नया साल, पुरानी कहानी: बेरोजगारी दर चार महीने के उच्चतम स्तर पर !

by GoNews Desk Edited by M. Nuruddin 7 months ago Views 2298

कई राज्यों में नए सिरे से प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं और इससे कई व्यवसायों के संचालन, सप्लाइ चेन और सेवा वितरण पर प्रभाव पड़ रहा है...

Indian youth's new year started with old stories,
भारतीय युवाओं का नया साल पुरानी कहानी के साथ ही शुरु हुआ है। दिसंबर 2021 में राष्ट्रीय बेरोजगारी दल अक्टूबर महीने के मुक़ाबले बढ़कर 7.91 फीसदी हो गई है। शहरी बेरोजगारी दर 9.3 फीसदी हो गई है जो अगस्त महीने के मुक़ाबले ज़्यादा है। आसान भाषा में कहें तो 2021 के आख़िरी महीने में भारत में बेरोजगारी दर चार महीने के अपने उच्चतम स्तर पर रहा।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के मुताबिक़, दूसरी लहर के दौरान मई महीने में बेरोजगारी दर 11.84 फीसदी दर्ज की गई थी और अगस्त महीने में 8.32 फीसदी दर्ज की गई थी।


टॉप पांच राज्य जहां बेरोजगारी दर सबसे ज़्यादा है उनमें हरियाणा (34.1 फीसदी), राजस्थान (27.1 फीसदी), झारखंड (17.3 फीसदी), बिहार (16 फीसदी) और जम्मू और कश्मीर (15 फीसदी) शामिल है। सरकार बेरोजगारी की साप्ताहिक दर जारी नहीं करती। ऐसे में सीएमआइई का डेटा देश में बेरोजगारी के मौजूदा हालात की जानकारी का कुछ विश्वसनीय स्त्रोत है।

मुख्य आर्थिक क्षेत्रों में विकास धीमा

उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (Department for Promotion of Industry and Internal Trade - DPIIT) ने 31 दिसंबर 2021 की एक प्रेस रिलीज में बताया कि नवंबर 2021 तक, अर्थव्यवस्था के आठ प्रमुख क्षेत्रों में वार्षिक वृद्धि 3.1 फीसदी थी, जो अगस्त 2021 में 12.2 फीसदी के बाद से सबसे कम है।

नवंबर 2021 में कच्चे तेल की वृद्धि -2.2 फीसदी थी, जो पूरे साल नकारात्मक रही। इसके बाद सीमेंट क्षेत्र की वृद्धि दर अगस्त महीने में 36.3 फीसदी के मुक़ाबले नवंबर महीने में गिरकर -3.2 फीसदी पर आ गई है। इनका अलावा बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर महामारी की दूसरी लहर के बाद अगस्त महीने में 16 फीसदी के मुक़ाबले नवंबर 2021 में गिरकर 1.5 फीसदी पर आ गया।

कमोबेश यही हाल अन्य क्षेत्रों का भी है। कोर सेक्टरों की धीमी वृद्धि हमें बेरोजगारी के हालात के बारे में बताती है और इन क्षेत्रों के ख़राब प्रदर्शन से बेरोजगारी की हालत गंभीर हो जाती है। इन कोर क्षेत्रों में अगर अच्छी ग्रोथ होती है तो इससे बेरोजगारी की हालत भी सुधर सकती है।

अब ओमिक्रॉन से ख़तरा !

अब देश में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का प्रकोप बढ़ रहा है और तीसरी लहर की संभावना से कंज़्युमर सेंटिमेंट ख़राब हुआ है। पिछली तिमाही में सुधार की दिशा में किए गए काम के फिर से बिगड़ने की आशंका है।

दिल्ली और पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र जैसे कई राज्यों में नए सिरे से प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं और इससे कई व्यवसायों के संचालन, सप्लाइ चेन और सेवा वितरण पर प्रभाव पड़ रहा है।

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