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अप्रैल-जून में भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन 2008 की वैश्विक मंदी से कई गुना ख़राब: आईएमएफ़

by Rahul Gautam 7 months ago Views 1391

Indian economy's performance in April-June deterio
सरकारी दावों को धता बताते हुए जीडीपी के ताज़ा आंकड़ों ने अर्थव्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। अब इंटरनेशनल मोनेटरी फंड यानि आईएमएफ की मुख्य आर्थिक सलाहकार गीता गोपीनाथ ने भारत की अर्थव्यवस्था का दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से मिलान करते हुए बताया है कि पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा भारत की अर्थव्यवस्था को ही लॉकडाउन से नुकसान उठाना पड़ा है.

बता दें कि चालू वित्त वर्ष की पहले तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था को इतना ज्यादा नुक्सान हुआ है जबकि इसके मुकाबले 2008 की वैश्विक मंदी को भारत ने बहुत आसानी के साथ पार किया था। आईएमएफ की प्रमुख अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ के मुताबिक भारत के विपरीत चीन दुनिया का अकेला मुल्क है जिसने उसी समय काल में सकारात्मक विकास दर हासिल की है।


गीता के मुताबिक अप्रैल-जून में भारत की अर्थव्यवस्था जहा 23.6 फीसदी सिकुड़ी, वहीं ब्रिटेन की 20.4 फीसदी, मेक्सिको की 17.1, अमेरिका की 9.1 फीसदी और दक्षिण कोरिया की 3.2 फीसदी इकॉनमी सिकुड़ी है। ये वही समय काल है जब पूरी दुनिया में अलग अलग देश कोरोना महामारी को रोकने के लिए लॉकडाउन लगा रहे थे लेकिन इसका सबसे ज्यादा नुक्सान हुआ है भारत को। आर्थिक मोर्चे पर मची इस तबाही की सबसे बड़ी वजह है 25 मार्च को अचानक लगाया गया लॉकडाउन जो कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगाया गया था.

4 घंटे में घोषित हुआ लॉकडाउन 70 दिनों से ज्यादा चला और इस दौरान देश में आर्थिक गतिविधियों पर पूरी तरह ब्रेक लग गया. इस दौरान सिर्फ आवश्यक सेवाओं जैसे कि खाद्य पदार्थों और दवाओं की आपूर्ति की ही इजाज़त थी. मोदी सरकार लॉकडाउन के दौरान अर्थव्यवस्था को संभालने में बुरी तरह फेल साबित हुई.

भारत के ताज़ा जारी जीडीपी के आंकड़ों का मिलान अगर अब 2008 के आंकड़ों से करें तो मालूम पड़ता है कि जब पूरी दुनिया में आर्थिक मोर्चे पर हाहाकार मचा हुआ था, तब भी भारत की अर्थव्यवस्था और सरकार ने उसका डटकर मुकाबला किया था।

भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2008-09 में भी सिकुड़ी थी, लेकिन मात्र 1.7 फीसदी। उल्टा उस समय मंदी से ना सिर्फ भारत तेज़ी से उभरा बल्कि दोबारा विकास की गति को हासिल कर लिया था.

ज़ाहिर है आंकड़े साफ़ कहानी बयान करते हैं कि भारत द्वारा लगाए गए सख्त लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था को पूरी तरह निचोड़ कर रख दिया है और सरकार के लिए आगे का रास्ता बेहद चुनौतीपूर्ण है.

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