क्या हथियारों की विदेशी ख़रीद रोकने पर विचार कर रहा है भारत ?

by GoNews Desk 5 months ago Views 1884

India Rethinks Its Defence Purchases that Could Re
भारत सरकार की तरफ से एक अचानक फैसला आया है जिसका प्रभाव वैश्विक रक्षा उद्योग पर पड़ सकता है। भारत कथित तौर पर हथियारों की विदेशी ख़रीद पर रोक लगाने पर विचार कर रहा है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश है और अगर भारत अपने इस कथित फैसले पर बरक़रार रहता है तो इसका अंतरराष्ट्रीय रक्षा उद्योग पर रणनीतिक और आर्थिक तौर पर प्रभाव पड़ सकता है।

कथित तौर पर भारत सरकार का अपनी सामरिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने का लक्ष्य है। इसपर आगे का रास्ता तय करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी बुधवार, 12 जनवरी को एक उच्च स्तरीय बैठक कर रहे हैं। इस दौरान हथियारों के विदेशी आयात पर अंतिम फैसले हो सकते हैं लेकिन इसपर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कोरोना संक्रिमित हो जाने के बाद फिलहाल प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है।


भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक़, भारत ने 2016-19 के बीच 37 अरब डॉलर या 2.77 लाख रुपये मूल्य के हथियार विदेशों से आयात किए और सरकार की इस साल अपने रक्षा आयात बिल से कम से कम 2 अरब डॉलर की कटौती करने की योजना है। स्टॉकहोम स्थित थिंक टैंक SIPRI का कहना है कि सऊदी अरब (11 फीसदी) के बाद 2020 के दौरान भारत 9.5 फीसदी हिस्सेदारी के साथ वैश्विक सैन्य हथियार आयात के मामले में तीसरे स्थान पर रहा।

ग़ौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत की रक्षा खरीद में गिरावट आई है और विश्व बैंक की व्यापार रिपोर्ट के मुताबिक़ 2010 की तुलना में अब कम है।

पिछले दशक के दौरान भारत ने विश्व कूटनीति पर एक लीवरेज के रूप में हथियार अधिग्रहण की अपनी पसंद में भारी बदलाव किया है। 2011 तक, भारत की आपूर्ति का लगभग 70 फीसदी हिस्सा रूस से आता था, लेकिन पिछले पांच वर्षों के दौरान रूसी ख़रीद घटकर 49 फीसदी पर आ गई है। फ्रांस और इज़राइल इसके दो प्रमुख नए हथियार आपूर्तिकर्ताओं के रूप में उभरे हैं।

मोदी सरकार के सैन्य ज़रूरतों को पुनर्गठित करने और हथियार के अपने विदेशी ख़रीद पर रोक लगाने के फैसले से भारत के आपूर्तिकर्ता प्रभावित हो सकते हैं। SIPRI के मुताबिक़ रूस अपने कुल सैन्य निर्यात में 23 फीसदी भारत को करता है। इसके बाद फ्रांस 21 फीसदी, इज़राइल 43 फीसदी और दक्षिण अफ्रीका अपना 13 फीसदी भारत को निर्यात करता है। इस लिस्ट से ग़ायब एकमात्र देश अमेरिका है जो दुनिया को हथियारों का सबसे बड़ा निर्यातक है।

ग़ौरतलब है कि भारत का 2021 के दौरान सैन्य बजट 4.78 लाख करोड़ या लगभग 64 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसका एक बड़ा हिस्सा सिर्फ हथियारों की ख़रीद पर ख़र्च होता है। इस बीच जब आशंकाएं हैं कि भारत हथियार की विदेशी ख़रीद पर रोक लगा सकता है, रूस से नौसेना हेलिकॉप्टर खरीद और इज़रायल से मिसाइल डिफेंस सिस्टम की ख़रीद की बातचीत चल रही है।

रूस से एस400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने को लेकर भारत पर अमेरिका का दबाव रहा है। इस दरमियान राष्ट्रपति पुतिन 6 घंटे के लिए भारत दौरे पर भी आए थे और दोनों देशों ने अमेरिकी दबाव के सामना करना का ऐलान किया था और आख़िरकार सौदा सफल रहा।

अपनी नवीनतम वैश्विक रिपोर्ट में SIPRI का कहना है: “रूस साल 2011-15 और 2016-20 के दौरान भारत का सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता रहा। हालांकि इन दो अवधियों के बीच रूस की डिलिवरी में 53 फीसदी की गिरावट आई और कुल भारतीय आयात 70 फीसदी से गिरकर 49 फीसदी पर आ गया।

2011–15 और 2016–20 दोनों अवधियों में रूस भारत को सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता था। हालांकि, इन दो अवधियों के बीच रूस की डिलीवरी में 53 प्रतिशत की गिरावट आई और कुल भारतीय हथियारों के आयात में उसका हिस्सा 70 से 49 प्रतिशत तक गिर गया।

2011-15 की अवधि में अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता था, लेकिन 2016-20 में अमेरिका से भारत के हथियारों के आयात में पिछले पांच साल की अवधि की तुलना में 46 फीसदी की कमी आई, जिससे अमेरिका भारत का चौथा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया।

2016–20 में फ्रांस (राफेल लड़ाकू जेट) और इज़राइल (बराक मिसाइल) भारत के लिए दूसरे और तीसरे सबसे बड़े हथियार आपूर्तिकर्ता थे। इस दरमियान फ्रांस से भारत के हथियारों के आयात में 709 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि इज़राइल से हथियारों के आयात में 82 फीसदी की वृद्धि हुई।

भारत पाकिस्तान और चीन से बढ़ते ख़तरों को समझता है और रणनीतिक विश्लेषकों ने रेखांकित किया है कि देश जम्मू और कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैली हजारों किलोमीटर की "सीमाओं" पर टकराव का सामना कर रहा है। 2018 में लॉन्च किए गए आत्मनिर्भर मिशन के तहत देश के अपने प्रमुख हथियारों का उत्पादन करने की महत्वाकांक्षी योजनाओं में काफी देरी हुई है। अब यह हथियारों के आयात के लिए बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों की योजना बना रहा है।

लड़ाकू विमानों, एयर डिफेंस सिस्टम, जहाजों और पनडुब्बियों की उत्कृष्ट डिलीवरी के आधार पर, आने वाले वर्षों में भारत के हथियार आयात में वृद्धि होने की उम्मीद है। और पुराने दुश्मनों का मुक़ाबला करने के लिए आपूर्ति करने वाले दोस्तों की अपने नए सैन्य हार्डवेयर को फिर से परिभाषित करके, भारत अपनी पसंद के आधार पर दुनिया में पूरे सैन्य व्यापार को फिर से परिभाषित कर सकता है।

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