भारत ऐतिहासिक बिजली संकट की कगार पर या सिर्फ राजनीतिक हवा?

by GoNews Desk 8 months ago Views 2418

Coal Crisis, Power Outages: Real Or Political Hot

चीन के कोयला प्रधान प्रांत शान्शी में बांढ़ के कारण 60 कोयला खदाने प्रभावित हुई हैं। चीन जो कि मौजूदा समय में बिजली संकट का सामना कर रहा है और इसके कई हिस्सों में बिजली गुल है, उसके लिए यह बाढ़ आपदा जैसी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में भी बिजली गुल होने जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स और कुछ अधिकारियों के मुताबिक देश में कोयले की कमी के कारण गंभीर बिजली संकट पैदा हो सकता है।

इसे लेकर दिल्ली और पंजाब समेत कई राज्यों ने अपने यहां बिजली की कमी से केंद्र को अवगत कराया है। दिल्ली और पंजाब के मुख्यमंत्रियों ने जारी कोयले की कमी के लिए केंद्र की आलोचना की है। इसके कारण राज्यों में पावर कट या फिर ब्लैकआउट हो सकता है। यहां तक कि बिजली सप्लायरों ने अनिर्धारित कटौती और लोड शेडिंग को लागू करना शुरू कर दिया है क्योंकि देश के आधे से ज़्यादा कोयला प्लांट में स्टॉक जल्दी ही खत्म हो सकता है। 

राजस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि कोयले की कमी के कारण राज्य पावर कट का सामना करने को मजबूर है। अतिरिक्त मुख्य सचिव सुबोध अग्रवाल ने कहा कि राज्य में फिलहाल 9,317 मेगा वाट पावर उपलब्ध है जबकि राज्य को 10,683 मेगा वाट की ज़रूरत है। राजस्थान में औसतन अधिकतम 12000 मेगा वाट बिजली की ज़रूरत होती है। उन्होंने बताया कि राजस्थान सरकार ने केंद्र को कोयले की आपूर्ति बढ़ाने के लिए पत्र लिखा है।  दिल्ली के बिजली मंत्री सत्येंद्र जैन ने 9 अक्टूबर को कहा था, “यदि कोयले की आपूर्ति में सुधार नहीं होता है, तो दिल्ली में दो दिनों में ब्लैकआउट हो जाएगा।”

उन्होंने आगे कहा, "दिल्ली को बिजली की आपूर्ति करने वाले कोयले से चलने वाले बिजली प्लांट को एक महीने के न्यूनतम कोयला स्टॉक रखना होगा, लेकिन अब यह कम हो कर न्यूनतम एक दिन पर आ गया है।” जैन ने कोयला संकट की संक्रमण की दूसरी लहर में पैदा हुए ऑक्सीजन संकट से तुलना करते हुए इसे ‘मानव निर्मित’ बताया था। 

पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने भी राज्य के लिए 9000 मेगावाट से अधिक के निर्धारित कोटे के मुताबिक कोयले के आवंटन में वृद्धि की वही मांग दोहराई। कोल इंडिया के पर्याप्त कोयले की आपूर्ति न करने की वजह से वहां बिजली उत्पादन में कटौती की गई है और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड के संचालित दो और निजी कंपनियों के तीन प्लांट में रोटेशनल लोड शेडिंग लागू की जा रही है।

8 अक्टूबर को ओडिशा के औद्योगिक संघ, उत्कल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री लिमिटेड (यूसीसीआई) ने भी मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को पत्र लिखा कर कहा था कि राज्य में कोयले की मौजूदा विकट कमी के हालातों में, कई इकाइयों के पास या तो स्टॉक नहीं है या गंभीर स्तर पर कोयला स्टॉक है जिससे कि औद्योगिक इकाइयों का सामान्य संचालन गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

लिखी गई चिट्ठी के मुताबिक ओडिशा में प्रचूर मात्रा में कोयला है। इसके पास देश के 25 फीसदी कोयला रिजर्व है। राज्य में इंडस्ट्री को काम करने के लिए राज्य के 60 फीसदी कोयले की ज़ररूत होगी लेकिन इसके 65 फीसदी कोयले के दूसरे राज्यों में निर्यात होने के चलते उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।

कई राज्यों की चेतावनी के बाद भी केंद्रिय बिजली मंत्री आरके सिंह ने कहा है कोयले की आपूर्ति की कमी के बारे में गैर-ज़रूरती "घबराहट" पैदा की जा रही है। दिल्ली में बिजली संकट पैदा होंने की अटकलें तब तेज़ हो गई थी जब उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में बिजली आपूर्ति करने वाली टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड ने कोयले की कमी के कारण पावर सप्लाई के गंभीर स्तर पर पहुंचने को लेकर एसएमएस के जरिए चेतावनी जारी की थी हालांकि सिंह ने इस चेतावनी को कंपनी का ‘गैर-ज़िम्मेदाराना रवैया’ बताया।

कोयला मंत्रालय ने भी 'स्पष्ट' किया है कि भंडार कम है, इसका मतलब यह नहीं है कि बिजली उत्पादन प्रभावित होगा क्योंकि स्टॉक को दिन-प्रतिदिन 'रोलिंग आधार' पर फिर से भरा जा रहा है। एक प्रेस रिलीज में मंत्रालय ने दावा किया था कि बिजली प्लांट की मांग को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त कोयला मौजूद है और बिजली आपूर्ति में बाधा का कोई भी डर पूरी तरह से गलत है।

कोयले की कमी को नकारने के बावजूद खुद केंद्रिय गृह मंत्री अमित शाह ने बीते दिन केंद्रीय ऊर्जा मंत्री और केंद्रीय कोयला मंत्री, श्री आर.के. सिंह और श्री प्रहलाद जोशी और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा की थी जबकि जल्द ही प्रधानमंत्री कार्यालय भी संभावित बिजली संकट की समीक्षा कर सकता है।

अगर राज्यों का यह डर सच साबित होता है तो भारत में फिर साल 2001 और 2012 की तरह बड़े स्तर पर ब्लैकआउट हो सकता है; जिससे कि करोड़ों लोग प्रभावित हुए थे। साल 2012 में 30 जुलाई को ब्लैकआउट हुआ।

इससे राजधानी दिल्ली समेत 9 राज्यों के 30 करोड़ लोग प्रभावित हुए और फिर एक के एक बाद एक उत्तरी, पश्चिमी, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी ग्रिड में ब्लैकआउट के कारण 20 राज्यों के कुल 70 करोड़ लोग प्रभावित हुए। इससे पहले जनवरी 2001 में भी उत्तरी ग्रिड में फेलियर के कारण ऐसा ही एक ब्लैकआउट हुआ था, जिसने इंटरकनेक्टेड नेटवर्क के आधार पर लगभग 23 करोड़ को प्रभावित किया था।

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