IRCTC ने सिख समुदाय को भेजे ईमेल, निजता के अधिकार का उठा सवाल

by M. Nuruddin 11 months ago Views 1664

आईआरसीटीसी ने अपने ईमेल में एक 47 पन्ने का बुकलेट अटैच किया है जिसमें नरेंद्र मोदी और सिखों के बीच संबंध को बेहतर बताया गया है।

IRCTC sends email to Sikh community, questions reg
नये कृषि क़ानून के ख़िलाफ़ किसानों के प्रदर्शन के बीच रेलव ने ‘सिख समुदायों’ को ईमेल कर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उनकी ‘भलाई’ के ख़ातिर लिए गए 13 फैसलों का बखान किया है। आईआरसीटीसी ने अपने ईमेल में एक 47 पन्ने का बुकलेट अटैच किया है जिसमें नरेंद्र मोदी और सिखों के बीच संबंध को बेहतर बताया गया है। लेकिन इस पर विवाद खड़ा हो गया है। कहा जा रहा है कि सरकार लोगों की निजी जानकारी का उपयोग राजनीतिक प्रचार के लिए कर रही है। यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है।

विवाद के बाद रेलवे के अधिकारी ने अपने बयान में कहा कि इस ईमेल का मक़सद लोगों को जागरुक करना है। अधिकारी का कहना है कि रेलवे पहले भी ऐसा करता रहा है। बुकलेट हिंदी, अंग्रेज़ी और पंजाबी भाषा में है। आईआरसीटीसी में यात्री टिकट बुक कराने के दौरान अपनी जानकारी देते हैं, जिसमें ई-मेल आईडी देने का भी विकल्प होता है। रेलवे अधिकारी के मुताबिक़ यह ई-मेल 8-12 दिसंबर तक भेजे गए। अधिकारियों का कहना है कि 12 दिसंबर को ई-मेल भेजना बंद कर दिया गया था।


विवाद इसको लेकर शुरु हो गया कि रेलवे ने सिर्फ ‘सिख समुदायों’ को ही ये ई-मेल किए हैं। हालांकि अधिकारी के मुताबिक़ ई-मेल आईआरसीटीसी के पूरे डेटाबेस को भेजे गए हैं। आईआरसीटीसी ने इन रिपोर्टों का खंडन किया है कि ई-मेल सिर्फ ‘सिख समुदाय’ को भेजे गए। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ ई-मेल करीब दो करोड़ लोगों को किया गया है।

रेलवे अधिकारी का यह भी कहना है, ‘ऐसी कौन सी कंपनी या कॉर्पोरेट उन लोगों के डेमोग्राफिक प्रोफाइल का विश्लेषण नहीं करता है, जहां संदेश भेजा जाना है? अगर सरकार यही काम कर्पोरटे्स से बेहतर करने में सक्षम है तो कुछ लोग इससे आश्चर्यचिकत क्यों हैं ? खुश होना चाहिए कि ये सरकार सूचनाओं को लोगों तक पहुंचाने में अच्छी है।’

बुकलेट में 1984 के दंगा पीड़ितों को दिए गए न्याय, श्री हरमंदिर साहिब, जलियांवाला बाग मेमोरियल को एफसीआरए रजिस्ट्रेशन, लंगर के टैक्स फ्री किए जाने समेत अन्य फैसलों का ज़िक्र है। इस बुकलेट को 1 दिसंबर को गुरुनानक जयंती के मौके पर केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और हरदीप सिंह पुरी ने लॉन्च किया था।

26 नवंबर से हज़ारों किसान दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर धरने पर बैठे हैं। क़ानून को लेकर किसान और केन्द्र के बीच कई चरणों में बात भी हुई लेकिन कोई हल नहीं निकला। किसान नेताओं का कहना है कि जबतक सरकार क़ानून वापस नहीं लेती तबतक दिल्ली की सड़कों को एक-एक करके बंद कर दिया जाएगा। किसानों ने आज दिल्ली-जयपुर हाइवे को ब्लॉक कर दिया है। केन्द्र सरकार लगातार कह रही है कि वे क़ानून में संशोधन के लिए तैयार है और किसानों को आंदोलन ख़त्म कर देना चाहिए।

इसके लिए किसानों को एक प्रस्वाव भी भेजा गया था लेकिन किसानों ने बिना लिखित जवाब दिये प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिक्की की एक वार्षिक सम्मेलन में कहा था कि, ‘नए क़ानून से किसानों को नए बाज़ार मिलेंगे, नए विकल्प मिलेंगे, टेक्नोलॉजी का लाभ मिलेगा, देश का कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर आधुनिक होगा। इन सबसे कृषि क्षेत्र में ज़्यादा निवेश होगा।’

प्रधानमंत्री ने कहा कि खेती में जितना निजी क्षेत्र के का निवेश होना चाहिए था उतना नहीं हुआ। नए कृषि क़ानूनों से कृषि क्षेत्र में निवेश के रास्ते खुलेंगे और किसान इसी का विरोध कर रहे हैं कि सरकार कृषि को निजी हाथों में सौंपना चाहती है।

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