलर की किसान विरोधी मानसिकता भी सोशल मीडिया पर देखी जा सकती है। उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान 22 मई 2021 को एक ट्वीट को रीट्वीट करते हुए किसानों को “लीचड़” बताया और राकेश टिकैत को “झूठा और एक हारा हुआ इंसान” बताया था। (Tweet)

विवादित वाइस चांसलर यह भी कह चुकी हैं कि “आईआईटी बैंग्लोर और जेएनयू आपके लिए असली जिहादी उत्पादित कर सकते हैं।” उन्होंने यह बात एएनआई द्वारा सूत्रों के हवाले से दी गई ख़बर पर कही थी जिसमें बताया गया था कि कथित रूप से “जांच से पता चला है कि शरजील इमाम बहुत ही कट्टरवादी है और वो यह विश्वास करता है कि भारत को एक इस्लामिक स्टेट होना चाहिए।” (Tweet)

इतना ही नहीं नाइस वीसी का जेएनयू के प्रति भी कड़ा रुख़ रहा है। उन्होंने जनवरी 2020 में जेएनयू कैंपस में हुई हिंसा के बाद 11 जनवरी 2020 को अपने एक ट्वीट में कहा, “जेएनयू के लूज़र ने अपना कंट्रोल खो दिया है। इन कट्टरवादी नक्सल ग्रुप को कैंपस से बैन करो। जामिया और सेंट स्टीफेंस जैसे सांप्रादायिक कैंपस को फंडिंग देना बंद करो।” (Tweet)

अबतक एम. जगदीश कुमार, जो पिछले साल अपना पांच साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद जेएनयू में कार्यवाहक वीसी का प्रभार संभाल रहे थे, उन्हें पिछले सप्ताह यूजीसी के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था।

जेएनयू के पूर्व वीसी का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है। उनके कार्यकाल में कैंपस में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। उन्हीं के कार्यकाल में जनवरी 2020 में बड़े स्तर पर कैंपस में हिंसाएं हुई हैं।

5 जनवरी, 2020 को, लगभग 50 नकाबपोश पुरुषों और महिलाओं ने छड़ और हथौड़ों से लैस होकर, जेएनयू परिसर में छात्र-छात्राओं पर हमला किया था और पुलिस के हस्तक्षेप करने से पहले कई घंटों तक होस्टल और अन्य इमारतों में तोड़फोड़ की थी।

अगस्त 2021 में हिंसा के डेढ़ साल बाद गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बताया था कि हमला करने वाले लोगों में किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई थी। अब देखने वाली बात होगी की यूनिवर्सिटी की नई वाइस चांसलर अपने किस एजेंडे के साथ कैंपस चलाती हैं।

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