नेफ्टाली बेनेट, आठ दलों के गठबंधन से बने इज़रायल के प्रधानमंत्री

by M. Nuruddin 1 month ago Views 2348

Yair Lapid को अल्टरनेट प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री बनाया गया है, जो अगर सरकार में सबकुछ ठीक रहा तो साल 2023 में समझौते के मुताबिक़ प्रधानमंत्री बनेंगे...

Israel’s Parliament Approves New Government, Ousti
इज़रायल में नई सरकार का गठन हो गया है। 'डिवाइडर' बेन्यामिन नेतन्याहू को 12 साल बाद सत्ता से बाहर होना पड़ा। नई सरकार के प्रधानमंत्री यामिना पार्टी के नेफ़्टाली बेनेट को चुना गया है। यह सरकार आठ लेफ्ट विंग, सेंट्रिस्ट, राइट विंग और अरब पार्टियों के गठबंधन से बनी है।  

हालांकि नेतन्याहू ने आख़िरी समय तक उम्मीद नहीं छोड़ी थी, इसका अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि विपक्षी गठबंधन को 60 प्रतिनिधियों का समर्थन मिला जबकि नेतन्याहू को 59 प्रतिनिधियों का। नेतन्याहू राइट विंग लिकुड पार्टी के प्रमुख के पद पर बरक़रार हैं और वो अब इज़रायली संसद में नेता प्रतिपक्ष की भूमिक में होंगे।


ग़ौरतलब है कि इज़रायली चुनाव में किसी भी दल को बहुमत नहीं मिली थी। ऐसे में यह पहले ही तय हो गया था कि कोई भी सरकार गठबंधन की ही बनेगी। इस बीच यामिना के नेफ्टाली बेनेट सरकार बनाने में किंगमेकर की भूमिका में थे। यह चुनाव के बाद ही साफ हो गया था कि किसी भी सरकार का गठन नेफ्टाली के बिना मुमकिन नहीं थी। 

अगर 31 मार्च के चुनावी नतीज़े देखें तो नेफ्टाली की यामिना पार्टी को चुनाव में सात सीटें मिली थी और पार्टी को 6.21 फीसदी वोट मिले थे। जबकि इसके गठबंधन दल येश अतिद को 17 सीटें मिली थी और पार्टी का वोट शेयर करीब 14 फीसदी रहा। सरकार में सेंट्रिस्ट येश अतिद पार्टी के नेता Yair Lapid को अल्टरनेट प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री बनाया गया है, जो अगर सरकार में सबकुछ ठीक रहा तो साल 2023 में समझौते के मुताबिक़ प्रधानमंत्री बनेंगे। 

नेफ्टाली बेनेट को बेन्यामिन नेतन्याहू और विपक्षी नेता येर लेपिड के साथ सरकार बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन नेफ्टाली ने येर लेपिड के साथ जाना बेहतर समझा और प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। हालांकि अगर विचार के मुद्दे की बात करें तो दोनों में विचारधारा के स्तर पर काफी दूरियां है।

इज़रायली संसद के नए कैबिनेट की बात करें तो नेफ्टाली बेनेट के प्रधानमंत्री और येश अतिद पार्टी के अल्टरनेट प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री बनाए जाने के अलावा दो अलग-अलग पार्टी के नेता डिप्टी प्राइम मिनिस्टर भी बनाए गए हैं। जिनमें चुनाव में आठ सीटें जीतने वाली ब्लू एंड व्हाइट पार्टी के Benny Gantz को डिप्टी पीएम के साथ डिफेंस मंत्रालय और छह सीटें जीतने वाली न्यू होप पार्टी के Gideon Sa'ar को डिप्टी पीएम के साथ क़ानून मंत्रालय दिया गया है। 

नए प्रधानमंत्री नेफ्टाली बेनेट कौन हैं ?

नेफ़्टाली को एक समय तक नेतन्याहू का वफ़ादार माना जाता था। नेतन्याहू से अलग होने से पहले तक नेफ़्टाली 2006 से 2008 तक इज़रायल के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ रहे थे। नेतन्याहू की लिकुड पार्टी छोड़ने के बाद नेफ़्टाली दक्षिणपंथी धार्मिक यहूदी होम पार्टी में चले गए थे। साल 2013 के आम चुनाव में नेफ़्टाली इसराइली संसद में चुनकर पहुँचे।

साल 2019 तक हर गठबंधन सरकार में नेफ़्टाली मंत्री बने। साल 2019 में नेफ़्टाली के नए दक्षिणपंथी गठबंधन को एक भी सीट नहीं मिली। 11 महीने बाद फिर चुनाव हुए और नेफ़्टाली, यामिना पार्टी के प्रमुख के तौर पर संसद में चुनकर पहुँचे। माना जाता है कि वो नेतन्याहू से भी ज़्यादा अति-राष्ट्रवादी और दक्षिणपंथी विचारधारा के हैं। नेफ्टाली, नेतन्याहू की ही तरह इज़रायल को एक यहूदी राष्ट्र के तौर पर बनाने की वक़ालत करते हैं।

इसके साथ ही वे वेस्ट बैंक, पूर्वी यरुशलम और सीरियाई गोलान हाइट्स को भी यहूदी इतिहास का हिस्सा बताते हैं। वो कहते हैं कि इन इलाक़ों पर 1967 के मिडिल-ईस्ट वॉर के बाद से इज़रायल का नियंत्रण है। नेफ्टाली बेनेट नेतन्याहू की ही तरह फलस्तीनियों के वेस्ट बैंक को क़ब्ज़ाने और वहां यहूदियों को बसाने का समर्थन करते हैं और इसे लेकर वो काफी अक्रामक भी दिखते हैं।

अलग यह है कि वो ग़ज़ा पट्टी को इज़रायल का हिस्सा होने का दावा नहीं करते। उनका मानना है कि साल 2005 में इज़रायल के यहां से सैनिकों को हटाने के बाद इसपर इज़रायल का अधिकार ख़त्म हो गया। वेस्ट बैंक और ईस्ट यरुशलम में 6 लाख यहूदी रहते हैं। इन इलाकों में बनी बस्तियों को पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय अवैध मानता है जबकि इज़रायल इसे नकारता है। 

फलस्तीनियों और इज़रायल के बीच सेटलमेंट का मुद्दा सबसे विवादित मुद्दा है। फलस्तीनियों की हमेशा से मांग रही है कि इन इलाकों से यहूदियों को हटाया जाए। वेस्ट बैंक और ग़ज़ा को आज़ाद किया जाए जिसकी राजधानी ईस्ट यरूशेलम को ही बनाई जाए।

नेफ़्टाली इसे सिरे से ख़ारिज करते हैं और वो यहूदी बस्तियों के बसाने के अक्रामक रूप से पक्ष में हैं। नेफ़्टाली को लगता है कि यहूदियों को बसाने के मुद्दे पर नेतन्याहू की नीति भरोसे के लायक़ नहीं है।

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