Vaccination: पर्याप्त फंड होते हुए 15,000 करोड़ रूपये क़र्ज़ लेगी केन्द्र सरकार !

by M. Nuruddin 1 month ago Views 2014

Vaccination: पर्याप्त फंड होते हुए 15,000 करोड़ रूपये का क़र्ज़ लेने जा रही केन्द्र सरकार !

India seeks 15,000 crores of vaccine loans from AD
भारत सरकार ने एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) में हज़ारों करोड़ रूपये के क़र्ज़ लेने के लिए आवेदन दिया है। बताया गया है कि केन्द्र सरकार कोरोना वैक्सीन की 667 मिलियन खुराक की खरीद के लिए यह क़र्ज़ ले रही है। हालांकि इस क़र्ज़ के लिए तब आवेदन किया गया है जबकि केन्द्र सरकार वैक्सीन के लिए पहले ही बजट निर्धारित कर चुकी है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कथित तौर पर कोरोना महामारी से निपटने के लिए एक पीएम केयर्स नाम से फंड भी शुरु की थी जिसमें हज़ारों करोड़ रूपये डोनेशन मिले हैं।

बावजूद इसके केन्द्र सरकार ने एशियन डेवलपमेंट बैंक में 1.5 अरब डॉलर और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक में 500 मिलियन डॉलर के क़र्ज़ के लिए आवेदन किया है। केन्द्र एशिया पैसिफिक वैक्सीन एक्सेस फैसिलिटी के तहत यह क़र्ज़ ले रहा है, जिस पहल के ज़रिए विकासशील देशों को वैक्सीन आपूर्ति के लिए फंड मुहैया कराया जाता है। इसकी शुरुआत दिसंबर 2020 में की गई थी।


मनीला स्थित एशियन डेवलपमेंट बैंक, जिसमें अमेरिका और जापान सबसे बड़े शेयरधारक हैं, और बीजिंग स्थित एआईआईबी, जहां चीन और भारत सबसे बड़े शेयरधारक हैं, दोनों जगह भारत सरकार का लोन आवेदन फिलहाल विचाराधीन है। हालांकि केन्द्र सरकार को उन 667 मिलियन वैक्सीन के डोज़ की ख़रीद करनी है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा योग्य क़रार दिए गए हैं।

सीरम इंस्टीट्यूट की कोवीशील्ड वैक्सीन डबल्यूएचओ के मानदंडों के तहत योग्य है, जबकि भारत बायोटेक की वैक्सीन की योग्यता पर 3 नवंबर को अंतिम फैसला आना है। एक अंग्रेज़ी दैनिक दि हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ एशियन डेवलपमेंट बैंक सिर्फ कोवैक्स पहल के तहत ही वैक्सीन ख़रीद को फंड करता है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पहले से ही अप्रूव्ड यानि योग्य क़रार दिया जा चुका है।

हालांकि इस कोवैक्स पहल की भारतीय स्वास्थ्य मंत्रालय के पास सदस्यता नहीं है। साथ ही इस वैक्सीन ख़रीद को बीजिंग स्थित एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक इस वैक्सीन ख़रीद को 500 मिलियन डॉलर की मदद करेगा।

आसान भाषा में कहें तो केन्द्र सरकार वैक्सीनेशन के लिए पर्याप्त फंड होते हुए एडीबी से 11.23 हज़ार करोड़ और एआईआईबी से 3.74 हज़ार करोड़ रूपये क़र्ज़ लेने जा रही है, जो कुल करीब 15000 करोड़ रूपये बनता है।

वैक्सीन ख़रीद के लिए केन्द्र को क़र्ज़ की ज़रूरत क्यों ?

केन्द्र की मोदी सरकार ने वैक्सीन ख़रीद के लिए चालू वित्त वर्ष की बजट पेशी के दौरान 35 हज़ार करोड़ रूपये आवंटित किए थे। इसके साथ ही वित्त मंत्री निर्माला सीतारमण ने कहा था कि अगर आगे और फंड की ज़रूरत होगी तो वित्त मंत्रालय मुहैया कराएगा। ख़ास बात यह है कि वित्त मंत्रालय में एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी टी.वी. सोमनाथन ने बताया था कि इस 35 हज़ार करोड़ रूपये से देश के 50 करोड़ लोगों का वैक्सीनेशन किया जा सकता है।

साथ ही उन्होंने बताया था कि ऐसा तब संभव है जब प्रति व्यक्ति दो ख़राक की कीमत 700 रूपये हो। जबकि आख़िरी बार सरकारी ख़रीद के लिए वैक्सीन की कीमत 150 रूपये तय की गई थी। यानि एक शख़्स के पूर्ण टीकाकरण का ख़र्च 300 रूपये पड़ रहा था। हालांकि बिज़नेस स्टैंडर्ड की एक ख़बर के मुताबिक़ केन्द्र सरकार ने वैक्सीन ख़रीद के लिए ख़ुराक की कीमतों में 36-40 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है। अब सरकार को प्रति व्यक्ति पूर्ण वैक्सीनेशन के लिए 430 से 450 रूपये तक देने पड़ रहे हैं।

रिपोर्ट में वैक्सीन इंडस्ट्री के एक सूत्र के हवाले से बताया गया है कि वैक्सीन के ख़ुराक की पूर्व कीमत ठीक थी और उस कीमत पर वैक्सीन मुहैया कराने में कोई तक़लीफ भी नहीं थी।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसी दरमियान 14,500 करोड़ रुपये की लागत से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कोविशील्ड और भारत बायोटेक के कोवैक्सिन की 660 मिलियन ख़ुराक की ख़रीद का ऑर्डर दिया था, जिसकी सप्लाई इस साल के दिसंबर महीने तक होनी है। हालांकि इसका भुगतान किस फंड से हुआ है इसकी जानकारी रिपोर्ट में नहीं है।

इनके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कथित तौर पर कोरोना महामारी से निपटने के लिए पीएम केयर्स फंड स्थापित किए थे, जिसमें देश-विदेश से 30 हज़ार करोड़ रूपये से ज़्यादा के डोनेशन मिले हैं। ऐसे तो इस फंड के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने थोड़ा-बहुत ख़र्च भी किया है लेकिन हज़ारों करोड़ रूपये की राशी फंड में ही जमा है और उसके इस्तेमाल की आंशिक जानकारी ही सार्वजनिक की गई है।

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