ग्लोबल GDP रैंक में 7वें पायदान पर लुढ़का भारत

by GoNews Desk 6 months ago Views 1908

खुद सरकार के आंकड़े बतातें है कि साल 2020-21 में अर्थव्यवस्था में 7.2 फीसदी और प्रति व्यक्ति आय में 8.9 प्रतिशत की गिरावट हुई.

Indian economy

कोरोना महामारी के बीच देश एक और झटका लगा है. 2020 में आर्थिक मंदी से जूझ रहा भारत ग्लोबल जीडीपी रैंक में 7वें पायदान पर लुढ़क गया है. ये जानलेवा महामारी सिर्फ 29 दिनों में ही 1 करोड़ लोगों को अपना निशाना बना चुकी है. 17 मई तक 278751 लोगों ने संक्रमण से अपनी जान गंवाई है जबकि औसतन कोरोना से रोज 4,000 लोग मारे जा रहे हैं. भले ही केंद्र ने राष्ट्रीय स्तर का लॉकडाउन न लगाया हो लेकिन मध्य प्रदेश समेत देश के कई घनी आबादी वाले राज्यों ने संक्रमण को रोकने के लिए पाबंदी लागू कर दी है. इन पाबंदियों की मार व्यापारिक गतिविधियों पर भी पड़ी है. 

रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार हाल ही में लागू की गई पाबंदियों का व्यापारिक गतिविधयों पर असर 2020 जितना बुरा नहीं है लेकिन इससे कई क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ा है और ये अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदेह है. कई वैश्विक संस्थाओं और बैंकों ने पहले ही भारत में इस साल सिंगल डिजिट जीडीपी ग्रोथ का अनुमान जताया है.

साल 2005 में भारत ने 10वें पायदन के साथ दुनिया की 10 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में एंट्री ली. लगातार दो साल तक देश की जीडीपी ने 8 फीसदी तक बढ़ोतरी देखी. इसके बाद 2009 में अमेरिका के बैंकिंग सैक्टर में  आई मंदी ने वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को संकट में ला कर खड़ा दिया. इस दौरान भारत ने अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था में फार्मिंग लोन के रूप में नकदी का बड़ा हिस्सा निवेश किया और इस मंदी का सामना किया. साल 2011 में मीडिया ने वर्लड बैंक की कई रिपोर्टों के अनुसार भारत को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताया लेकिन पिछले 10 सालों में देश की अर्थव्यवस्था में लगातार उतार देखा गया है. साल 2018 में जीडीपी में 7 फीसदी की गिरावट के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की सूची में 5वें नंबर पर पहुंच गई जबकि अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार भारत अब इस सूची में 7वें नंबर पर पहुंच गया है.

आरबीआई की रिपोर्ट हालांकि बताती हैं कि फिस्कल इंटरवेंशन के चलते आपूर्ति यानि सप्लाई साइड को नुकसान नहीं पहुचा है लेकिन लोगों को वस्तु और सेवाओं को खरीदने में आर्थिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा है जिससे मांग में गिरावट हुई है. सरकार ने लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए लॉन्ग टर्म मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का ऐलान किया है लेकिन ऐसा होंना मुश्किल है क्योंकि पैसे की कमी के कारण लोगों की खरीदने की शक्ति खत्म हो गई है.

खुद सरकार के आंकड़े बतातें है कि साल 2020-21 में अर्थव्यवस्था में 7.2 फीसदी और प्रति व्यक्ति आय में 8.9 प्रतिशत की गिरावट हुई. इससे समझा जा सकता है कि बाज़ार  में मांग कम क्यों है. अर्थशास्त्रियों ने सरकार को लोगों को सीधे वित्तीय फायदा पहुंचाने की सलाह दी है लेकिन अभी तक इसे माना नहीं गया है. साफ है कि भारत लोगों के जीवन के साथ साथ दुनिया में अपना आर्थिक दबदबा भी खो रहा है.

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