झारखंड: अफवाह, चोरी और शक के आधार पर लिंचिंग, कई की मौत

by GoNews Desk 8 months ago Views 3493

लिंचिंग की कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिसमें शख्स को धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया...

Jharkhand: lynching based on rumor, theft and susp
देश का पूर्वी राज्य झारखंड, मानो मॉब लिंचिंग का हब बन गया है। पिछले दिनों कई ऐसी घटनाएं सामने आई जिसमें भीड़ ने पीट-पीटकर कई लोगों की हत्या कर दी है। ताज़ा मामला सिंघूभूम के चाईबसा का है जहां ग्रामीणों ने 22 वर्षीय एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी। शख़्स की पहचान रसिका लागुरी के नाम से हुई है जो 29 मार्च को अपने घर से बाहर निकला था लेकिन भीड़ के भेंट चढ़ गया।

झारखंड पुलिस के मुताबिक़ रसिका की हत्या चोरी के शक में की गई। रसिका लागुरी गाड़ी चलाने का काम करता था। रसिका की पत्नी पार्वती का कहना है कि उनके पति और आरोपियों के बीच विवाद हुआ था। पार्वती कहती हैं कि गांव में ही रहने वाले एक राम लागुरी नाम के शख्स के बागीचे से मोटर चोरी हो गई जिसका आरोप उनके पति पर ही मढ़ा गया। बाद में जब वो घर से बाहर निकला तो लोगों ने उसे घेर लिया और पीटना शुरु कर दिया। ग्रामीणों ने शख्स को इतना पीटा की उसकी मौत हो गई।


झारखंड में झूठ, अफवाह और चोरी के आरोप में अबतक कइयों पर हमले हुए हें जिसमें कई लोगों की मौत हो गई। अगर पिछले महीने मार्च की बात करें तो अलग-अलग दो घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई। 14 मार्च को रांची के थनगाड़ा थाना क्षेत्र में हुई लिंचिंग की घटना में मुबारक नाम के एक युवक की हत्या कर दी गई। मुबारक को चोरी के आरोप में लोगों के एक समूंह ने इतना पीटा कि उसकी मौत हो गई। मृतक के शव के पास बाइक के कुछ स्पेयर पार्ट्स मिले थे। इस मामले को लेकर मृतक के भाई ने पुलिस में शिकायत की जिसमें उन्होंने किसी साज़िश के तहत हत्या का आरोप लगाया है।

इससे पहले 8 मार्च को रांची के ही कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई लिंचिंग की घटना में एक 22 वर्षीय सचिन की मौत हो गई। घटना कोतवाली थाना क्षेत्र के अपर बाज़ार इलाक़े की है जहां सचिन को कुछ मज़दूरों ने चोरी के शक में पकड़ लिया और रातभर उसकी पिटाई की। इतना ही नहीं उसके शरीर को गर्म रॉड से ज़ख्मी कर दिया। अधमरी हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उसकी मौत हो गई।

राज्य में इस तरह की कई ऐसी घटनाएं हुईं जिसने क़ानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। राज्य में हेमेंत सोरेन की सरकार में साल 2019 के दौरान कम से कम 40 लिंचिंग की वारदात सामने आई। इनमें ज़्यादातर वारदात चोरी या शक के आधार पर ही हुई। इससे निपटने के लिए झारखंड पुलिस ने एक स्पेशल टीम का गठन किया है।

इनके अलावा लिंचिंग की कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिसमें शख्स को धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया। झारखंड में लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एक समूह ‘झारखंड जनाधिकार महासभा’ का दावा है कि राज्य में साल 2016 से 2020 के बीच मुस्लिम, आदिवासी और आदिवासी ईसाई समुदाय से संबंध रखने वाले 29 लोगों को गाय काटने, बीफ बेचने और उसे खाने की वजह से निशाना बनाया गया। इनमें कम से कम 10 घटनाएं मौजूदा जेएमएम गठबंधन सरकार के दौरान हुई।

‘झारखंड जनाधिकार महासभा’ का कहना है, ‘हमने 29 ऐसे लोगों की सूची तैयार की है जिन पर हिंदुत्व विचारधारा का समर्थन करने वाली भीड़ ने हमला किया था।’ बीते साल 16 सितंबर को रांची के सिमदेगा के एक गांव में आदिवासी ईसाई समुदाय से संबंध रखने वाले सात लोगों की भीड़ ने पीटाई की थी और इन लोगों से कथित तौर पर ‘जय श्री राम’ के नारे लगवाए गए थे।

ज़ाहिर है आए दिन हो रही लिंचिंग की घटनाओं ने राज्य में क़ानून व्यवस्था की स्थिति की पोल खोल दी है। ऐसे में राज्य सरकार को इससे निपटने के लिए ठोस कदम उठाने और पुलिस-प्रशासन को चौकन्ना रहने की ज़रूत है।

ताज़ा वीडियो