नोटबंदी के पांच साल बाद भी कैश लेनदेन में विश्वास करते भारतीय

by M. Nuruddin 7 months ago Views 2022

रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़ 2017 में 13.35 लाख करोड़ रूपये के मुक़ाबले मार्च 2021 तक कैश सर्कुलेशन देश में 28 लाख करोड़ रूपये पर पहुंच गया है...

Indians still believe in cash transactions five ye
नोटबंदी के पांच साल गुज़र चुके हैं और लेस-कैश अर्थव्यवस्था बनाने की क़वायद मानो धरी की धरी रह गई। इन पांच सालों की अवधि में देश में कैश का सर्कुलेशन बेतहाशा बढ़ा है। जबकि नोटबंदी जिन विचारों के साथ लागू किए गए थे उनमें एक देश में कैश के सर्कुलेशन को कम करके अर्थव्यवस्था को लेस कैश की तरफ ले जाने की भी थी।

हालांकि अगर पांच सालों की अवधि में नोटबंदी से बदलाव की बात करें तो सिर्फ डिजिटल ट्रांजेक्शन में ही बढ़ोत्तरी ज़रूर हुई है। लेकिन भारत की एक बड़ी आबादी आज भी कैश लेनदेन में ही विश्वास करती है। रिज़र्व बैंक की 2018 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक़ वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान देश में कैश का सर्कुलेशन 16.41 लाख करोड़ रूपये था।


2016-17 में नोटबंदी के ऐलान के बाद कैश सर्कुलेशन में कमी ज़रूर आई लेकिन उसके अगले साल से ही लोगों का डिजिटल ट्रांजेक्शन से विश्वास उठने लगा। नोटबंदी के बाद 2017 में कैश सर्कुलेशन में गिरावट ज़रूर देखी गई लेकिन इसके बाद के सालों में कैश सर्कुलेशन बढ़कर दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है।

रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़ 2017 में 13.35 लाख करोड़ रूपये के मुक़ाबले मार्च 2021 तक कैश सर्कुलेशन देश में 28 लाख करोड़ रूपये पर पहुंच गया है।

नोटबंदी से पहले 1,000 रुपये और 500 रुपये मूल्य के 15.44 लाख करोड़ रुपये सर्कुलेशन में थे। इनमें 1000 रुपये के 6,857.82 मिलियन नोट यानि 685,782 करोड़ रूपये और 500 रुपये के 17,165.06 मिलियन नोट यानि  858,253 करोड़ रूपये शामिल थे। इनमें 98.96 फीसदी 500 और 1000 रूपये क प्रतिबंधित नोट रिज़र्व बैंक के पास वापस आ गए।

इसके साथ ही रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया ने 500 और 2000 रूपये के नोटों की नई सीरीज़ जारी की। नोटबंदी के ऐलान के साथ ही रिज़र्व बैंक ने 500 रूपये मूल्य के 2.94 लाख नोट जारी किए थे। इसके बाद आरबीआई ने प्रत्येक साल 500 रूपये के नोटों की नई सीरीज़ के सर्कुलेशन में लगातार बढ़ोत्तरी की है।

रिज़र्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़ 2017-18 में 500 रूपये मूल्य के 7.73 लाख, 2018-19 में 10.7 लाख और 2019-20 में 14.7 लाख नोट सर्कुलेशन में थे। लेकिन अब यह 2020-21 के दौरान 19.3 लाख पर पहुंच गया है।

समान अवधि में अगर 2000 रूपये के नोटों के सर्कुलेशन की बात करें तो 2018-19 के बाद से यह लगातार घट रहा है। मसलन नोटबंदी के ऐलान के साथ 500 रूपये मूल्य के नोटों की तुलना में 2000 के नोट ज़्यादा जारी किए गए थे। तब 2000 रूपये मूल्य के 6.57 लाख नोट जारी किए गए थे। बाद में 2017-18 में देशभर में 2000 रूपये के नोटों का सर्कुलेशन 6.72 लाख पर पहुंच गया।

इसके बाद 2018-19 में इसमें कमी देखी गई और साल दर साल यह घटकर 4.9 लाख पर आ गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया कि 2000 रूपये मूल्य के नोटों की वित्त वर्ष 2021-22 में ताज़ा आपूर्ति नहीं कराई जाएगी। इससे पहले भी आरबीआई ने 2000 रूपये के नोटों का सर्कुलेशन रोक दिया था।

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